आईपीएल 2026 में KKR के अंगकृष रघुवंशी को ‘मैदान में बाधा डालने’ के कारण आउट दिया गया और मैच फीस का 20% जुर्माना लगाया गया। जानें क्या था पूरा विवाद।
कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के उभरते सितारे अंगकृष रघुवंशी के लिए लखनऊ के खिलाफ बीती रात का मैच काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा। रघुवंशी को न केवल एक दुर्लभ तरीके से आउट दिया गया, बल्कि मैदान पर उनके व्यवहार के कारण आईपीएल आचार संहिता के उल्लंघन के लिए उन पर मैच फीस का 20 प्रतिशत जुर्माना भी लगाया गया है। इसके साथ ही उनके रिकॉर्ड में एक ‘डिमेरिट पॉइंट’ भी जोड़ दिया गया है।
क्या था पूरा विवाद? (दुर्लभ आउट का मामला)
यह घटना केकेआर की पारी के पांचवें ओवर में हुई जब गेंदबाजी की कमान प्रिंस यादव के हाथों में थी। 7 गेंदों पर 9 रन बनाकर खेल रहे रघुवंशी ने गेंद को मिड-ऑन की तरफ धकेला और रन के लिए दौड़ पड़े। हालांकि, दूसरे छोर पर मौजूद कैमरून ग्रीन के मना करने पर वे बीच रास्ते से वापस लौटे।
वापस लौटते समय उन्होंने अपना रनिंग ट्रैक (दौड़ने का रास्ता) बदला, जिसके चलते फील्डर का सीधा थ्रो उनके शरीर पर लगा। ऋषभ पंत और लखनऊ की टीम द्वारा अपील किए जाने के बाद मामला थर्ड अंपायर रोहन पंडित के पास गया। रिप्ले देखने के बाद अंपायर ने माना कि रघुवंशी ने जानबूझकर अपना रास्ता बदला ताकि वह थ्रो के बीच में आ सकें। इसके बाद उन्हें ‘ऑब्सट्रक्टिंग द फील्ड’ (मैदान में बाधा डालना) के तहत आउट करार दिया गया।
मैदान पर दिखा गुस्सा और IPL की कार्रवाई
इस फैसले से रघुवंशी काफी निराश दिखे। पवेलियन लौटते समय उन्होंने अपनी नाराजगी खुलेआम जाहिर की, जिसे आईपीएल की आचार संहिता के खिलाफ माना गया। केकेआर के डगआउट में भी इस फैसले को लेकर कोच और अधिकारियों के बीच अंपायरों से तीखी बहस देखी गई।
आईपीएल ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा:
“कोलकाता नाइट राइडर्स के बल्लेबाज अंगकृष रघुवंशी को लखनऊ सुपर जायंट्स के खिलाफ मैच नंबर 38 के दौरान आईपीएल की आचार संहिता के लेवल 1 के उल्लंघन का दोषी पाया गया है। उन पर मैच फीस का 20% जुर्माना लगाया गया है और एक डिमेरिट पॉइंट भी दिया गया है।”
मैच का नतीजा और केकेआर की स्थिति
इस विवाद के बावजूद केकेआर ने मैच में शानदार वापसी की। रिंकू सिंह की 83 रनों की तूफानी पारी के दम पर मैच टाई हुआ और अंततः सुनील नरेन के जादुई सुपर ओवर की बदौलत कोलकाता ने यह रोमांचक मुकाबला जीत लिया। हालांकि, रघुवंशी के लिए यह मैच एक कड़वी याद बनकर रह गया है क्योंकि ‘मैदान में बाधा डालने’ का नियम क्रिकेट इतिहास में बहुत कम बार इस्तेमाल किया जाता है।