Table of Contents
CM नायब सिंह सैनी की मौजूदगी में नूंह में 4 Integrated Waste-to-Energy Plants के लिए MoU हुए। रोजाना 5,000 टन कचरे से 50 MW बिजली उत्पादन का लक्ष्य है।
हरियाणा में कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन और उससे ऊर्जा उत्पादन की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की मौजूदगी में नूंह में चार Integrated Waste-to-Energy Plants स्थापित करने के लिए समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए। ये प्लांट हिसार, अंबाला, फरीदाबाद और गुरुग्राम क्लस्टर में स्थापित किए जाएंगे।
इन चारों परियोजनाओं के जरिए हर दिन करीब 5,000 टन कचरे का वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण किया जाएगा। इससे लगभग 50 मेगावाट बिजली का उत्पादन होने की उम्मीद है। सभी चार प्लांट अक्टूबर 2028 तक चालू किए जाने का लक्ष्य रखा गया है।
हरियाणा में ‘Waste to Wealth’ की दिशा में बड़ा कदम
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को केवल ‘स्वच्छ भारत’ का संकल्प ही नहीं दिया, बल्कि कचरे को संसाधन में बदलने की नई सोच ‘Waste to Wealth’ भी सामने रखी है। हरियाणा इसी विजन के साथ आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि नूंह में हुए ये समझौते राज्य के शहरों को स्वच्छ, स्वस्थ और आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन होने से जहां शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था बेहतर होगी, वहीं इससे ऊर्जा उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा।
5,000 टन कचरे से रोजाना 50 मेगावाट बिजली
कचरे से ऊर्जा उत्पादन की दिशा में हरियाणा की बड़ी पहल।
मुख्यमंत्री श्री @NayabSainiBJP की उपस्थिति में नूंह में हिसार, अंबाला, फरीदाबाद और गुरुग्राम क्लस्टर में 4 इंटीग्रेटेड वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट स्थापित करने के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर हुए।
इन संयंत्रों में प्रतिदिन 5 हजार टन… pic.twitter.com/6EH3NyghOF
— DPR Haryana (@DiprHaryana) August 29, 2026
प्रस्तावित चार Integrated Waste-to-Energy Plants में प्रतिदिन लगभग 5,000 टन कचरे को वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस किया जाएगा। इस प्रक्रिया से करीब 50 मेगावाट बिजली पैदा करने की योजना है।
यह पहल हरियाणा में बढ़ते शहरी कचरे के बेहतर प्रबंधन के साथ-साथ वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा सकती है। इससे कचरे के निपटान की समस्या को कम करने और उसे उपयोगी ऊर्जा में बदलने का रास्ता मजबूत होगा।
हिसार, अंबाला, फरीदाबाद और गुरुग्राम में लगेंगे प्लांट
MoUs के तहत चार अलग-अलग क्लस्टरों में Waste-to-Energy Plants स्थापित किए जाएंगे। इनमें हिसार, अंबाला, फरीदाबाद और गुरुग्राम शामिल हैं। सभी परियोजनाओं को अक्टूबर 2028 तक operational करने का लक्ष्य रखा गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस साझेदारी से हरियाणा के शहरी विकास को नई ऊर्जा मिलेगी और राज्य में कचरा प्रबंधन के तरीकों में महत्वपूर्ण बदलाव आएगा।
स्वच्छ और आधुनिक शहरों की ओर हरियाणा
नायब सिंह सैनी ने कहा कि आधुनिक शहरों के लिए बेहतर कचरा प्रबंधन बेहद जरूरी है। सरकार का प्रयास है कि कचरे को केवल समस्या के रूप में न देखा जाए, बल्कि उसे ऊर्जा और अन्य उपयोगी संसाधनों में बदलने की संभावनाओं का इस्तेमाल किया जाए।
हरियाणा में चार Integrated Waste-to-Energy Plants की स्थापना से स्वच्छता, कचरा प्रबंधन और ऊर्जा उत्पादन—तीनों क्षेत्रों को एक साथ मजबूती मिलने की उम्मीद है। यह पहल राज्य को ‘Waste to Wealth’ के विजन के अनुरूप आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।