पश्चिम एशिया संकट के बीच पीएम मोदी की ‘सात अपीलों’ पर अमल करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने अपने काफिले को आधा कर दिया है। जानें क्या हैं ये 7 अपीलें और इनका महत्व।
गृह मंत्री अमित शाह के काफिले में कटौती: पीएम मोदी की “सात अपीलों” का गहरा असर
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक संकट और ईंधन की आसमान छूती कीमतों के बीच, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक बड़ा कदम उठाते हुए अपने आधिकारिक काफिले के आकार को घटाकर आधा कर दिया है। यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में देशवासियों से की गई “सात अपीलों” के जवाब में लिया गया है, जिसका उद्देश्य जिम्मेदार ईंधन खपत और संसाधनों के कुशल उपयोग को बढ़ावा देना है। गृह मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि यह कटौती सुरक्षा मानकों और अनिवार्य प्रोटोकॉल से कोई समझौता किए बिना की गई है। यह बदलाव उस समय देखा गया है जब प्रधानमंत्री ने स्वयं गुजरात और असम के अपने हालिया दौरों के दौरान सुरक्षा के कड़े घेरे को बनाए रखते हुए अपने काफिले के वाहनों की संख्या को सीमित किया था।
आर्थिक लचीलेपन के लिए प्रधानमंत्री की सात अपीलें
हैदराबाद और सिकंदराबाद में आयोजित हालिया सभाओं के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्र के आर्थिक लचीलेपन को मजबूत करने के लिए नागरिकों के सामने सात महत्वपूर्ण सुझाव रखे थे। उन्होंने जोर दिया कि आज के समय में देशभक्ति का अर्थ केवल सीमाओं पर लड़ना नहीं, बल्कि दैनिक जीवन में विदेशी मुद्रा बचाने और आयात पर निर्भरता कम करने वाले निर्णय लेना भी है। इन अपीलों में वर्क फ्रॉम होम को प्राथमिकता देना, एक वर्ष के लिए सोने की खरीद टालना, पेट्रोल-डीजल बचाने के लिए सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करना, खाद्य तेल की खपत कम करना, प्राकृतिक खेती को अपनाकर उर्वरक आयात घटाना, स्वदेशी उत्पादों का चयन करना और कम से कम एक वर्ष के लिए विदेश यात्रा से बचना शामिल है।
स्थिरता और संसाधनों का संरक्षण
सरकार का यह प्रयास केवल जनता तक सीमित नहीं है, बल्कि शीर्ष नेतृत्व स्वयं इसका उदाहरण पेश कर रहा है। प्रधानमंत्री ने सुरक्षा काफिलों में नए खर्च किए बिना इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) के समावेश पर जोर दिया है ताकि कार्बन फुटप्रिंट और ईंधन बिल दोनों को कम किया जा सके। अमित शाह द्वारा अपने काफिले को छोटा करना इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिससे सरकारी खर्च में कटौती हो और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम किया जा सके। प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से खाद्य तेल और रसायनों का उदाहरण देते हुए कहा था कि छोटे-छोटे व्यक्तिगत त्याग मिलकर राष्ट्र की अर्थव्यवस्था को वैश्विक झटकों से बचाने में एक विशाल सुरक्षा कवच का काम कर सकते हैं।