अरविंद केजरीवाल ने NEET-UG परीक्षा से पहले टेलीग्राम बैन पर सरकार को घेरा। पेपर लीक के धंधे को ‘अरबों का रैकेट’ बताते हुए गंभीर आरोप लगाए।
NEET-UG 2026 की पुनः परीक्षा से ठीक पहले केंद्र सरकार द्वारा टेलीग्राम (Telegram) ऐप पर अस्थायी प्रतिबंध और प्रश्नपत्रों के परिवहन के लिए वायुसेना के विमानों का उपयोग करने के फैसलों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इन फैसलों को ‘हास्यास्पद’ (absurd) करार दिया है। केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार इन प्रतीकात्मक और अटपटे कदमों के जरिए असल समस्या से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। उनके अनुसार, हवाई जहाज से पेपर ले जाने या टेलीग्राम बंद करने जैसे उपाय पेपर लीक जैसी गंभीर समस्या को रोकने में पूरी तरह विफल साबित होंगे।
‘पेपर लीक’ को बताया करोड़ों का संगठित रैकेट
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— Aam Aadmi Party Delhi (@AAPDelhi) June 17, 2026
केजरीवाल ने पेपर लीक की घटनाओं को महज एक संयोग नहीं, बल्कि एक सुनियोजित ‘मल्टी-बिलियन रुपया रैकेट’ बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे धंधे की जड़ें बहुत गहरी हैं और इसका मुनाफा सीधे तौर पर प्रभावशाली लोगों तक पहुंचता है। केजरीवाल ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए यह गंभीर आरोप लगाया कि सरकार वास्तव में पेपर लीक को रोकना ही नहीं चाहती, क्योंकि यही भ्रष्ट तंत्र वह ‘फंड’ उपलब्ध कराता है, जिसका इस्तेमाल चुनाव के समय विधायकों (MLAs) और सांसदों (MPs) को खरीदने और सरकारों को गिराने-बनाने में किया जाता है।
नीतिगत विफलता पर उठाए सवाल
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाते हुए कहा कि साल 2014 से अब तक देश भर में 90 से अधिक बार पेपर लीक की घटनाएं हो चुकी हैं, जो देश की शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा सुरक्षा पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि टेलीग्राम को बैन करना या अन्य डिजिटल प्रतिबंध लगाना महज एक दिखावा है, क्योंकि असल अपराधी इन प्लेटफॉर्म्स के हटते ही तुरंत दूसरे ऐप्स पर शिफ्ट हो जाते हैं। केजरीवाल के अनुसार, सरकार को तकनीकी प्रतिबंधों की नौटंकी करने के बजाय पूरे परीक्षा तंत्र को पारदर्शी, डिजिटल रूप से सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने की जरूरत है, ताकि देश के लाखों मेहनती छात्रों का भविष्य सुरक्षित हो सके।