अमन अरोड़ा ने केंद्र सरकार की नीतियों पर जमकर हमला बोला, कहा ‘विश्व गुरु’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के वादे हुए ध्वस्त। जानें गैस, तेल, एलपीजी आयात और विदेश नीति में सरकार की असफलताओं के बारे में।
पंजाब के खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के प्रदेश अध्यक्ष, अमन अरोड़ा ने गुरुवार को भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सरकार की विदेश और घरेलू नीतियों को “पूर्ण असफलता” का दोषी ठहराते हुए कहा कि भारत को ‘विश्व गुरु’ और ‘आत्मनिर्भर’ बनाने के वादे अब पूरी तरह धराशायी हो चुके हैं।
अमल में दिख रही वास्तविकता और सरकारी दावों के बीच अंतर पर जोर देते हुए श्री अमन अरोड़ा ने कहा कि देशवासियों की जिंदगी में कठिनाइयां बढ़ती जा रही हैं। उन्होंने कहा, “गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें, बंद होने के कगार पर होटल, रद्द होने के कगार पर शादियां और रसोई चलाने को लेकर परेशान माताएं और बहनें—इनकी खबरें आम हैं। जबकि उसी समय केंद्र सरकार ‘आपका घर हमारी प्राथमिकता’ शीर्षक से बड़े पैमाने पर विज्ञापन चला रही है। यह विज्ञापन दिखाता है कि सरकार स्थिति की गंभीरता को मानती है।”
प्रधानमंत्री के वादों की याद दिलाई
सदन में बोलते हुए श्री अमन अरोड़ा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2014 के चुनाव पूर्व भाषणों का उल्लेख किया, जिसमें विश्व नेतृत्व और आत्मनिर्भरता का दावा किया गया था। उन्होंने कहा, “14 साल पहले उन्होंने गर्व से कहा था कि 140 करोड़ भारतीय विश्व का नेतृत्व करेंगे और किसी वस्तु के आयात की जरूरत नहीं होगी। आज स्थिति अलग है। विश्व गुरु बनना हो या आत्मनिर्भर भारत, दोनों ही मामलों में सरकार विफल रही है।”
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विदेश नीति पर कड़ा हमला
अमल अरोड़ा ने कहा कि 12 साल सत्ता में रहने के बावजूद सरकार पड़ोसी देशों के साथ दोस्त और दुश्मन में फर्क नहीं कर पा रही। पड़ोसी देश भारत से दूर और चीन के करीब जा रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री की हालिया इज़राइल यात्रा पर भी सवाल उठाए और कहा, “प्रधानमंत्री इज़राइल में नेतन्याहू को गले लगाते हैं, और अगले ही दिन अमेरिका और इज़राइल ईरान के शीर्ष नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करते हैं।”
घरेलू संकट और सांख्यिकीय आंकड़े
श्री अमन अरोड़ा ने केंद्र सरकार की घरेलू विफलताओं को सांख्यिकीय रूप में पेश किया। प्राकृतिक गैस उत्पादन 2012 में 40.68 बीसीएम से घटकर 2024 में 35 बीसीएम रह गया, जबकि खपत 47 बीसीएम से बढ़कर 69 बीसीएम हो गई। कच्चे तेल का उत्पादन 37 मिलियन मीट्रिक टन से घटकर 29 मिलियन मीट्रिक टन हो गया, जबकि खपत 158 मिलियन मीट्रिक टन से बढ़कर 233 मिलियन मीट्रिक टन तक पहुंच गई।
एलपीजी के मामले में भारत की आयात निर्भरता 2014 में 45 प्रतिशत थी, जो 2025 तक 66 प्रतिशत हो गई। श्री अरोड़ा ने कहा, “आज हम अपनी खाना पकाने की गैस का दो-तिहाई हिस्सा आयात करते हैं। यह आत्मनिर्भरता नहीं, बल्कि बढ़ती निर्भरता है।”
निजी निवेश और अंतरराष्ट्रीय सौदे
उन्होंने रिलायंस इंडस्ट्रीज द्वारा अमेरिका में बड़े पैमाने पर रिफाइनरी सौदे का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इसे ‘असाधारण निवेश’ बताया, जिससे अमेरिका को ईंधन और रोजगार मिलेंगे, जबकि भारत की घरेलू जरूरतों पर इसका कोई असर नहीं पड़ रहा।