Table of Contents
भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को बड़ी रैली। सेंसेक्स और निफ्टी में जोरदार तेजी के पीछे के 4 मुख्य कारण और बाजार का ताजा हाल जानें।
गुरुवार की सुबह भारतीय शेयर बाजार बहुत उत्साहित था। भारतीय बेंचमार्क सूचकांकों ने कारोबार की शुरुआत में मजबूती के साथ की, क्योंकि वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों, मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव में कमी और कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट हुई। निवेशकों की बढ़ती जोखिम लेने की इच्छा ने बाजार में चौतरफा लिवाली को जन्म दिया, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी ने नई ऊंचाइयों को छुआ।
व्यापार रणनीति: चौतरफा तेजी की स्थिति
सुबह 9:48 बजे तक, बीएसई सेंसेक्स 74,614 के स्तर पर कारोबार कर रहा था, यानी 1.06% की बढ़त। NSSE Nifty 50 ने भी 216 अंकों की बढ़त के साथ 23,378 के स्तर को पार किया। निफ्टी ने सत्र के दौरान 23,456 का अपना इंट्राडे हाई भी छुआ। फाइनेंशियल्स, रियलिटी, केमिकल्स, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और बैंकिंग शेयरों ने भी शानदार प्रदर्शन किया, क्योंकि रैली केवल विशिष्ट शेयरों तक सीमित नहीं रही। निफ्टी रियल्टी में 1.93% और निफ्टी केमिकल्स में 1.64% की अविश्वसनीय वृद्धि हुई। साथ ही, निजी बैंकों और वित्तीय शेयरों ने निफ्टी बैंक को 1,27% बढ़कर 55,880 पर देखा।
न सिर्फ फ्रंटलाइन शेयरों में बल्कि व्यापक बाजार में भी तेजी का रुख रहा। यह दिखाता है कि छोटे और मध्यम स्तर की कंपनियों में भी निवेशकों का भरोसा लौटा है, क्योंकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 1.47% और मिडकैप 100 में 1.26% की तेजी दर्ज की गई। इंडसइंड बैंक ने सेंसेक्स के सबसे बड़े शेयरों में 3.44% की बढ़त के साथ सर्वोच्च स्थान हासिल किया, जबकि एलएंडटी, बजाज फाइनेंस, एचडीएफसी बैंक और टाटा स्टील ने भी बाजार को सहारा दिया।
रैली का प्रमुख चालक: किन कारकों ने बाजार को धक्का दिया?
तेजी से बढ़ते बाजार के चार प्रमुख कारण रहे:
- तनाव (ग्लोबल राजनीति): अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि इस सप्ताहांत तक अमेरिका और ईरान एक शांति समझौते पर पहुंच सकते हैं, इससे निवेशकों की चिंता कम हो गई। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), जो वैश्विक शिपिंग के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है, के दोबारा खुलने की उम्मीद ने बाजार में स्थिरता ला दी।
- कच्चे तेल की लागत में कमी: ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 2% गिरकर 88.77 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। यह कमी कच्चे तेल की कीमतों को कम करके मुद्रास्फीति के दबाव को कम करती है, जो भारत जैसे अर्थव्यवस्था को तेल आयात पर निर्भर करता है।
- पैसे में मजबूती: भारतीय रुपया ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 67 पैसे की मजबूती के साथ 95.18 पर खुला। भारतीय विदेशी मुद्रा खाते पर दबाव कम होने की उम्मीद बढ़ गई, क्योंकि कच्चे तेल में नरमी ने रुपये को समर्थन दिया।
- India VIX (घटती अस्थिरता): इंडिया VIX, बाजार की अस्थिरता को मापने वाला सूचकांक, लगभग 5% गिरकर 14.86 पर आ गया। यह गिरावट इस बात का संकेत है कि हाल के भू-राजनीतिक बदलावों के बाद निवेशकों की चिंता कम हो गई है और बाजार अब स्थिर हो गया है।
क्या यह जल्दी होगा?
भारतीय शेयर बाजार की यह रैली इस बात का सबूत है कि बाजार में कितनी तेजी से सुधार हो सकता है जब स्थानीय और वैश्विक परिवर्तन मिलकर काम करते हैं। भारतीय बाजार में एफआईआई और डीआईआई दोनों की सक्रियता बढ़ी है, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतें गिर गई हैं और भू-राजनीतिक मोर्चे पर अच्छी खबरें आई हैं। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि निवेशकों को अभी भी सावधान रहना चाहिए और केवल “फंडामेंटली मजबूत” शेयरों में निवेश करना चाहिए। फिलहाल, निवेशकों को आने वाले सत्रों में भी इसी तरह की सकारात्मकता की उम्मीद है क्योंकि भारतीय बाजार का सेंटीमेंट काफी बुलिश बना हुआ है। गुरुवार की रैली ने अर्थव्यवस्था के प्रति एक मजबूत और आशावादी रुख को पेश किया और निवेशकों को भी लाभ दिया।