पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) में मचे भूचाल के बीच गृह मंत्री अमित शाह का 3 दिवसीय बंगाल दौरा शुरू हो रहा है। सिलीगुड़ी से कोलकाता तक का पूरा शेड्यूल और बड़ी राजनीतिक हलचल यहाँ पढ़ें।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस समय एक अभूतपूर्व भूचाल आया हुआ है। राज्य के राजनीतिक इतिहास में एक बड़ा बदलाव तब देखने को मिला जब बीते विधानसभा चुनावों में पहली बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाई। 15 वर्षों तक बंगाल की सत्ता पर काबिज रहने वाली ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) वर्तमान में सत्ता से बाहर होने के बाद पूरी तरह बिखर चुकी है। पार्टी के भीतर मचे इस घमासान और बड़े पैमाने पर हुए दलबदल के बीच, केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह का 17, 18 और 19 जुलाई 2026 को होने वाला तीन दिवसीय बंगाल दौरा राज्य की सियासत को एक नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। सरकार बनने के बाद गृह मंत्री का राज्य में यह पहला विस्तृत और अत्यंत महत्वपूर्ण दौरा है।
तृणमूल कांग्रेस (TMC) में ऐतिहासिक टूट और राजनीतिक संकट
पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद ममता बनर्जी की पार्टी वैचारिक और संगठनात्मक स्तर पर ढहती नजर आ रही है। तृणमूल कांग्रेस के भीतर मचे अंदरूनी कलह का नतीजा यह हुआ कि पार्टी के लगभग 20 लोकसभा सांसदों ने ममता बनर्जी का साथ छोड़ दिया है और वे एक अलग राजनीतिक दल में विलय कर चुके हैं।
केवल केंद्र में ही नहीं, बल्कि राज्य स्तर पर भी पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। TMC के लगभग 60 विधायकों ने ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में अपना एक अलग बागी गुट तैयार कर लिया है, जिससे पार्टी विधानसभा में बेहद कमजोर स्थिति में आ गई है। इसके अतिरिक्त, राज्यसभा में भी तृणमूल कांग्रेस के कई सांसदों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। 15 साल तक एकछत्र राज करने वाली पार्टी के इस तरह बिखरने से राज्य में विपक्ष पूरी तरह कमजोर हो चुका है और भाजपा अपनी स्थिति को लगातार मजबूत कर रही है।
सिलीगुड़ी दौरा: सीमा सुरक्षा और गवर्नेंस पर फोकस
अमित शाह के इस तीन दिवसीय दौरे का शेड्यूल बेहद व्यस्त और रणनीतिक है। अपने दौरे के दूसरे दिन यानी 18 जुलाई को गृह मंत्री सुबह सिलीगुड़ी पहुंचेंगे। सिलीगुड़ी में वे सीमा सुरक्षा बल (BSF) की ‘जुमागाछ सीमा चौकी’ का दौरा करेंगे। इसके बाद 18वीं बटालियन बॉर्डर आउटपोस्ट पर BSF के जवानों के साथ सीधा संवाद करेंगे, जिससे सीमा पर तैनात सैनिकों का हौसला बढ़ेगा। इस दौरान वे BSF के विभिन्न विकास कार्यों का उद्घाटन और शिलान्यास भी करेंगे।
दोपहर के सत्र में अमित शाह ‘पश्चिम बंगाल में बॉर्डर से जुड़े मामलों’ पर एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इसके बाद, उनका ध्यान राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था पर केंद्रित होगा, जहां वे बंगाल में तीन नए कानूनों के पूर्ण कार्यान्वयन की प्रगति पर समीक्षा बैठक करेंगे। 18 जुलाई की शाम को वे राज्य में ‘जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रेशन’ से जुड़े प्रशासनिक मामलों की समीक्षा के लिए अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे।
कोलकाता में कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों की सौगात
दौरे के अंतिम दिन, यानी 19 जुलाई को केंद्रीय गृह मंत्री राज्य की राजधानी कोलकाता का रुख करेंगे। कोलकाता में उनकी शुरुआत बेहद संवेदनशील मुद्दे से होगी। वे सुबह पश्चिम बंगाल की ‘कानून-व्यवस्था की स्थिति’ पर एक महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता करेंगे, जिसमें राज्य के शीर्ष प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी शामिल होंगे। नए राजनीतिक परिदृश्य में राज्य की सुरक्षा और शांति बनाए रखना भाजपा सरकार की बड़ी प्राथमिकताओं में से एक है।
इसके बाद दोपहर में, अमित शाह सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। वे अलीपुर स्थित नेशनल लाइब्रेरी में नवनिर्मित ‘म्यूज़ियम ऑफ वर्ड्स’ के पहले चरण (Phase-1) का औपचारिक उद्घाटन करेंगे। इसके तुरंत बाद, वे कोलकाता के प्रसिद्ध बिस्वा बांग्ला कन्वेंशन सेंटर पहुंचेंगे, जहां वे पश्चिम बंगाल में ‘अमूल डेयरी’ के नए दही प्लांट का शिलान्यास करेंगे। यह प्लांट राज्य में सहकारिता आंदोलन को बढ़ावा देने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
नए राजनैतिक युग की शुरुआत
अमित शाह का यह दौरा केवल प्रशासनिक समीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके गहरे राजनीतिक मायने हैं। तृणमूल कांग्रेस के बिखरने और भाजपा की नई सरकार के गठन के बाद, यह दौरा बंगाल की जनता को यह संदेश देने की कोशिश है कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर विकास, सुरक्षा और सुशासन के एजेंडे पर तेजी से आगे बढ़ रही हैं। सीमा सुरक्षा से लेकर औद्योगिक विकास (अमूल प्लांट) और सांस्कृतिक संरक्षण (म्यूज़ियम) तक फैले इस दौरे के कार्यक्रम स्पष्ट करते हैं कि आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति और गवर्नेंस में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे।