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हरियाणा सरकार ने औद्योगिक नीति में बदलाव कर ट्रांसपोर्ट जोन में 25% इंडस्ट्रियल कॉलोनी की मंजूरी दी। निवेशकों को ईडीसी में राहत और एग्रीकल्चर जोन के लिए नए बुनियादी ढांचा नियम लागू।
हरियाणा की नई इंडस्ट्रियल लाइसेंसिंग पॉलिसी: औद्योगिक विकास को मिलेगी नई रफ़्तार
हरियाणा सरकार ने राज्य में औद्योगिक इकोसिस्टम को मजबूत करने और निवेश को आकर्षित करने के लिए अपनी इंडस्ट्रियल लाइसेंसिंग पॉलिसी में बड़े बदलावों को मंजूरी दी है। इस नई नीति के तहत, अब राज्य के ट्रांसपोर्ट और कम्युनिकेशन जोन में 25 प्रतिशत तक औद्योगिक कॉलोनियों को विकसित करने की अनुमति दी जाएगी। सरकार का यह कदम लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी के लिहाज से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उद्योगों की स्थापना को सुगम बनाएगा, जिससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे बल्कि राज्य के राजस्व में भी वृद्धि होगी।
एग्रीकल्चर जोन के लिए बुनियादी ढांचा शुल्क और नए नियम
कृषि क्षेत्रों (Agriculture Zones) में औद्योगिक विस्तार को विनियमित करने के लिए सरकार ने बुनियादी ढांचा लागत (Infrastructure Cost) से संबंधित एक नया नियम लागू किया है। इसके अनुसार, यदि कोई डेवलपर शहरी सीमा (Urban Limit) से 500 मीटर की दूरी के बाहर एग्रीकल्चर जोन में इंडस्ट्रियल लाइसेंस लेता है, तो वहां सड़क, बिजली और पानी जैसे आवश्यक बुनियादी ढांचे को तैयार करने की पूरी लागत संबंधित डेवलपर से ही वसूल की जाएगी। यह नियम सुनिश्चित करेगा कि शहरी सीमाओं से दूर विकसित होने वाले औद्योगिक क्षेत्रों में विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध हों और सरकारी खजाने पर इसका अतिरिक्त भार न पड़े।
निवेशकों को प्रोत्साहन: ईडीसी (EDC) दरों में बड़ी राहत
औद्योगिक क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने और छोटे-बड़े निवेशकों को आर्थिक राहत प्रदान करने के लिए हरियाणा सरकार ने बाह्य विकास शुल्क (External Development Charges – EDC) के नियमों में भी ढील दी है। ईडीसी की दरों में दी गई यह राहत डेवलपर्स के लिए शुरुआती पूंजी निवेश के बोझ को कम करेगी, जिससे औद्योगिक प्रोजेक्ट्स की लागत घटेगी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में सरकार का लक्ष्य “ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस” को जमीनी स्तर पर लागू करना है, ताकि हरियाणा देश के प्रमुख औद्योगिक हब के रूप में अपनी स्थिति को और मजबूत कर सके।