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भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को तेज बिकवाली से सेंसेक्स दिन के उच्चतम स्तर से करीब 1433 अंक फिसल गया, जबकि निफ्टी में भी 470 अंकों से ज्यादा की गिरावट आई। कच्चे तेल और वैश्विक बॉन्ड यील्ड ने दबाव बढ़ाया।
मंगलवार, 15 सितंबर को भारतीय शेयर बाजार में कारोबार भारी गिरावट के साथ समाप्त हुआ। जबकि घरेलू इक्विटी बाजार ने दिन की शुरुआत में बढ़त के साथ की थी, बिकवाली का दबाव लगातार बढ़ता गया। शुरुआती बढ़त को बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, मेटल, रियल एस्टेट और मिडकैप-स्मॉलकैप शेयरों में व्यापक बिक्री ने पूरी तरह खत्म कर दिया। दिन भर में सेंसेक्स अपने उच्चतम स्तर से करीब 1,433 अंक तक गिर गया, जबकि निफ्टी भी अपने इंट्राडे हाई से 470 अंकों से ज्यादा नीचे आ गया। बाजार में इस तेज गिरावट का मुख्य कारण कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और प्रमुख केंद्रीय बैंकों की आगामी ब्याज दर संबंधी बैठकों की चिंता है।
शानदार शुरुआत के बाद बाजार में बदलाव
घरेलू बाजारों ने मंगलवार को सकारात्मक शुरुआत की थी। निवेशकों ने शुरूआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी में तेजी देखा। यह वृद्धि, हालांकि, बहुत देर तक कायम नहीं रह सकी। जैसे-जैसे कारोबार बढ़ा, निवेशकों ने ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली शुरू कर दी और कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बिकवाली तेज हो गई। इसके बाद बाजार पूरी तरह बदल गया और सबसे महत्वपूर्ण सूचकांक लगातार नीचे जाने लगे।
सेंसेक्स में दिन के उच्चतम स्तर से लगभग 1,433 अंकों की गिरावट बाजार में बिकवाली की गति को दर्शाती है। साथ ही, निफ्टी भी अपने इंट्राडे शिखर से 470 अंकों से अधिक गिर गया। निवेशकों ने मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बहुत बिकवाली की, क्योंकि यह सिर्फ बड़े शेयरों पर नहीं पड़ता था।
बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्रों पर सबसे अधिक दबाव
बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं से जुड़े शेयरों पर भी गिरावट आई। बैंकों और वित्तीय संस्थाओं में निवेशकों ने बढ़ती अनिश्चितता के बीच सतर्कता दिखाई। रियल्टी और मेटल शेयरों में भी भारी बिकवाली हुई।
हाल के दिनों में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में काफी गिरावट देखने को मिली है, इसलिए इन शेयरों में गिरावट बाजार के लिए खास चिंता का विषय रही है। व्यापक बिकवाली ने निवेशकों के पोर्टफोलियो पर दबाव बढ़ा और बाजार की धारणा को कमजोर कर दिया।
कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने चिंता बढ़ा दी
कच्चे तेल की ऊंची कीमतें एक प्रमुख कारण हैं जो भारतीय शेयर बाजार पर दबाव डालती हैं। भारत कच्चे तेल के आयात से बहुत कुछ खरीदता है। ऐसे में देश के आयात बिल और महंगाई पर वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में लगातार मजबूती से दबाव बढ़ने की आशंका है।
महंगा कच्चा तेल कंपनियों का खर्च भी बढ़ा सकता है। इससे रुपये पर दबाव बढ़ने और चालू खाते की स्थिति प्रभावित होने की भी चिंता है। इसलिए, तेल की कीमतों में तेजी के बीच भारतीय शेयर बाजार के निवेशकों ने अधिक सावधानी दिखाई दी।
बाजार को बढ़ती बॉन्ड यील्ड भी चुनौती देती है
अंतरराष्ट्रीय बाजार में बॉन्ड यील्ड में वृद्धि ने निवेशकों को भी चिंतित कर दिया। अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश विकल्पों का आकर्षण बढ़ सकता है जब बॉन्ड यील्ड बढ़ता है। इससे जोखिम वाली संपत्तियों, विशेष रूप से शेयर बाजार, प्रभावित हो सकते हैं।
निवेशक अमेरिकी बॉन्ड यील्ड की मजबूती के बीच वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों की ओर देख रहे हैं। विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में विदेशी निवेश के प्रवाह को लेकर भी अनिश्चितता बढ़ सकती है। इसी वैश्विक परिदृश्य ने मंगलवार की बिकवाली को भारतीय बाजार से जोड़ दिया है।
अमेरिकी फेड के निर्णय पर बाजार की दृष्टि
अब, निवेशकों का ध्यान बुधवार को अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक पर है। बाजार में ब्याज दर को लेकर पहले से ही बहुत चर्चा हुई है और वर्तमान अनुमानों के अनुसार संभावना दर लगभग ९३% बढ़ेगी। बाजार की दिशा को फेड के फैसले और चेयरमैन की टिप्पणी और आगे की मौद्रिक नीति के संकेत भी प्रभावित कर सकते हैं।
वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है अगर अमेरिकी केंद्रीय बैंक अपेक्षा से अधिक सख्त रहता है। वहीं, निवेशकों को नरम रुख से राहत मिल सकती है। इसलिए बुधवार के फेड फैसले से पहले भारतीय बाजार में भी सावधानी बढ़ी है।
बैंक ऑफ जापान की बैठक भी
बैंक ऑफ जापान भी निवेशकों की नजर में है, साथ ही अमेरिका भी। शुक्रवार को जापान बैंक ने ब्याज दरों को बढ़ाने की उम्मीद है। वैश्विक पूंजी प्रवाह और करेंसी बाजार जापान की मौद्रिक नीति को बदल सकते हैं।
दुनिया के दो सबसे बड़े केंद्रीय बैंकों ने एक सप्ताह में दिए गए फैसलों से बाजार अनिश्चित है। अब निवेशक यह समझ रहे हैं कि ब्याज दरों का वैश्विक चक्र किस दिशा में जा रहा है और इसका भारतीय बाजार पर क्या प्रभाव होगा।
आगे बाजार में रह सकता है
मंगलवार की तेज गिरावट के बाद बाजार आने वाले सत्रों में अस्थिर रहेगा। बाजार की दिशा को मुख्यतः कच्चे तेल की कीमतें, वैश्विक बॉन्ड यील्ड, अमेरिकी फेड का निर्णय, जापान बैंक की नीति और विदेशी निवेशकों की क्रियाएं प्रभावित करेंगे।
इस तरह की परिस्थितियों में निवेशकों का ध्यान कंपनियों के प्रदर्शन और वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर रहेगा। मजबूत शुरुआत के बावजूद वैश्विक संकेत कमजोर होने पर घरेलू बाजार में तेजी से बिकवाली में बदल सकती है, जैसा कि मंगलवार की गिरावट ने एक बार फिर दिखाया।