आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा में किया बड़ा फेरबदल! राघव चड्ढा को डिप्टी लीडर के पद से हटाया गया। जानिए इस बड़े फैसले के पीछे की वजह और क्या होगा अब पार्टी का अगला कदम
आम आदमी पार्टी (AAP) ने राज्यसभा में अपने संसदीय दल के संगठन में एक बड़ा फेरबदल किया है। पार्टी ने अपने वरिष्ठ और चर्चित सांसद राघव चड्ढा को राज्यसभा में डिप्टी लीडर (उप-नेता) के पद से हटा दिया है।
पार्टी द्वारा किए गए इस बड़े बदलाव को संगठन को नई मजबूती देने और जिम्मेदारियों के पुनर्वितरण के तौर पर देखा जा रहा है।
अचानक लिया गया बड़ा फैसला
राघव चड्ढा, जो राज्यसभा में पार्टी की ओर से काफी मुखर रहते हैं और कई अहम मुद्दों पर सरकार को घेरते नजर आते हैं, उन्हें इस पद से हटाना काफी चौंकाने वाला माना जा रहा है। हालांकि, पार्टी ने इसे संगठन की आंतरिक प्रक्रिया और कामकाज में बदलाव का हिस्सा बताया है।
क्या होगा अगला कदम?
इस बदलाव के बाद अब यह चर्चा तेज हो गई है कि राज्यसभा में राघव चड्ढा की जगह यह जिम्मेदारी किसे दी जाएगी। फिलहाल, पार्टी के अन्य वरिष्ठ सांसदों के नामों पर विचार किया जा रहा है।
अशोक मित्तल संभालेंगे कमान
AAP ने राज्यसभा सचिवालय से औपचारिक अनुरोध किया है कि उच्च सदन (Rajya Sabha) में अब अशोक मित्तल को पार्टी का नया उप-नेता (Deputy Leader) नियुक्त किया जाए। यह फैसला पार्टी की संसदीय रणनीति में एक बड़े बदलाव की ओर इशारा कर रहा है।
पार्टी कोटे से ‘बोलने’ पर भी पाबंदी!
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पार्टी ने सचिवालय को लिखे पत्र में स्पष्ट कहा है कि राघव चड्ढा (जो पंजाब से सांसद हैं) को सदन में बोलने के लिए AAP के कोटे से समय आवंटित न किया जाए। * राजनीति में इसे किसी भी सांसद के लिए बहुत बड़ा झटका माना जाता है, क्योंकि बिना पार्टी कोटे के सदन में अपनी बात रखना लगभग नामुमकिन हो जाता है।
स्टार कैंपेनर लिस्ट से भी हुए बाहर
राघव चड्ढा की मुश्किलें यहीं खत्म नहीं होतीं। हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी ने उन्हें अपनी ‘स्टार कैंपेनर’ सूची से भी बाहर रखा था। यह साफ संकेत है कि पार्टी नेतृत्व और राघव चड्ढा के बीच दूरियां काफी बढ़ गई हैं।
क्यों गिरा राघव चड्ढा का ग्राफ? (मुख्य कारण)
सूत्रों और राजनीतिक जानकारों के अनुसार, राघव चड्ढा पर इस कार्रवाई के पीछे ये 3 मुख्य वजहें हो सकती हैं:
- पार्टी गतिविधियों से दूरी: पिछले काफी समय से राघव चड्ढा न तो पार्टी की प्रेस ब्रीफिंग में नजर आ रहे थे और न ही सांगठनिक गतिविधियों में सक्रिय थे।
- खास मौकों पर चुप्पी: जब दिल्ली एक्साइज पॉलिसी मामले में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया बरी हुए, तो राघव चड्ढा ने न तो सार्वजनिक तौर पर और न ही सोशल मीडिया पर कोई प्रतिक्रिया दी। पार्टी ने उनकी इस चुप्पी को ‘अनुशासनहीनता’ या ‘दूरी’ के तौर पर देखा।
- संसदीय समीकरण: राज्यसभा में AAP के कुल 10 सदस्य हैं (7 पंजाब से और 3 दिल्ली से)। पार्टी अब नए चेहरों को जिम्मेदारी देकर संतुलन बिठाने की कोशिश कर रही है।