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आलिया भट्ट ने भारतीय सिनेमा में पुरुष प्रधान बॉक्स ऑफिस नैरेटिव पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने ‘बार्बी’ का उदाहरण देते हुए जेंडर-एग्नॉस्टिक कहानियों और महिला दर्शकों की उपेक्षा पर बात की।
‘जेंडर एग्नॉस्टिक’ सिनेमा की पक्षधर बनीं आलिया भट्ट; बॉक्स ऑफिस पर पुरुषों के वर्चस्व वाले नैरेटिव पर उठाए सवाल
बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री आलिया भट्ट, जो हाल ही में कान्स फिल्म फेस्टिवल से लौटी हैं, ने भारतीय सिनेमा के मौजूदा परिदृश्य और बॉक्स ऑफिस के गणित पर एक महत्वपूर्ण बहस छेड़ दी है। एक हालिया साक्षात्कार में, आलिया ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि भारतीय फिल्म उद्योग मुख्य रूप से पुरुष दर्शकों को ध्यान में रखकर फिल्में क्यों बनाता है। उन्होंने तर्क दिया कि कहानी को किसी जेंडर (लिंग) के आधार पर नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता के आधार पर परखा जाना चाहिए। आलिया ने ‘बार्बी’ और ‘द डेविल वियर्स प्राडा’ जैसी वैश्विक हिट फिल्मों का उदाहरण देते हुए भारतीय फिल्म निर्माताओं से ‘जेंडर एग्नॉस्टिक’ (लिंग-निरपेक्ष) फिल्में बनाने की अपील की, जहाँ सितारे से ज्यादा कहानी केंद्र में हो।
बॉक्स ऑफिस और ‘75% पुरुष दर्शक’ का गणित
द हॉलीवुड रिपोर्टर इंडिया के साथ बातचीत के दौरान, आलिया ने फिल्म उद्योग में अक्सर होने वाली उस चर्चा का जिक्र किया जिसमें कहा जाता है कि सिनेमाघरों में जाने वाली 75% आबादी पुरुष है, इसलिए फिल्में ‘मासेस’ (आम जनता) यानी पुरुषों के लिए ही बनाई जानी चाहिए। आलिया ने इस तर्क पर सवाल उठाते हुए कहा, “अगर हम केवल पुरुषों की पसंद का ख्याल रख रहे हैं, तो महिला प्रशंसकों का क्या? मैं यह नहीं कह रही कि पुरुषों को अलग कर दिया जाए, लेकिन हम किसी को भी क्यों छोड़ें? हम ऐसी फिल्में क्यों नहीं बना सकते जो जेंडर-एग्नॉस्टिक हों, जहाँ कहानी कहने का तरीका सबसे महत्वपूर्ण हो? चाहे उसमें पुरुष हो या महिला, इससे फर्क नहीं पड़ना चाहिए।”
वैश्विक सफलता और महिला दर्शकों की ताकत
आलिया ने अंतरराष्ट्रीय सिनेमा के उदाहरण देते हुए समझाया कि कैसे महिला प्रधान या महिलाओं को केंद्र में रखकर बनाई गई फिल्मों ने वैश्विक स्तर पर सफलता के झंडे गाड़े हैं। उन्होंने कहा, “जब मैं वैश्विक परिदृश्य को देखती हूँ, तो मुझे लगता है कि हम एक बहुत ही दिलचस्प दौर में हैं। ‘बार्बी’ और ‘द डेविल वियर्स प्राडा’ जैसी फिल्मों ने असाधारण प्रदर्शन किया है। इन फिल्मों की मुख्य दर्शक शायद महिलाएं थीं, जो भारी संख्या में सिनेमाघरों तक पहुँचीं और इन्हें ब्लॉकबस्टर बनाया।” आलिया का मानना है कि भारतीय सिनेमा में भी महिलाओं के लिए अधिक जगह बनाने की जरूरत है, ताकि वे खुद को स्क्रीन पर देख सकें और जुड़ाव महसूस कर सकें।
‘स्टोरीटेलिंग’ को मिले प्राथमिकता
आलिया भट्ट ने सिनेमा के भविष्य के लिए एक ऐसा विजन साझा किया जहाँ कहानियाँ लिंग की सीमाओं को तोड़ दें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक अच्छी फिल्म वह है जो बिना किसी भेदभाव के हर किसी को प्रभावित करे। उनके अनुसार, फिल्म की सफलता का आधार यह नहीं होना चाहिए कि उसका लीड हीरो कौन है, बल्कि यह होना चाहिए कि कहानी कितनी दमदार है। आलिया ने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में भारतीय निर्देशक और निर्माता इस रूढ़िवादी सोच से बाहर निकलेंगे और ऐसी सामग्री पेश करेंगे जो वास्तव में समावेशी हो।
आगामी प्रोजेक्ट्स और वर्कफ्रंट
काम की बात करें तो, आलिया भट्ट आने वाले समय में कई बड़े प्रोजेक्ट्स में नजर आने वाली हैं। वे यशराज फिल्म्स (YRF) के स्पाई यूनिवर्स की फिल्म ‘अल्फा’ में शारवरी और बॉबी देओल के साथ नजर आएंगी, जो उनकी पहली पूर्ण एक्शन फिल्म मानी जा रही है। इसके अलावा, वे संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘लव एंड वॉर’ में अपने पति रणबीर कपूर और विक्की कौशल के साथ दोबारा स्क्रीन साझा करेंगी। हाल ही में ऐसी खबरें भी आई थीं कि आलिया ‘तुम्बाड 2’ की स्टार कास्ट में शामिल हो सकती हैं, हालांकि अभी तक इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। आलिया के ये विविध प्रोजेक्ट्स इस बात का प्रमाण हैं कि वे खुद भी अपनी फिल्मों के जरिए अलग-अलग तरह की कहानियाँ पेश करने का प्रयास कर रही हैं।
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