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हरियाणा के 8वीं कक्षा के इतिहास पाठ्यक्रम में शामिल हुआ सिख गुरुओं का गौरवशाली इतिहास। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पूरी की अपनी घोषणा। जानें इस ऐतिहासिक बदलाव के बारे में।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राज्य के स्कूली शिक्षा प्रणाली में एक महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए 8वीं कक्षा के इतिहास के पाठ्यक्रम में सिख गुरुओं के पावन इतिहास को शामिल करने की घोषणा को अमलीजामा पहना दिया है। यह कदम गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहादत समागम के अवसर पर किए गए वादे को पूरा करने की दिशा में एक बड़ी पहल है।
‘भावी पीढ़ी सीखेगी त्याग और बलिदान के आदर्श’
मुख्यमंत्री श्री @NayabSainiBJP द्वारा हरियाणा में गुरु तेगबहादुर जी के 350वें शहीदी समागम के अवसर पर की गई घोषणा को पूरा करते हुए 8वीं कक्षा के इतिहास पाठ्यक्रम में सिख गुरुओं का इतिहास शामिल किया गया है। अब स्कूली बच्चे सिख गुरुओं के साथ-साथ बाबा बंदा सिंह बहादुर जी के त्याग,…
— DPR Haryana (@DiprHaryana) June 11, 2026
इस बदलाव के बाद अब हरियाणा के स्कूलों में छात्र न केवल सिख गुरुओं के जीवन से रूबरू होंगे, बल्कि बाबा बंदा सिंह बहादुर जी के अद्वितीय बलिदान, साहस और उनके द्वारा स्थापित आदर्शों से भी प्रेरणा लेंगे। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि छात्रों में उच्च मानवीय मूल्यों का संचार करना है।
‘समानता और मानवता का संदेश’
मुख्यमंत्री ने सिख गुरुओं के योगदान को नमन करते हुए कहा, “गुरु नानक देव जी से लेकर गुरु गोबिंद सिंह जी तक, सभी गुरुओं ने मानवता, समानता, सेवा और सामाजिक न्याय का संदेश दिया है। उन्होंने समाज को जाति, धर्म और वर्ग के भेदभाव से ऊपर उठकर मानव कल्याण के लिए कार्य करने की प्रेरणा दी है। अब हमारे प्रदेश के विद्यार्थी इन महान मूल्यों को पाठ्यक्रम के माध्यम से गहराई से समझ सकेंगे।”
शिक्षा को संस्कार निर्माण का साधन बनाना लक्ष्य
हरियाणा सरकार की इस पहल को शिक्षा क्षेत्र में एक दूरगामी सुधार के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का मानना है कि इतिहास के इन अध्यायों को पढ़कर आने वाली पीढ़ी अपने गौरवशाली अतीत से जुड़ सकेगी और उनमें देशभक्ति व सेवा भाव की भावना प्रबल होगी। मुख्यमंत्री सैनी ने स्पष्ट किया कि हरियाणा सरकार भविष्य में भी ऐसे शिक्षा सुधारों के लिए प्रतिबद्ध है जो बच्चों के चरित्र निर्माण में सहायक हों।