पूजा-पाठ और घर में खुशबू के लिए अगरबत्ती जलाना हमारे देश में आम बात है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगरबत्ती का धुआं सिगरेट के धुएं से भी अधिक खतरनाक हो सकता है? एक्सपर्ट्स के मुताबिक, रोजाना अगरबत्ती जलाने से निकलने वाले पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे छोटे हानिकारक कण फेफड़ों में जमा होकर सांस की गंभीर समस्याएं जैसे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और यहां तक कि फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ा सकते हैं।
अगरबत्ती का धुआं क्यों है खतरनाक?
अगरबत्ती जलाने से छोटे-छोटे पार्टिकुलेट मैटर (PM2.5 और PM10) और VOCs (वोलटाइल ऑर्गेनिक कंपाउंड्स) निकलते हैं, जो फेफड़ों में घुसकर सूजन और एलर्जी जैसी समस्याएं उत्पन्न करते हैं। खासकर जब कमरे में वेंटिलेशन न हो तो ये प्रदूषित कण घर के अंदर जमा हो जाते हैं, जिससे स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। रिसर्च से पता चला है कि अगरबत्ती जलाने पर घर के अंदर PM 2.5 स्तर सुरक्षित सीमा से काफी ऊपर पहुंच जाता है, जो लंबी अवधि में गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।
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अगरबत्ती के धुएं से शरीर को होने वाले नुकसान
अगरबत्ती का धुआं आंखों, नाक और गले में जलन, एलर्जी, साइनस, खांसी और सांस लेने में दिक्कत पैदा कर सकता है। यह फेफड़ों के छोटे-छोटे एल्विओलाई (Alveoli) को नुकसान पहुंचाकर शरीर में ऑक्सीजन की कमी भी कर सकता है। अगरबत्ती के धुएं में बेंजीन, फॉर्मल्डिहाइड और अन्य हानिकारक रसायन होते हैं, जो सिगरेट में पाए जाने वाले तत्वों की तरह फेफड़ों और रक्त कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं।
फेफड़ों को अगरबत्ती के धुएं से बचाने के उपाय
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अगरबत्ती जलाते समय कमरे की खिड़कियां और दरवाजे खुले रखें ताकि धुआं बाहर निकल सके।
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पंखा चालू करें जिससे हवा का संचार हो।
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अगर संभव हो तो अगरबत्ती जलाना बंद कर दें।
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अगरबत्ती की जगह देसी घी का दीपक जलाएं या प्राकृतिक एसेंशियल ऑयल डिफ्यूजर का इस्तेमाल करें, जिससे घर में खुशबू भी बनी रहेगी और सेहत पर असर भी नहीं होगा।