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राजस्व विभाग की वित्त आयुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि हरियाणा में एग्रीस्टैक और पीएम-किसान के तहत ‘किसान रजिस्ट्री’ का काम सीएससी (CSC) के जरिए तेज होगा, जिससे सेवाएं सीधे गांवों तक पहुंचेंगी।
डिजिटल एग्रीकल्चर की ओर हरियाणा के कदम: सीएससी (CSC) के माध्यम से तेजी से बनेगी ‘किसान रजिस्ट्री’, वित्त आयुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने दी जानकारी
हरियाणा सरकार ने राज्य भर के कॉमन सर्विस सेंटरों (सीएससी) के माध्यम से ‘किसान रजिस्ट्री’ (Farmer Registry) तैयार करने और ई-केवाईसी (e-KYC) के काम में तेजी लाने का एक बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है। इस पहल का सीधा उद्देश्य राज्य के प्रत्येक किसान का एक प्रामाणिक, सत्यापित और पारदर्शी डिजिटल डेटाबेस तैयार करना है।
इस महत्वपूर्ण डिजिटल सुधार की जानकारी देते हुए राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्त आयुक्त (Financial Commissioner) डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि इस रणनीतिक कदम से सरकार की सभी जनकल्याणकारी और कृषि से जुड़ी सेवाएं सीधे ग्रामीण स्तर पर और किसानों के दरवाजे तक पहुंच सकेंगी।
केंद्र की ‘एग्रीस्टैक’ पहल और ‘पीएम-किसान’ को मिलेगा बल
वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डॉ. सुमिता मिश्रा ने विस्तृत ब्यौरा देते हुए स्पष्ट किया कि यह पूरी कवायद केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘एग्रीस्टैक’ (AgriStack) पहल और ‘पीएम-किसान’ (PM-KISAN) सम्मान निधि योजना को जमीनी स्तर पर पूरी तरह प्रभावी बनाने के लिए की जा रही है।
अब तक जिन किसानों को इंटरनेट की सीमित पहुंच या तकनीकी जानकारी न होने के कारण अपना पंजीकरण करने या ई-केवाईसी (आधार और बैंक खाता सत्यापन) कराने में कठिनाई आ रही थी, उनका यह काम अब प्रदेश भर में फैले सीएससी (CSC) केंद्रों के माध्यम से बेहद आसान और सुलभ तरीके से किया जाएगा। इस प्रक्रिया के पूरा होने से हर किसान को एक विशिष्ट ‘किसान आईडी’ प्राप्त होगी।
सीधे लक्षित लाभार्थियों तक पहुंचेगी सब्सिडी और सेवाएं
डॉ. सुमिता मिश्रा ने डिजिटल डेटाबेस के दूरगामी लाभों को रेखांकित करते हुए कहा, “यह सेंट्रलाइज्ड डेटाबेस सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं, खाद-बीज पर मिलने वाली सब्सिडी और अन्य महत्वपूर्ण कृषि सेवाओं को बिना किसी देरी या बिचौलियों के सीधे ‘लक्षित लाभार्थियों’ (Targeted Beneficiaries) तक पहुँचाने में सक्षम बनाएगा।”
उन्होंने आगे कहा कि जब किसानों का भूमि रिकॉर्ड (जमाबंदी), आधार और बैंक खाता इस रजिस्ट्री के जरिए आपस में लिंक हो जाएंगे, तो योजनाओं के क्रियान्वयन में पूर्ण पारदर्शिता आएगी और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की आशंका समाप्त हो जाएगी।
किसान कल्याण और कृषि नियोजन को मिलेगी मजबूती
प्रशासनिक स्तर पर इस डेटाबेस को कृषि क्षेत्र के भविष्य के लिए एक बड़ा गेम-चेंजर माना जा रहा है। डॉ. सुमिता मिश्रा के अनुसार, इस डिजिटल रजिस्ट्री की मदद से न केवल किसानों को फसलों का उचित दाम (MSP) और वित्तीय किस्तें समय पर मिलना सुनिश्चित होगा, बल्कि इससे सरकारी स्तर पर कृषि नियोजन (Agriculture Planning) को भी नई मजबूती मिलेगी।
फसल नुकसान की स्थिति में मिलने वाली आपदा राहत राशि (कृषि मुआवजा) और फसल बीमा के दावों का निपटारा भी इस डेटाबेस के माध्यम से बेहद तेज गति से, सीधे किसानों के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए किया जा सकेगा। विभाग ने सभी सीएससी केंद्रों को इस पंजीकरण अभियान को सर्वोच्च प्राथमिकता पर पूरा करने के निर्देश जारी कर दिए हैं।