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दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ (पंजाब 95) को OTT प्लेटफॉर्म से हटाए जाने पर AAP पंजाब के मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे सच दबाने की कोशिश बताया।
आम आदमी पार्टी (AAP) पंजाब के मीडिया इंचार्ज और वरिष्ठ नेता बलतेज पन्नू ने अभिनेता दिलजीत दोसांझ की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘सतलुज’ (Satluj Movie) को रिलीज के महज दो दिन बाद ही ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म से हटाए जाने और भारत में बैन किए जाने की तीखी आलोचना की है। बलतेज पन्नू ने इस कदम को अभिव्यक्ति की आजादी और मानवाधिकारों की आवाज को दबाने की एक सोची-समझी साजिश करार दिया है। उन्होंने केंद्र सरकार और सेंसर बोर्ड पर निशाना साधते हुए कहा कि किसी फिल्म पर पाबंदी लगाकर इतिहास के सच को छिपाया नहीं जा सकता।
मानवाधिकारों के रक्षक की कहानी है फिल्म ‘सतलुज’: बलतेज पन्नू
बलतेज पन्नू ने फिल्म की पृष्ठभूमि और इसके विषय का समर्थन करते हुए कहा कि यह फिल्म कोई काल्पनिक कहानी नहीं है, बल्कि पंजाब के एक सच्चे नायक के संघर्ष को बयां करती है। उन्होंने कहा:
“फिल्म ‘सतलुज’ की कहानी एक ऐसे महान इंसान की है जिसने पंजाब में मानवाधिकारों की रक्षा के लिए अपनी जान दांव पर लगा दी। यह एक प्रामाणिक आवाज है। एक फिल्म को बैन करके या उसे डिजिटल प्लेटफॉर्म से गायब करके आप जमीनी असलियत और इतिहास को लोगों के सामने आने से नहीं रोक सकते।” – बलतेज पन्नू, मीडिया इंचार्ज, AAP पंजाब
4 साल का लंबा इंतजार, 120 से ज्यादा कट और फिर बैन
‘ਆਪ’ ਪੰਜਾਬ ਮੀਡੀਆ ਇੰਚਾਰਜ @BaltejPannu ਨੇ ਸਤਲੁਜ ਫ਼ਿਲਮ ਨੂੰ ਬੈਨ ਕਰਨ ਦੀ ਕੀਤੀ ਨਿਖੇਧੀ !!
ਕਿਹਾ, ਸਤਲੁਜ ਫ਼ਿਲਮ ਦੀ ਕਹਾਣੀ ਇੱਕ ਮਨੁੱਖੀ ਅਧਿਕਾਰਾਂ ਦੇ ਰਾਖੇ ਦੀ ਕਹਾਣੀ ਹੈ। ਇੱਕ ਫ਼ਿਲਮ ਨੂੰ ਬੈਨ ਕਰਕੇ ਤੁਸੀਂ ਅਸਲੀਅਤ ਨੂੰ ਰੋਕ ਨਹੀਂ ਸਕਦੇ। ਫ਼ਿਲਮ ਨੂੰ OTT ਤੋਂ ਹਟਾਉਣਾ ਮਨੁੱਖੀ ਅਧਿਕਾਰਾਂ ਦੀ ਆਵਾਜ਼ ਨੂੰ ਦਬਾਉਣ ਦੀ ਕੋਸ਼ਿਸ਼… pic.twitter.com/rEsMmXOMkx
— AAP Punjab (@AAPPunjab) July 6, 2026
पन्नू ने फिल्म के साथ हुए लंबे भेदभाव का जिक्र करते हुए बताया कि इस प्रोजेक्ट को दर्शकों तक पहुंचने के लिए चार साल तक कड़ा संघर्ष करना पड़ा। फिल्म का नाम पहले ‘घੱਲੂਘਾਰਾ’ रखा गया था, जिस पर सेंसर बोर्ड को आपत्ति थी। इसके बाद इसका नाम बदलकर ‘पंजाब 95’ (Punjab 95) किया गया और बोर्ड ने 120 से अधिक कट लगाने की मांग की। आखिरकार, दो दिन पहले ही इसे बिना किसी बड़े प्रचार के ‘सतਲੁਜ’ नाम से एक प्रमुख ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज किया गया था, लेकिन रविवार रात इसे अचानक भारतीय कैटलॉग से हटा दिया गया।
“क्या जनता को सिर्फ व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी का ज्ञान देना चाहते हैं?”
बलतेज पन्नू ने विरोधियों और सेंसरशिप नीतियों पर सीधा हमला बोलते हुए सवाल उठाया कि आखिर फिल्म को रिलीज के सिर्फ 48 घंटों के भीतर किसके दबाव में हटाया गया? उन्होंने कहा कि जो फिल्में इतिहास की सही और सच्ची जानकारी देती हैं, उन्हें जानबूझकर प्रतिबंधित कर दिया जाता है। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा, “क्या आप चाहते हैं कि देश की युवा पीढ़ी को केवल व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी से मिलने वाली अधूरी और झूठी जानकारियां ही मिलती रहें?”
उन्होंने जोर देकर कहा कि 1995 में भी मानवाधिकार कार्यकर्ता की आवाज को दबाने की कोशिश की गई थी और आज 2026 में भी उनकी कहानी को बयां करने वाली फिल्म के साथ वही किया जा रहा है। ‘आप’ नेता ने साफ किया कि कला और सच पर इस तरह के प्रतिबंध लोकतांत्रिक देश में स्वीकार्य नहीं हैं।