गृह मंत्री अमित शाह ने आतंकवाद के खिलाफ PRAHAAR रणनीति को अगले 10 वर्षों तक संस्थागत बनाने पर जोर दिया। उन्होंने इसे पुलिस थाने के स्तर तक लागू करने और त्वरित कार्रवाई के लिए स्वचालित तंत्र विकसित करने की बात कही।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को आतंकवाद के खिलाफ भारत की रणनीति PRAHAAR को अगले 10 वर्षों के लिए संस्थागत रूप देने पर जोर दिया। नई दिल्ली में आयोजित ‘PRAHAAR – CT Policy and Strategy’ सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए उन्होंने कहा कि आतंकवादी घटनाओं का लगातार विश्लेषण किया जाना चाहिए और हर स्तर पर स्वचालित प्रतिक्रिया तंत्र विकसित करने की दिशा में काम होना चाहिए। गृह मंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि PRAHAAR के सिद्धांत केवल केंद्रीय स्तर तक सीमित न रहें, बल्कि इन्हें पुलिस थाने के स्तर तक पहुंचाया जाए, ताकि किसी भी आतंकी खतरे पर कार्रवाई में अनावश्यक देरी न हो।
आतंकवाद के खिलाफ लगातार मजबूत हो रणनीति
अमित शाह ने कहा कि PRAHAAR रणनीति के सभी पहलुओं को लगातार मजबूत और बेहतर बनाने की जरूरत है। उन्होंने संबंधित एजेंसियों और सुरक्षा बलों से आतंकवाद से जुड़े मामलों में सक्रिय, परिणामोन्मुखी और समन्वित दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया। उनके मुताबिक, आतंकवाद की बदलती प्रकृति को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों को केवल घटना के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय संभावित खतरों की पहचान और रोकथाम पर भी लगातार काम करना होगा।
गृह मंत्री ने कहा कि PRAHAAR के सिद्धांतों को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए सभी संबंधित पक्षों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। उन्होंने विशेष रूप से थाने के स्तर पर समन्वय और त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता बताई, ताकि किसी सूचना या खतरे के सामने आने के बाद अलग-अलग एजेंसियों के बीच तालमेल की कमी के कारण कार्रवाई में देरी न हो।
PRAHAAR के सात प्रमुख स्तंभों पर चर्चा
सम्मेलन में PRAHAAR के सात प्रमुख स्तंभों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। इनमें Prevention यानी रोकथाम, Response यानी प्रतिक्रिया, Aggregating Internal Capacities यानी आंतरिक क्षमताओं को एकजुट करना, Human Rights यानी मानवाधिकार, Attenuating Conditions for Terrorism यानी आतंकवाद के लिए अनुकूल परिस्थितियों को कम करना, Aligning International Efforts यानी अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में तालमेल और Recovery and Resilience यानी पुनर्बहाली एवं लचीलापन शामिल हैं।
इन सभी पहलुओं पर ‘Whole-of-Society’ यानी पूरे समाज को साथ लेकर चलने वाले दृष्टिकोण के तहत चर्चा हुई। इसका उद्देश्य आतंकवाद से मुकाबले के लिए सुरक्षा एजेंसियों, राज्य पुलिस, केंद्रीय एजेंसियों और अन्य संबंधित संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है।
हर स्तर पर बने स्वचालित प्रतिक्रिया तंत्र
अमित शाह ने आतंकवादी खतरों को कम करने के लिए उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए कहा कि आतंकवाद से मुकाबले की पूरी व्यवस्था में स्वचालित प्रतिक्रिया तंत्र विकसित करने की जरूरत है। इसके लिए घटनाओं और उनसे जुड़े पैटर्न का लगातार विश्लेषण करना महत्वपूर्ण है, ताकि सुरक्षा एजेंसियां संभावित खतरों के प्रति तेजी से प्रतिक्रिया दे सकें।
उन्होंने कहा कि PRAHAAR को केवल एक नीति या रणनीति के रूप में देखने के बजाय इसे संस्थागत व्यवस्था का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। इसके लिए अगले दस वर्षों तक लगातार समीक्षा, विश्लेषण और सुधार की प्रक्रिया जारी रखने पर जोर दिया गया।
2019 से 2026 तक 288 भगोड़ों को भारत लाया गया
गृह मंत्री ने सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय के परिणामों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2019 से 2026 के बीच केंद्र सरकार ने 36 देशों से 288 भगोड़े अपराधियों को भारत वापस लाने में सफलता हासिल की है। उन्होंने कहा कि विदेशों में मौजूद अपराधियों और आतंक से जुड़े नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई के लिए केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।
शाह ने शहजाद भट्टी नेटवर्क के खिलाफ की गई कार्रवाई का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, हथियारों, विस्फोटकों और मादक पदार्थों की सीमा पार तस्करी में कथित रूप से शामिल इस नेटवर्क के 40 से अधिक मॉड्यूल को एजेंसियों के बेहतर समन्वय के जरिए ध्वस्त किया गया। इस कार्रवाई के तहत 15 राज्यों में 100 से अधिक एफआईआर दर्ज की गईं और 350 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
गृह मंत्री ने बताया कि सरकार ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत शहजाद भट्टी नेटवर्क को आतंकवादी संगठन घोषित किया है।
आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति
अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने आतंकवाद के सभी स्वरूपों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद से निपटने के लिए रोकथाम, त्वरित प्रतिक्रिया, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल पर लगातार काम किया जा रहा है।
नया Extradition Portal लॉन्च
सम्मेलन के दौरान अमित शाह ने नया Extradition Portal भी लॉन्च किया। इसका उद्देश्य विदेशों में मौजूद भगोड़ों को भारत वापस लाने की प्रक्रिया से जुड़े प्रयासों को एक साथ जोड़ना और उन्हें तेज करना है। गृह मंत्री ने राज्य पुलिस बलों से भी अपील की कि वे केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर काम करने के लिए विशेष टीमें गठित करें।
इस सम्मेलन में केंद्रीय गृह सचिव, विदेश सचिव, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और केंद्रीय पुलिस संगठनों के प्रमुख, 15 राज्यों के पुलिस महानिदेशक और सभी राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के आतंकवाद निरोधी दस्तों के प्रमुख शामिल हुए। अन्य राज्यों के पुलिस प्रमुखों और जमीनी स्तर पर काम करने वाले वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भाग लिया।
सम्मेलन में सामने आया कि आतंकवाद के बदलते स्वरूप से निपटने के लिए केवल केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। पुलिस थाने से लेकर केंद्रीय स्तर तक सूचनाओं के आदान-प्रदान, त्वरित प्रतिक्रिया और समन्वित कार्रवाई की व्यवस्था को मजबूत करना PRAHAAR रणनीति का अहम हिस्सा है।