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भारतीय शेयर बाजार में लगातार दबाव। बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में गिरावट से निफ्टी और सेंसेक्स फिसले। ग्लोबल संकेतों और मार्केट सेंटीमेंट की पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें।
भारतीय शेयर बाजार में इन दिनों सतर्कता और अस्थिरता का दौर बना हुआ है। सोमवार की शुरुआत में जहां बाजार में मामूली गिरावट के साथ सपाट रुख देखने को मिला, वहीं मंगलवार को बाजार ने और भी कमजोर शुरुआत की। निवेशकों की नजरें इस समय वैश्विक संकेतों, भू-राजनीतिक तनाव और घरेलू आर्थिक आंकड़ों पर टिकी हैं। बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र में बिकवाली ने बाजार की तेजी पर ब्रेक लगा दिया है, जिससे ब्रॉडर मार्केट में भी दबाव साफ नजर आ रहा है।
सोमवार की उठापटक और मंगलवार का दबाव
सोमवार के कारोबारी सत्र में बेंचमार्क इंडेक्स, बीएसई सेंसेक्स और निफ्टी 50, लगभग सपाट लेकिन नकारात्मक रुझान के साथ कारोबार करते दिखे। सुबह के कारोबार में सेंसेक्स में मामूली गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी 50 भी दबाव में रहा। हालांकि, बाजार का यह रुख मंगलवार सुबह और अधिक नकारात्मक हो गया। वैश्विक संकेतों से प्रेरित होकर, निफ्टी 50 मंगलवार को लगभग 100 अंक की गिरावट के साथ 23,282 के स्तर पर खुला। इसी तरह सेंसेक्स में भी 300 अंकों से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। स्पष्ट है कि निवेशकों में इस समय खरीदारी का उत्साह कम है और वे सतर्क होकर कदम उठा रहे हैं।
IT सेक्टर में रौनक, बैंकिंग पर भारी दबाव
बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच क्षेत्रवार प्रदर्शन में काफी अंतर देखने को मिल रहा है। जहाँ एक ओर बैंकिंग और वित्तीय स्टॉक बाजार पर भारी पड़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आईटी (IT) सेक्टर ने संजीवनी का काम किया है। सोमवार के कारोबार में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), इंफोसिस (Infosys), एचसीएल टेक (HCLTech) और टेक महिंद्रा ने जबरदस्त तेजी दिखाई, जो इस गिरावट भरे बाजार में भी निवेशकों के लिए राहत की बात रही। आईटी शेयरों में आई यह तेजी कहीं न कहीं बाजार को और बड़ी गिरावट से बचाने में कामयाब रही।
इसके विपरीत, गिरावट की कमान वित्तीय और पावर सेक्टर के शेयरों ने संभाली। बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, एनटीपीसी, और पावर ग्रिड जैसे शेयरों में 2 फीसदी से अधिक की गिरावट देखी गई। रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक जैसे बाजार के दिग्गजों (heavyweights) में भी कमजोरी बनी रही, जिससे इंडेक्स रिकवरी करने में नाकाम रहा। ब्रॉडर मार्केट यानी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी सुस्त पड़े रहे, जो यह दर्शाता है कि निवेशकों का भरोसा अभी भी मध्यम और छोटी कंपनियों को लेकर बहुत कम है।
इंडिया VIX और बाजार की चिंताएं
एक सकारात्मक पहलू जो सामने आया, वह है ‘इंडिया VIX’ (India VIX) में गिरावट। सोमवार को इंडिया VIX में करीब 3.44 फीसदी की गिरावट देखी गई और यह 15.97 के स्तर पर आ गया। तकनीकी रूप से इसका अर्थ है कि हालांकि बाजार कमजोर है, लेकिन निवेशकों के बीच घबराहट (anxiety) का स्तर बहुत ज्यादा नहीं है। इसका मतलब यह है कि बाजार में गिरावट तो है, लेकिन यह कोई पैनिक सेलिंग (panic selling) जैसा माहौल नहीं है। निवेशक फिलहाल बाजार की दिशा पर नजर बनाए हुए हैं और किसी भी बड़े घटनाक्रम की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
वैश्विक संकेत और मध्य पूर्व का तनाव
भारतीय बाजार में आई इस कमजोरी के पीछे का सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे भू-राजनीतिक तनाव हैं। मध्य पूर्व में पैदा हुई अनिश्चितता ने न केवल भारत, बल्कि पूरे एशियाई बाजारों को प्रभावित किया है। मंगलवार सुबह निक्केई और कोस्पी जैसे एशियाई बाजारों के खराब प्रदर्शन का असर सीधे तौर पर भारतीय बेंचमार्क सूचकांकों पर पड़ा। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली भी एक निरंतर दबाव का कारण बनी हुई है, जिससे भारतीय शेयर बाजार अपनी पुरानी ऊंचाइयों को दोबारा हासिल करने में जूझ रहा है।
निवेशकों के लिए निष्कर्ष
फिलहाल, बाजार ‘वेट एंड वॉच’ (wait and watch) की स्थिति में है। जब तक अंतरराष्ट्रीय तनाव कम नहीं होते और घरेलू स्तर पर कोई बड़ा सकारात्मक उत्प्रेरक (catalyst) नहीं मिलता, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रहने की संभावना है। आईटी शेयरों का प्रदर्शन यह बताता है कि बाजार में चुनिंदा खरीदारी हो रही है, लेकिन व्यापक बाजार के लिए अभी भी धैर्य रखने की आवश्यकता है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने पोर्टफोलियो में भारी बिकवाली वाले शेयरों पर नजर रखें और बैंकिंग सेक्टर में जारी इस उठापटक के दौरान जोखिम प्रबंधन का ध्यान रखें।