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केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल के लिए मनरेगा के तहत 153 लाख मानव-दिवस का श्रम बजट मंजूर किया है। 1 जुलाई 2026 से राज्य में ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन’ भी लागू होगा।
पश्चिम बंगाल के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों को बढ़ाने और आजीविका सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्र ने जून 2026 के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGS) के तहत पश्चिम बंगाल के लिए 153 लाख मानव-दिवस (person-days) के श्रम बजट को मंजूरी दे दी है। यह निर्णय राज्य में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देने और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को राहत प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
श्रम बजट की मंजूरी और उसका महत्व
केंद्रीय ग्रामीण विकास और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस मंजूरी की आधिकारिक सूचना पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी को एक पत्र के माध्यम से प्रेषित की। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय राज्य के अनुरोध और केंद्र द्वारा निर्धारित विभिन्न मापदंडों पर राज्य की प्रगति की गहन समीक्षा के बाद लिया गया है।
153 लाख मानव-दिवस का यह आवंटन उन ग्रामीण परिवारों के लिए एक बड़ा सहारा है, जो इस योजना के तहत काम की तलाश में हैं। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका की सुरक्षा बनी रहे और परिवारों को उनकी आजीविका के लिए पलायन न करना पड़े।
सरकार की अपेक्षाएं और पारदर्शिता पर जोर
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस आवंटन के साथ ही राज्य सरकार के समक्ष कुछ महत्वपूर्ण अपेक्षाएं भी रखी हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य सरकार इस आवंटन का इष्टतम उपयोग सुनिश्चित करेगी। इसका अर्थ यह है कि पर्याप्त संख्या में कार्यस्थल खोले जाएंगे और सभी पात्र ग्रामीण परिवारों को समय पर रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा।
मंत्रालय ने इस बात पर विशेष जोर दिया है कि योजना का कार्यान्वयन पूरी तरह से पारदर्शी और जवाबदेह होना चाहिए। किसी भी सरकारी योजना की सफलता उसके धरातल पर प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। केंद्र ने राज्य से आग्रह किया है कि वे नियमों का पालन करते हुए सुनिश्चित करें कि फंड का दुरुपयोग न हो और लाभ सीधा जरूरतमंदों तक पहुँचे।
‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन’ (VB-G RAM G) का शुभारंभ
इस मंजूरी के साथ ही एक और महत्वपूर्ण बदलाव की घोषणा की गई है। पश्चिम बंगाल में 1 जुलाई 2026 से ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन’ (VB-G RAM G) लागू किया जाएगा। यह नया ढांचा केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ और उत्पादक सामुदायिक संपत्तियों का निर्माण करना है।
इस मिशन के तहत, राज्यों को अपेक्षा की गई है कि वे अपने रोजगार-सृजन कार्यों को इस नए मिशन की गतिविधियों के अनुरूप संरेखित (align) करें। इसके लिए आवश्यक प्रशासनिक और ढांचागत तैयारियां पूरी करना राज्य सरकार की प्राथमिकता होगी। यह नया मिशन ग्रामीण विकास के दृष्टिकोण को अधिक व्यापक और भविष्योन्मुखी बनाने का प्रयास है।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की प्रतिक्रिया
इस विकास पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी प्रसन्नता जाहिर करते हुए कहा कि मनरेगा के तहत यह आवंटन और VB-G RAM G मिशन का कार्यान्वयन बंगाल के लोगों के लिए ग्रामीण रोजगार की एक मजबूत गारंटी साबित होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि यह पहल प्रधानमंत्री के ‘विकसित भारत’ के संकल्प को साकार करने में पश्चिम बंगाल का योगदान सुनिश्चित करेगी।
सतत ग्रामीण विकास की ओर एक कदम
केंद्र सरकार को उम्मीद है कि बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की ये पहलें और ग्रामीण विकास का नया ढांचा पश्चिम बंगाल में सतत ग्रामीण विकास को एक नई गति प्रदान करेगा। जब रोजगार के अवसर स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होते हैं, तो न केवल गरीबी में कमी आती है, बल्कि ग्रामीण बुनियादी ढांचे का विकास भी होता है।
पश्चिम बंगाल में 153 लाख मानव-दिवस का लक्ष्य और जुलाई से नए मिशन का क्रियान्वयन राज्य की आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। यह न केवल वर्तमान के लिए रोजगार सुरक्षा है, बल्कि भविष्य के लिए एक आर्थिक सशक्तीकरण का रोडमैप भी है। ग्रामीण जनता को उम्मीद है कि इस नई पहल से उनके जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव आएगा और वे ‘विकसित भारत’ के निर्माण में सक्रिय भागीदार बनेंगे।