बेटी की पढ़ाई के लिए नंगे पैर दौड़ी मां, ₹3 हजार की इनामी राशि ने खड़े किए सिस्टम पर सवाल: अरविंद केजरीवाल

बेटी की पढ़ाई के लिए नंगे पैर दौड़ी मां, ₹3 हजार की इनामी राशि ने खड़े किए सिस्टम पर सवाल: अरविंद केजरीवाल

 

अरविंद केजरीवाल ने बेटी की पढ़ाई के लिए ₹3 हजार की खातिर नंगे पैर मैराथन दौड़ने वाली मां के जज्बे को सलाम किया और बेटियों की शिक्षा को अधिकार बनाने की मांग की।

आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने बेटी की शिक्षा के लिए नंगे पैर मैराथन दौड़ने वाली एक मां की संघर्ष की कहानी को लेकर व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मां के जज्बे को सलाम करते हुए कहा कि बेटी की पढ़ाई किसी संघर्ष या मजबूरी का विषय नहीं, बल्कि उसका अधिकार होना चाहिए।

बेटी की पढ़ाई के लिए नंगे पैर दौड़ी मां

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि अपनी बेटी की शिक्षा के लिए महज 3,000 रुपये की इनामी राशि जीतने के उद्देश्य से रंबाई जी ने नंगे पैर मैराथन में हिस्सा लिया। आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद बेटी की पढ़ाई जारी रखने के लिए मां के इस प्रयास को उन्होंने साहस और मातृत्व की मिसाल बताया।

मां के जज्बे को सलाम, लेकिन सिस्टम पर सवाल

केजरीवाल ने कहा कि इस मां की मदद के लिए अब कई लोग आगे आएंगे, जो निश्चित रूप से सराहनीय है। लेकिन उन्होंने सवाल उठाया कि क्या व्यक्तिगत मदद से उस व्यवस्था में बदलाव आएगा, जिसके कारण किसी मां को अपनी बेटी की शिक्षा के लिए इस तरह संघर्ष करना पड़ रहा है।

देश में कितनी और बेटियां ऐसी मजबूरी झेल रही हैं?

AAP नेता ने कहा कि यह सिर्फ एक मां और उसकी बेटी की कहानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि देश में ऐसी कितनी और बेटियां हैं, जिनकी शिक्षा आर्थिक मजबूरियों के कारण प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि किसी भी बेटी को शिक्षा हासिल करने के लिए गरीबी और अभाव के खिलाफ इस तरह की लड़ाई नहीं लड़नी चाहिए।

बेटियों की शिक्षा अधिकार हो, संघर्ष नहीं

अरविंद केजरीवाल ने जोर देकर कहा कि बेटियों की शिक्षा उनका अधिकार है, कोई संघर्ष नहीं। उन्होंने व्यवस्था में बदलाव की जरूरत बताते हुए कहा कि ऐसी परिस्थितियां दोबारा पैदा न हों, इसके लिए सरकार और समाज दोनों को मिलकर काम करना होगा।

मदद के साथ व्यवस्था बदलने की जरूरत

केजरीवाल ने कहा कि जरूरतमंद परिवारों की मदद करना महत्वपूर्ण है, लेकिन केवल व्यक्तिगत सहायता पर्याप्त नहीं है। ऐसी व्यवस्था बनानी होगी, जिसमें आर्थिक स्थिति किसी बेटी की पढ़ाई के रास्ते में बाधा न बने और हर बच्ची को बेहतर शिक्षा का समान अवसर मिल सके।

उन्होंने कहा कि रंबाई जी का संघर्ष समाज को सोचने पर मजबूर करता है कि देश में बेटियों की शिक्षा को लेकर व्यवस्था को कितना मजबूत बनाने की जरूरत है। मां के जज्बे को सलाम करते हुए उन्होंने शिक्षा को हर बेटी का बुनियादी अधिकार बनाने की दिशा में ठोस बदलाव की जरूरत पर जोर दिया।

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