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सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली में खामियों को उजागर कर 18 साल के सार्थक ने बोर्ड के चेयरमैन और सचिव का तबादला करवाया।
हाल ही में भारतीय शिक्षा जगत में एक ऐसा घटनाक्रम देखने को मिला, जिसने न केवल सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए, बल्कि देश के युवाओं की तार्किक क्षमता और साहस को भी एक नई पहचान दी। 18 वर्षीय छात्र सार्थक और उनके साथी निसर्ग द्वारा सीबीएसई (CBSE) की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रक्रिया की खामियों को उजागर करना, लोकतंत्र में जागरूक युवा की भागीदारी का एक सशक्त उदाहरण बन गया है। इस पूरे प्रकरण ने साबित कर दिया है कि जब युवा शक्ति अपने अधिकारों के लिए सजग होती है, तो व्यवस्था को भी सुधार के लिए झुकना पड़ता है।
विवाद की पृष्ठभूमि: क्या है CBSE OSM प्रणाली?
मई 2026 में, कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम आने के बाद छात्रों के एक बड़े वर्ग ने मूल्यांकन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। सीबीएसई की नई ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ प्रणाली, जिसके तहत उत्तर पुस्तिकाओं का डिजिटल मूल्यांकन किया जाता है, विवादों के केंद्र में आ गई। छात्रों का आरोप था कि वेबसाइट पर दिखाई गई स्कैन की गई कॉपियां धुंधली थीं और वे उनकी मूल हस्तलिपि से मेल नहीं खाती थीं। इसके अलावा, छात्रों ने दावा किया कि उनके द्वारा लिखे गए उत्तरों और दिए गए अंकों में भारी विसंगतियां थीं। जब बड़ी संख्या में छात्रों ने पुनर्मूल्यांकन (Re-evaluation) के लिए आवेदन किया, तो यह स्पष्ट हो गया कि समस्या केवल कुछ व्यक्तिगत मामलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक तकनीकी और प्रक्रियात्मक विफलता है।
सार्थक का प्रेजेंटेशन और ‘सिस्टम’ में सुधार
इस विवाद में सबसे महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब कक्षा 12 के छात्र सार्थक ने मोर्चा संभाला। उन्होंने केवल शिकायत ही नहीं की, बल्कि एक गहन अध्ययन के बाद 7 पेज का एक विस्तृत प्रेजेंटेशन तैयार किया। सार्थक ने इस प्रेजेंटेशन के माध्यम से ऑन-स्क्रीन मार्किंग के लिए वेंडर्स के चयन की टेंडर प्रक्रिया में मौजूद खामियों और मूल्यांकन के दौरान बरती गई अनियमितताओं का पर्दाफाश किया। उन्होंने तर्कों और तथ्यों के साथ यह साबित किया कि कैसे एक दोषपूर्ण प्रणाली छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही थी।
सार्थक के इस प्रयासों का ही परिणाम था कि केंद्र सरकार को संज्ञान लेना पड़ा। 2 जून 2026 को एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए, सरकार ने सीबीएसई चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का तबादला कर दिया। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि यदि सही साक्ष्यों के साथ सवाल उठाए जाएं, तो सरकार को भी अपनी गलतियों को सुधारने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
राहुल गांधी का समर्थन और युवा शक्ति का संदेश
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सार्थक और उनके साथी निसर्ग की जमकर सराहना की है। अपने एक्स (X) हैंडल पर उन्होंने लिखा कि सार्थक की सोच, साहस और सिद्धांत किसी भी अनुभवी व्यक्ति से कम नहीं हैं। राहुल गांधी ने तंज कसते हुए कहा कि जिस तरह से इन बच्चों ने सीबीएसई और संबंधित कंपनियों की मिलीभगत को देश के सामने रखा, वह काम बड़े-बड़े मीडिया हाउस और खोजी पत्रकार भी नहीं कर पाए। उन्होंने इस घटना को युवाओं की जीत और सरकार की विफलता के रूप में रेखांकित किया।
राहुल गांधी का यह बयान इस बहस को और तेज करता है कि आज का युवा केवल ‘रील्स बनाने’ या ‘पकौड़े तलने’ तक सीमित नहीं है, बल्कि वह देश के भविष्य को लेकर चिंतित है और नीतिगत फैसलों पर प्रश्न करने का माद्दा रखता है। सार्थक जैसे छात्र यह सिद्ध कर रहे हैं कि भारत का युवा जिज्ञासु, जागरूक और जानकार है, जो आसानी से किसी के बहकावे में आने वाला नहीं है।
एक नई जागरूकता की शुरुआत
सीबीएसई OSM विवाद केवल एक तकनीकी गलती का सुधार नहीं है, बल्कि यह एक ‘चेतावनी’ है उन सभी संस्थाओं के लिए जो पारदर्शिता के साथ खिलवाड़ करती हैं। सार्थक का संघर्ष हमें सिखाता है कि जब तकनीक का इस्तेमाल गलत इरादों से या बिना पर्याप्त सुरक्षा के किया जाता है, तो इसके परिणाम लाखों छात्रों के करियर पर पड़ते हैं। यह जीत एक लोकतांत्रिक समाज के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, जहाँ हर छात्र को यह भरोसा होना चाहिए कि उनकी मेहनत का मूल्यांकन सही तरीके से किया जा रहा है।
सार्थक और निसर्ग ने देश के करोड़ों छात्रों को यह विश्वास दिलाया है कि व्यवस्था का हिस्सा होने के नाते सवाल पूछना हमारा अधिकार है और तर्क-आधारित विरोध का परिणाम निश्चित रूप से सकारात्मक होता है। यह घटनाक्रम भारत की असली ‘युवा शक्ति’ के उदय का संकेत है, जो आने वाले समय में देश की हर नीति और हर बड़े फैसले पर अपनी पैनी नजर रखेगी।