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जानें कैसे भारतीय स्पिरिट्स उद्योग अब केवल खपत ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रीमियम ब्रांड्स के निर्माण में भी अपनी धाक जमा रहा है।
भारतीय स्पिरिट्स उद्योग: ‘उपभोक्ता’ से ‘ग्लोबल ब्रांड’ बनने की ओर एक सफर
दशकों से, वैश्विक स्पिरिट्स उद्योग के साथ भारत का रिश्ता केवल एक सांख्यिकीय आंकड़े—’वॉल्यूम’—तक ही सीमित रहा है। भारत दुनिया में सबसे अधिक व्हिस्की पीने वाले देशों में से एक है। यह एक ऐसा बाजार है जो अपनी विशालता, उपभोक्ताओं की अदम्य इच्छाशक्ति और तेजी से विकसित होते परिष्कृत स्वाद के लिए जाना जाता है। हालाँकि, अपनी घरेलू प्रधानता के बावजूद, भारत ने लंबे समय तक वैश्विक मंच पर एक ‘अंडरडॉग’ (कमजोर दावेदार) की भूमिका निभाई है। इसे एक ऐसे राष्ट्र के रूप में पहचाना जाता रहा है जो मुख्य रूप से वैश्विक ब्रांडों का उपभोग करता है, न कि ऐसे ब्रांडों का निर्माण करता है जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बना सकें।
भारत की बाजार शक्ति: एक विशाल उपभोक्ता आधार
भारत की स्पिरिट्स मार्केट की सबसे बड़ी ताकत इसकी विशाल आबादी और युवाओं का बढ़ता हुआ वर्ग है। देश का मध्यम वर्ग जिस तरह से अपने जीवनशैली में बदलाव ला रहा है, उसका सीधा असर प्रीमियम स्पिरिट्स की खपत पर पड़ा है। वैश्विक स्तर पर जब भी स्पिरिट्स की खपत की बात आती है, तो भारत का नाम शीर्ष पर होता है। व्हिस्की यहाँ का सबसे पसंदीदा पेय पदार्थ है, लेकिन अब वाइन, जिन (Gin) और क्राफ्ट बियर के प्रति भी लोगों का रुझान तेजी से बढ़ा है। यह बाजार न केवल बड़ा है, बल्कि अब यह बहुत अधिक शिक्षित और गुणवत्ता के प्रति जागरूक भी हो गया है।
ब्रांडिंग का युग: अब सिर्फ खपत नहीं, निर्माण भी
लंबे समय तक भारतीय स्पिरिट्स उद्योग को ‘स्थानीय’ या ‘इकोनॉमी ब्रांड्स’ के दायरे में देखा जाता था। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में एक बड़ा बदलाव आया है। अब भारतीय डिस्टिलरीज ने यह साबित करना शुरू कर दिया है कि वे विश्व-स्तरीय गुणवत्ता वाले उत्पादों का निर्माण कर सकते हैं। भारतीय ‘सिंगल माल्ट’ व्हिस्की ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पुरस्कार जीतकर पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। ‘अमृत’, ‘पॉल जॉन’ और ‘रामपुर’ जैसे भारतीय ब्रांडों ने यह दिखा दिया है कि भारत अब केवल एक आयातक नहीं, बल्कि एक निर्यातक और निर्माता के रूप में अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी जगह बनाने में सक्षम है।
गुणवत्ता और नवीनता पर ध्यान
वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाने के लिए भारतीय निर्माताओं ने ‘क्वालिटी ओवर क्वांटिटी’ का मंत्र अपना लिया है। अब भारतीय स्पिरिट्स का उत्पादन पुराने पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ आधुनिक तकनीकी बारीकियों के साथ किया जा रहा है। भारतीय जलवायु, जो व्हिस्की के तेजी से परिपक्व होने (maturation) में मदद करती है, का लाभ उठाकर भारतीय डिस्टिलरीज ने एक अनूठा स्वाद प्रोफाइल विकसित किया है, जिसे वैश्विक पारखी लोग भी पसंद कर रहे हैं। यह नवीनता न केवल व्हिस्की तक सीमित है, बल्कि अब भारतीय ‘जिन’ और अन्य क्राफ्ट स्पिरिट्स भी पेरिस से लेकर न्यूयॉर्क तक के बार मेनू में जगह बना रही हैं।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा और चुनौतियां
भारतीय ब्रांड्स के लिए यह सफर आसान नहीं रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पहले से ही जमे हुए स्कॉच, बोर्बोन और अन्य यूरोपीय स्पिरिट्स के बीच अपनी पैठ बनाना चुनौतीपूर्ण है। भारत को अभी भी अपने ‘ब्रांड इंडिया’ की छवि को सुधारने की आवश्यकता है। एक समय था जब ‘मेड इन इंडिया’ का मतलब सस्ते उत्पादों से होता था, लेकिन अब यह धारणा बदल रही है। भारतीय प्रीमियम स्पिरिट्स के उत्पादकों को अपनी मार्केटिंग और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क्स को और मजबूत करना होगा ताकि वे वैश्विक उपभोक्ताओं की पहुंच तक आसानी से पहुंच सकें।
भविष्य की राह: भारत का ग्लोबल विजन
आने वाले समय में, भारतीय स्पिरिट्स उद्योग का भविष्य बेहद उज्ज्वल दिखाई देता है। जैसे-जैसे वैश्विक स्तर पर ‘एक्सपेरिमेंटल ड्रिंकिंग’ का चलन बढ़ रहा है, भारतीय उत्पादों के लिए नई संभावनाएं खुल रही हैं। भारतीय डिस्टिलरीज अब केवल भारत की पसंद को ध्यान में रखकर नहीं, बल्कि वैश्विक तालू (global palate) के अनुसार स्पिरिट्स तैयार कर रही हैं। सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ जैसी पहल और अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों के साथ, आने वाले वर्षों में हम देखेंगे कि भारतीय स्पिरिट्स ब्रांड दुनिया के बेहतरीन बार्स और स्टोर्स में अनिवार्य हिस्सा बन जाएंगे।
अंत में, यह कहना गलत नहीं होगा कि भारत ने ‘उपभोक्ता’ की अपनी छवि को पीछे छोड़ दिया है। भारतीय स्पिरिट्स उद्योग अब एक ऐसे मोड़ पर है जहाँ वह दुनिया को अपना स्वाद चखाने के लिए तैयार है। यह एक सांस्कृतिक बदलाव का भी प्रतीक है, जहाँ भारतीय ब्रांड वैश्विक गौरव के साथ खड़े होने की हिम्मत कर रहे हैं। जिस देश ने दशकों तक वॉल्यूम का नेतृत्व किया, अब वही देश ‘वैल्यू’ और ‘ब्रांडिंग’ के मामले में दुनिया को नई दिशा दिखाने की क्षमता रखता है। भारत की स्पिरिट्स अब सिर्फ शराब की बोतलें नहीं हैं, बल्कि वे भारतीय शिल्प कौशल (craftsmanship) और आधुनिक सोच की वैश्विक पहचान बन रही हैं।