आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने E-20 पेट्रोल के विरोध में 4 अगस्त को प्रधानमंत्री आवास तक मार्च का ऐलान किया। AAP ने शुद्ध पेट्रोल का विकल्प, वैज्ञानिक रिपोर्ट सार्वजनिक करने और E-20 नीति पर पुनर्विचार की मांग उठाई।
आम आदमी पार्टी (AAP) ने E-20 पेट्रोल के मुद्दे पर केंद्र सरकार के खिलाफ अपना अभियान तेज कर दिया है। पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने शनिवार को आयोजित ‘नेशनल टाउन हॉल’ कार्यक्रम में कहा कि पेट्रोल पंपों पर उपभोक्ताओं को शुद्ध पेट्रोल और E-20 पेट्रोल के बीच विकल्प दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार यह मांग नहीं मानती है तो 4 अगस्त को प्रधानमंत्री आवास तक मार्च निकाला जाएगा।
3 अगस्त तक याचिकाएं, फिर PM आवास तक मार्च
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आम आदमी पार्टी 3 अगस्त की दोपहर तक प्रधानमंत्री के नाम ऑनलाइन और ऑफलाइन याचिकाएं एकत्र करेगी। इसके बाद करीब 100 लोगों का प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री आवास जाकर यह याचिका सौंपेगा और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करेगा। AAP का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य उपभोक्ताओं को अपनी पसंद का ईंधन चुनने का अधिकार दिलाना है।
E-20 को लेकर सरकार पर लगाए सवाल
नेशनल टाउन हॉल के दौरान केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि बिना पर्याप्त वैज्ञानिक जानकारी सार्वजनिक किए देशभर में E-20 पेट्रोल को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि E-20 पूरी तरह सुरक्षित और लाभकारी है तो सरकार उस वैज्ञानिक रिपोर्ट को सार्वजनिक करे, जिसके आधार पर यह दावा किया गया कि इससे वाहनों को कोई नुकसान नहीं होता।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि इथेनॉल वास्तव में पेट्रोल से महंगा है और इसके उत्पादन से पर्यावरणीय समस्याएं पैदा हो रही हैं, तो सरकार इसके व्यापक उपयोग पर पुनर्विचार करे। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि लोगों की चिंताओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।
टाउन हॉल में लोगों ने साझा किए अनुभव
AAP द्वारा आयोजित ‘नेशनल टाउन हॉल’ में विभिन्न राज्यों से जुड़े लोगों ने E-20 पेट्रोल के उपयोग से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। कार्यक्रम के दौरान कई वाहन मालिकों, मैकेनिकों और अन्य प्रतिभागियों ने दावा किया कि E-20 ईंधन के इस्तेमाल के बाद उन्हें वाहनों में तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ा।
12 वर्षों से दोपहिया वाहनों की मरम्मत का काम कर रहे एक मैकेनिक आमिर खान ने कहा कि E-20 पेट्रोल इस्तेमाल करने वाले कई वाहनों में फ्यूल सिस्टम से जुड़ी दिक्कतें देखने को मिली हैं। उनका दावा था कि यदि वाहन लंबे समय तक खड़ा रहे तो फ्यूल पंप चोक होने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।
वहीं ओडिशा के एक प्रतिभागी स्वप्निल ने दावा किया कि E-20 के इस्तेमाल के बाद उनकी कार का माइलेज कम हुआ। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ क्षेत्रों में इथेनॉल संयंत्रों को लेकर स्थानीय किसानों और ग्रामीणों ने पर्यावरण संबंधी चिंताएं जताई हैं।
AAP का दावा- 2023 से पहले बनी गाड़ियां होंगी प्रभावित
आम आदमी पार्टी का कहना है कि देश में 2023 से पहले निर्मित करोड़ों पेट्रोल वाहन सड़कों पर चल रहे हैं और इनके मालिक E-20 पेट्रोल को लेकर आशंकित हैं। पार्टी का आरोप है कि ऐसे वाहनों के लिए इस ईंधन के प्रभाव को लेकर पर्याप्त स्पष्टता नहीं दी गई है।
अरविंद केजरीवाल ने इससे पहले भी आरोप लगाया था कि केंद्र सरकार उपभोक्ताओं पर E-20 पेट्रोल थोप रही है और ऑटोमोबाइल कंपनियों पर दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि उपभोक्ताओं को शुद्ध पेट्रोल का विकल्प उपलब्ध कराया जाए और ईंधन नीति से जुड़े सभी वैज्ञानिक अध्ययन सार्वजनिक किए जाएं।
केंद्र सरकार ने E-20 का किया बचाव
इस बीच पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने E-20 पेट्रोल नीति का बचाव करते हुए कहा है कि पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण से देश को आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा के स्तर पर महत्वपूर्ण लाभ मिला है। मंत्रालय के अनुसार यदि एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम लागू नहीं किया गया होता तो हालिया वैश्विक परिस्थितियों और पश्चिम एशिया में तनाव के दौरान पेट्रोल की कीमत 125 रुपये प्रति लीटर से अधिक पहुंच सकती थी।
सरकार का कहना है कि एथेनॉल मिश्रण से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम हुई है, विदेशी मुद्रा की बचत हुई है और किसानों को भी अतिरिक्त आय का अवसर मिला है।
ऑनलाइन याचिका अभियान भी जारी
AAP ने प्रधानमंत्री के नाम एक ऑनलाइन याचिका भी शुरू की है। पार्टी का दावा है कि इस याचिका पर दो लाख से अधिक लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि याचिका के माध्यम से लोगों की राय सरकार तक पहुंचाई जाएगी और E-20 नीति पर पुनर्विचार की मांग की जाएगी।
E-20 पर बहस जारी
देश में E-20 पेट्रोल को लेकर बहस लगातार तेज होती जा रही है। एक ओर केंद्र सरकार इसे ऊर्जा सुरक्षा, प्रदूषण नियंत्रण और किसानों के हित में महत्वपूर्ण कदम बता रही है, वहीं आम आदमी पार्टी और कुछ वाहन मालिक इसके प्रभाव को लेकर सवाल उठा रहे हैं। आने वाले दिनों में 4 अगस्त के प्रस्तावित मार्च और इस मुद्दे पर सरकार की प्रतिक्रिया पर सभी की नजर रहेगी।