अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया का ‘सत्याग्रह’: अदालत के बहिष्कार के बीच बापू का आशीर्वाद लेने पहुंचे राजघाट

अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया का 'सत्याग्रह': अदालत के बहिष्कार के बीच बापू का आशीर्वाद लेने पहुंचे राजघाट

अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने दिल्ली शराब नीति मामले में अदालत का बहिष्कार किया। आज 12 बजे राजघाट जाकर बापू का आशीर्वाद लिया और सत्याग्रह का एलान किया। जानें पूरी वजह।

दिल्ली आबकारी नीति मामले में कानूनी लड़ाई लड़ रहे आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल और वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने आज दोपहर 12 बजे राजघाट पहुंचकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। यह दौरा तब हुआ है जब दोनों नेताओं ने दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत की कार्यवाही का पूरी तरह से बहिष्कार करने का एलान किया है। नेताओं ने इस कदम को ‘सत्याग्रह’ का नाम दिया है और स्पष्ट किया है कि वे वर्तमान परिस्थितियों में अदालत से न्याय की उम्मीद नहीं रखते।

“सत्य की राह पर सत्याग्रह”: केजरीवाल का बड़ा फैसला

अरविंद केजरीवाल ने राजघाट जाने से पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अपने इरादे साफ कर दिए थे। उन्होंने एक वीडियो संदेश में कहा, “बापू के दिखाए रास्ते पर चलते हुए, सत्याग्रह की भावना के साथ मैंने यह निर्णय लिया है कि मैं इस मामले में जस्टिस स्वर्ण कांता जी की अदालत में न तो खुद पेश होऊंगा और न ही मेरा कोई वकील मेरा प्रतिनिधित्व करेगा।” केजरीवाल ने यह भी स्पष्ट किया कि वे समय आने पर सुप्रीम कोर्ट जाने सहित अन्य कानूनी विकल्पों का उपयोग करने का अधिकार सुरक्षित रखते हैं।

सिसोदिया का भावुक पत्र: “बच्चों का भविष्य तुषार मेहता के हाथ में”

पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को पत्र लिखकर अपनी स्थिति स्पष्ट की। पार्टी सूत्रों के अनुसार, सिसोदिया ने पत्र में गहरी निराशा व्यक्त करते हुए लिखा, “मेरी तरफ से भी कोई वकील पेश नहीं होगा। आपके बच्चों का भविष्य तुषार मेहता जी (सॉलिसिटर जनरल) के हाथ में है। ऐसी स्थिति में, मैं आपसे न्याय की अपेक्षा नहीं करता। मेरे पास सत्याग्रह के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।” सिसोदिया का इशारा जस्टिस शर्मा के बच्चों के केंद्र सरकार के पैनल में वकील होने की ओर था।

हितों के टकराव और विचारधारा पर उठाए सवाल

केजरीवाल ने इस बहिष्कार के पीछे दो मुख्य कारणों का हवाला दिया। पहला कारण वैचारिक पूर्वाग्रह बताया, जिसमें उन्होंने दावा किया कि जज महोदया अक्सर अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद (RSS से जुड़ा संगठन) के मंचों पर देखी गई हैं। केजरीवाल ने कहा, “मैं और मेरी पार्टी उस विचारधारा के कट्टर विरोधी हैं, जिसने मुझे झूठे आरोपों में जेल भेजा। ऐसे में क्या मुझे वहां न्याय मिल सकता है?
दूसरा कारण उन्होंने ‘हितों का टकराव’ (Conflict of Interest) बताया। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि जस्टिस शर्मा के दोनों बच्चे केंद्र सरकार के वकील पैनल में हैं और उन्हें केस देने का काम सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता करते हैं, जो इस मामले में सरकार की ओर से पैरवी कर रहे हैं।

अदालत का रुख और राजनीतिक हलचल

इससे पहले, 20 अप्रैल को जस्टिस शर्मा ने केजरीवाल और सिसोदिया की ‘रिक्यूजल’ (केस से हटने की) अर्जी खारिज कर दी थी। अदालत ने टिप्पणी की थी कि कोई राजनेता न्यायपालिका को कटघरे में खड़ा नहीं कर सकता। हालांकि, अब आप नेताओं के इस बहिष्कार के फैसले ने मामले को पूरी तरह से राजनीतिक मोड़ दे दिया है। राजघाट पर आज केजरीवाल और सिसोदिया के साथ आतिशी और अन्य वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे, जिससे यह साफ है कि आम आदमी पार्टी इस कानूनी लड़ाई को अब जनता की अदालत में ले जाने की तैयारी में है

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