अमिताभ बच्चन ने KBC 18 में अपने ‘बच्चन’ सरनेम से जुड़ी दिलचस्प कहानी बताई। जानिए कैसे हरिवंश राय बच्चन ने स्कूल फॉर्म में जाति की जगह ‘बच्चन’ लिखा था।
मेगास्टार अमिताभ बच्चन ने अपने दशकों लंबे करियर में भारतीय सिनेमा को कई यादगार फिल्में और किरदार दिए हैं, लेकिन उनके नाम से जुड़ी एक दिलचस्प कहानी हाल ही में फिर चर्चा में आ गई। यह कहानी उनके मशहूर उपनाम ‘बच्चन’ से जुड़ी है, जिसे लेकर अभिनेता ने कौन बनेगा करोड़पति सीजन 18 के एक एपिसोड में महत्वपूर्ण खुलासा किया। शो के दौरान अमिताभ बच्चन ने अपने बचपन, अपने पहले स्कूल और अपने पिता, महान हिंदी कवि हरिवंश राय बच्चन की विचारधारा को याद किया। बातचीत तब खास हो गई, जब प्रतियोगी डॉ. जागृति के बारे में अमिताभ को पता चला कि उनका संबंध प्रयागराज से है और उन्होंने उसी सेंट मैरी कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ाई की है, जहां अमिताभ बच्चन भी अपने शुरुआती दिनों में पढ़े थे। प्रतियोगी से यह बात सुनकर अमिताभ ने अपने अंदाज में कहा, “क्या बात कर रहे हैं, अरे देवी जी, वो हमारा भी पहला स्कूल था। अरे ऐसा बोलने की जरूरत नहीं है, लेकिन इसमें एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात है, जो बाबूजी से हमको पता चला।” इसके बाद उन्होंने अपने परिवार के उपनाम से जुड़ी वह कहानी साझा की, जो उनके पिता की सामाजिक सोच को भी सामने लाती है।
स्कूल के दाखिले के समय सामने आया ‘बच्चन’ नाम
अमिताभ बच्चन ने बताया कि जब उनके माता-पिता उन्हें सेंट मैरी कॉन्वेंट स्कूल में दाखिला दिलाने पहुंचे, तब प्रवेश प्रक्रिया के दौरान एक फॉर्म भरना था। उस फॉर्म में बच्चे से जुड़ी कई व्यक्तिगत जानकारियां मांगी गई थीं और उनमें जाति का कॉलम भी शामिल था। हरिवंश राय बच्चन बचपन से ही जातिगत भेदभाव और जाति व्यवस्था के विरोधी माने जाते थे। ऐसे में जब फॉर्म में जाति लिखने की बारी आई, तो उन्होंने पारंपरिक जातिगत पहचान दर्ज करने के बजाय ‘बच्चन’ लिख दिया। यही वह क्षण था, जब ‘बच्चन’ नाम ने परिवार के उपनाम के रूप में एक नई पहचान हासिल की। अमिताभ के मुताबिक, उनके पिता के लिए यह केवल फॉर्म में एक शब्द लिखने का फैसला नहीं था, बल्कि जाति आधारित पहचान को स्वीकार न करने की उनकी सोच का हिस्सा था। इस तरह ‘बच्चन’ धीरे-धीरे परिवार के नाम के तौर पर स्थापित हुआ और बाद में यही नाम भारतीय सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित उपनामों में शामिल हो गया।
हरिवंश राय बच्चन की सामाजिक सोच
अमिताभ बच्चन के पिता हरिवंश राय बच्चन आधुनिक हिंदी साहित्य के महान कवियों में गिने जाते हैं। उनकी रचनाओं में जीवन के अनुभव, संघर्ष, संवेदनाएं, सामाजिक चेतना और मानवीय मूल्यों की गहरी छाप दिखाई देती है। उनकी सबसे प्रसिद्ध कृतियों में मधुशाला का नाम विशेष रूप से लिया जाता है। इसके अलावा मधुबाला, मधुकलश, निशा निमंत्रण और सतरंगिनी जैसी रचनाओं ने हिंदी साहित्य में उनकी अलग पहचान बनाई। उनकी कविताओं की भाषा सरल होने के साथ-साथ भावनात्मक और प्रभावशाली थी, जिसके कारण वे साहित्यिक जगत के साथ-साथ आम पाठकों के बीच भी लोकप्रिय हुए। उनकी रचनाओं में जीवन को व्यापक दृष्टिकोण से देखने की प्रेरणा मिलती है। वर्ष 1976 में साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। अमिताभ के लिए ‘बच्चन’ नाम की कहानी इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह उन्हें केवल एक प्रसिद्ध साहित्यकार के बेटे के रूप में नहीं, बल्कि अपने पिता के विचारों और मूल्यों से जुड़े व्यक्ति के रूप में भी सामने लाती है।
परिवार से मिली साहित्य और कला की विरासत
अमिताभ बच्चन का बचपन ऐसे परिवार में बीता, जहां साहित्य और कला का विशेष महत्व था। उनके पिता हिंदी के प्रतिष्ठित कवि थे, जबकि उनकी मां तेजी बच्चन भी कला और संस्कृति में गहरी रुचि रखती थीं। तेजी बच्चन का संबंध थिएटर से भी रहा और उन्होंने रंगमंच पर अभिनय किया था। बताया जाता है कि हरिवंश राय बच्चन द्वारा तैयार किए गए शेक्सपियर के नाटक मैकबेथ के हिंदी रूपांतरण में उन्होंने लेडी मैकबेथ की भूमिका निभाई थी। इस प्रकार अमिताभ के पारिवारिक वातावरण में साहित्य, कविता, शिक्षा और रंगमंच का प्रभाव बचपन से मौजूद था। यही वातावरण आगे चलकर उनके व्यक्तित्व और अभिव्यक्ति की शैली को आकार देने में भी महत्वपूर्ण रहा। अमिताभ बच्चन ने अभिनय की दुनिया में प्रवेश करने के बाद अपनी अलग पहचान बनाई, लेकिन उनके नाम के पीछे मौजूद साहित्यिक विरासत हमेशा उनके साथ रही।
प्रयागराज और सेंट मैरी कॉन्वेंट स्कूल से जुड़ी याद
कौन बनेगा करोड़पति सीजन 18 में प्रतियोगी डॉ. जागृति के साथ बातचीत के दौरान अमिताभ बच्चन का अपने पुराने दिनों को याद करना इसी वजह से खास रहा। प्रतियोगी का प्रयागराज से संबंध और उसी स्कूल में पढ़ाई करना, जहां अमिताभ ने अपने शुरुआती वर्ष बिताए थे, अभिनेता के लिए पुरानी यादों को ताजा करने वाला पल बन गया। उन्होंने स्कूल को अपना पहला स्कूल बताते हुए इस प्रसंग से जुड़ी अपने पिता की कहानी सुनाई। यह बातचीत केवल एक सामान्य परिचय तक सीमित नहीं रही, बल्कि इससे अमिताभ के निजी जीवन और पारिवारिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण पहलू दर्शकों के सामने आया।
एक नाम, जो विचारधारा की पहचान बन गया
‘बच्चन’ उपनाम की कहानी आज इसलिए भी दिलचस्प है, क्योंकि यह एक ऐसे नाम की यात्रा बताती है, जो शुरुआत में जातिगत पहचान से अलग रहने की सोच के साथ इस्तेमाल किया गया और आगे चलकर दुनिया भर में प्रसिद्ध हो गया। अमिताभ बच्चन आज भारतीय सिनेमा के सबसे सम्मानित और लोकप्रिय अभिनेताओं में गिने जाते हैं और ‘बच्चन’ नाम उनकी सार्वजनिक पहचान का अभिन्न हिस्सा है। उनके पिता द्वारा स्कूल के फॉर्म में जाति के स्थान पर ‘बच्चन’ लिखे जाने की घटना को इसी व्यापक संदर्भ में देखा जा सकता है। यह कहानी बताती है कि किसी परिवार का नाम केवल पहचान भर नहीं होता, बल्कि उसके पीछे विचार, विरासत और जीवन मूल्यों की कहानी भी छिपी हो सकती है। अमिताभ बच्चन ने जिस तरह अपने पिता से मिली इस याद को कौन बनेगा करोड़पति के मंच पर साझा किया, उसने उनके प्रशंसकों को उनके फिल्मी जीवन से परे उनके पारिवारिक इतिहास और उस विचारधारा की झलक भी दी, जिसने ‘बच्चन’ नाम को एक विशिष्ट पहचान प्रदान की।