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“आईटी दिग्गज कॉग्निजेंट अपने ‘प्रोजेक्ट लीप’ के तहत 12,000 से 15,000 कर्मचारियों की छंटनी करने की योजना बना रही है। इस कटौती का सबसे बड़ा असर भारत पर पड़ेगा जहाँ कंपनी का 70% वर्कफोर्स काम करता है। जानें प्रोजेक्ट लीप की पूरी जानकारी।”
कॉग्निजेंट में बड़ी छंटनी की तैयारी: ‘प्रोजेक्ट लीप’ के तहत 15,000 कर्मचारियों पर गिर सकती है गाज, भारत में सबसे ज्यादा असर
आईटी सेवा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी कॉग्निजेंट (Cognizant) से एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आ रही है। मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी अपने नए घोषित ‘प्रोजेक्ट लीप’ (Project Leap) के तहत दुनिया भर में अपने वर्कफोर्स के एक बड़े हिस्से, लगभग 12,000 से 15,000 कर्मचारियों की छंटनी करने पर विचार कर रही है। चूंकि कॉग्निजेंट के कुल वर्कफोर्स का 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा भारत में कार्यरत है, इसलिए इस छंटनी का सबसे बड़ा और सीधा प्रहार भारतीय आईटी पेशेवरों पर होने की संभावना है।
क्या है ‘प्रोजेक्ट लीप’ और इसके पीछे का उद्देश्य?
कॉग्निजेंट ने ‘प्रोजेक्ट लीप’ को एक ऐसे कार्यक्रम के रूप में पेश किया है जिसका उद्देश्य कंपनी के संचालन मॉडल (Operating Model) को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप ढालना है। कंपनी के अनुसार, इस पहल का लक्ष्य निम्नलिखित क्षेत्रों में निवेश के लिए धन जुटाना है:
- एआई और एकीकृत पेशकश (AI Capabilities): आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नई तकनीकों में निवेश बढ़ाना ताकि कंपनी प्रतिस्पर्धी बनी रहे।
- उत्पादकता में सुधार: परिचालन लागत को कम करना और कार्यक्षमता को बढ़ाना।
- अपस्किलिंग (Upskilling): अपने मौजूदा वर्कफोर्स को नई और उभरती हुई तकनीकों के लिए प्रशिक्षित करना।
हालांकि, कंपनी का कहना है कि यह एक “परिवर्तनकारी” कदम है, लेकिन वास्तविकता यह है कि इस निवेश के लिए फंड जुटाने का मुख्य जरिया कर्मचारियों की संख्या में कटौती और लागत नियंत्रण को बनाया जा रहा है।
भारत में छंटनी की आशंका क्यों है सबसे ज्यादा?
कॉग्निजेंट के लिए भारत हमेशा से ही उसका सबसे बड़ा वैश्विक हब रहा है। कंपनी के लगभग 2.5 लाख से अधिक कर्मचारी भारत के विभिन्न शहरों जैसे चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे में स्थित हैं। ‘प्रोजेक्ट लीप’ के तहत होने वाली कटौती का बड़ा हिस्सा उन भूमिकाओं पर केंद्रित हो सकता है जो अब एआई या ऑटोमेशन के कारण अनावश्यक हो गई हैं। आईटी सेक्टर के जानकारों का मानना है कि मिड-लेवल और सीनियर मैनेजमेंट की भूमिकाओं पर इसका सबसे अधिक प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि कंपनियां अब ‘लीन’ (Lean) स्ट्रक्चर की ओर बढ़ रही हैं।
आईटी सेक्टर में बदलती तकनीक का प्रभाव
कॉग्निजेंट की यह घोषणा अकेले नहीं है। वैश्विक स्तर पर कई आईटी कंपनियां जेनेरेटिव एआई (Generative AI) के आने के बाद अपनी कार्यबल रणनीति को बदल रही हैं। ‘प्रोजेक्ट लीप’ का नाम ही इस बात का संकेत है कि कंपनी भविष्य की ओर एक लंबी छलांग लगाना चाहती है, जहाँ मानव श्रम की तुलना में डिजिटल क्षमताओं का महत्व अधिक होगा। विडंबना यह है कि जहाँ एक ओर कंपनी ‘अपस्किलिंग’ की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर हजारों नौकरियों पर तलवार लटक रही है।
कर्मचारियों के लिए अनिश्चितता का दौर
छंटनी की यह खबरें ऐसे समय में आई हैं जब वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी की आशंकाएं बनी हुई हैं और आईटी पेशेवरों के लिए नई नौकरियों के अवसर भी सीमित हो रहे हैं। कॉग्निजेंट का यह कदम भारतीय आईटी उद्योग के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर सकता है। कर्मचारियों के बीच अब इस बात को लेकर डर और अनिश्चितता का माहौल है कि ‘प्रोजेक्ट लीप’ उनके करियर की छलांग होगी या उनके रोजगार के अंत का कारण बनेगी। आने वाले हफ्तों में कंपनी की ओर से आधिकारिक स्पष्टीकरण और छंटनी के सटीक आंकड़ों का इंतजार रहेगा।
एआई (AI) बनाम रोजगार: बदलती वर्कप्लेस संस्कृति
विशेषज्ञों का मानना है कि कॉग्निजेंट का ‘प्रोजेक्ट लीप’ महज एक लागत कटौती का उपाय नहीं है, बल्कि यह इस बात का संकेत है कि भविष्य में आईटी क्षेत्र की वर्कप्लेस संस्कृति कैसी होगी। जैसे-जैसे कंपनियां एआई-फर्स्ट रणनीति की ओर बढ़ रही हैं, पारंपरिक कोडिंग और डेटा एंट्री जैसी भूमिकाओं पर खतरा बढ़ गया है। यह छंटनी भारतीय आईटी पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक ‘वेक-अप कॉल’ है, जो यह दर्शाती है कि केवल तकनीकी डिग्री अब नौकरी की सुरक्षा की गारंटी नहीं है। अब समय आ गया है कि पेशेवर अपनी स्किल्स को जेनेरेटिव एआई और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसी उन्नत विधाओं में तेजी से अपग्रेड करें। कॉग्निजेंट का यह कदम संभवतः अन्य आईटी दिग्गजों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है, जिससे आने वाले समय में पूरे क्षेत्र में पुनर्गठन की एक नई लहर देखने को मिल सकती है।