असम में लागू होगा समान नागरिक संहिता (UCC): कैबिनेट की मंजूरी, आदिवासियों को छूट और सरकारी खर्चों में भारी कटौती का ऐलान।

असम में लागू होगा समान नागरिक संहिता (UCC): कैबिनेट की मंजूरी, आदिवासियों को छूट और सरकारी खर्चों में भारी कटौती का ऐलान।

असम कैबिनेट ने समान नागरिक संहिता (UCC) के मसौदे को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि जनजातीय समुदाय इसके दायरे से बाहर रहेंगे। साथ ही, मंत्रियों के काफिले और विदेश यात्राओं पर भी रोक लगा दी गई है।

असम में समान नागरिक संहिता: एक नया प्रशासनिक और सामाजिक अध्याय

असम भारत का चौथा ऐसा राज्य बनने जा रहा है जो व्यक्तिगत मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान कानून यानी समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करेगा। गोवा, उत्तराखंड और गुजरात के बाद अब असम सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल की पहली कैबिनेट बैठक में इस क्रांतिकारी बदलाव को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कानून चुनावी वादों को पूरा करने और राज्य में सामाजिक समानता सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। हालांकि, असम का यह कानून अन्य राज्यों की तुलना में थोड़ा अलग और विशिष्ट होगा, क्योंकि इसे राज्य की जनसांख्यिकीय विविधताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

जनजातीय समुदायों को छूट और सांस्कृतिक संरक्षण

असम की यूसीसी (UCC) की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें राज्य की जनजातीय आबादी (Tribal Population) को पूरी तरह से इसके दायरे से बाहर रखा गया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने स्पष्ट रूप से घोषणा की है कि जनजातीय लोगों की परंपराएं, रीति-रिवाज और उनकी विशिष्ट पहचान अक्षुण्ण बनी रहेगी। इसके अलावा, असम के लोगों द्वारा अपनाई जाने वाली पूजा की सभी पद्धतियों और परंपराओं को भी इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है। यह निर्णय राज्य की विविध संस्कृति और आदिवासी समुदायों की स्वायत्तता का सम्मान करने के उद्देश्य से लिया गया है, ताकि कानून के माध्यम से किसी की सांस्कृतिक विरासत पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

यूसीसी का दायरा: विवाह, विरासत और पंजीकरण

असम में प्रस्तावित समान नागरिक संहिता मुख्य रूप से चार प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित होगी:

  • विरासत (Inheritance): संपत्ति के अधिकारों में समानता सुनिश्चित करना।
  • विवाह (Marriage): विवाह से संबंधित नियमों का मानकीकरण।
  • लिव-इन रिलेशनशिप: बिना शादी के साथ रहने वाले जोड़ों के लिए नियमों का निर्धारण।
  • पंजीकरण: विवाह और तलाक का अनिवार्य पंजीकरण सुनिश्चित करना।

मुख्यमंत्री ने बताया कि यद्यपि उत्तराखंड और गुजरात जैसे राज्यों ने पहले ही इसे लागू कर दिया है, लेकिन असम सरकार ने राज्य की अपनी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इसका एक ‘कस्टमाइज्ड’ (Customized) मसौदा तैयार किया है। इस बिल को 26 मई को नवनिर्वाचित विधानसभा के पटल पर रखा जाएगा।

सरकारी खर्च में कटौती और मितव्ययिता के उपाय

कैबिनेट बैठक में केवल सामाजिक सुधारों पर ही नहीं, बल्कि आर्थिक अनुशासन पर भी कड़ा रुख अपनाया गया है। पश्चिम एशिया संकट के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में आए व्यवधान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन संरक्षण की अपील के जवाब में, असम कैबिनेट ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। राज्य सरकार ने विदेशी मुद्रा बचाने और फिजूलखर्ची रोकने के लिए ‘एक्सपेंडिचर कटिंग’ (Expenditure Cutting) उपायों की घोषणा की है।

इसके तहत, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मंत्रियों और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के काफिले (Convoys) में वाहनों की संख्या कम करने का निर्णय लिया गया है। यह कदम न केवल ईंधन की बचत करेगा, बल्कि प्रशासनिक सादगी का संदेश भी देगा। इसके अलावा, अगले छह महीनों के लिए किसी भी सरकारी अधिकारी को आधिकारिक या निजी विदेश यात्रा की अनुमति नहीं दी जाएगी, सिवाय मेडिकल इमरजेंसी के। यह निर्णय राज्य के खजाने पर पड़ने वाले बोझ को कम करने और राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे बचत अभियान में योगदान देने के लिए लिया गया है।

राजनीतिक और प्रशासनिक महत्व

असम सरकार का यह निर्णय मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के दूसरे कार्यकाल की प्राथमिकताओं को स्पष्ट करता है। चुनाव के दौरान किए गए वादों को पहली ही कैबिनेट में अमली जामा पहनाना यह दर्शाता है कि सरकार अपनी विकास और सुधारवादी नीतियों को लेकर गंभीर है। 21-22 मई और 25-26 मई को आयोजित होने वाले विधानसभा सत्र के दौरान नए विधायकों का शपथ ग्रहण समारोह भी होगा, जिसके बाद इस ऐतिहासिक बिल को पेश किया जाएगा।

संतुलन और सुधार का मार्ग

निष्कर्षतः, असम में यूसीसी का कार्यान्वयन आधुनिक कानून और पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच एक संतुलन बनाने का प्रयास है। जनजातीय समुदायों को छूट देकर सरकार ने सामाजिक सामंजस्य बनाए रखने की कोशिश की है, जबकि विवाह और संपत्ति जैसे मामलों में एकरूपता लाकर कानूनी प्रक्रियाओं को सरल बनाने का लक्ष्य रखा है। साथ ही, आर्थिक संकट के समय में सरकारी खर्चों में कटौती करके असम सरकार ने एक जिम्मेदार प्रशासन होने का उदाहरण पेश किया है। आने वाले समय में, असम का यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए एक संदर्भ बिंदु बन सकता है जहाँ सांस्कृतिक विविधता और कानूनी एकरूपता को साथ लेकर चलने की आवश्यकता है।

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