हरियाणा की सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री श्रुति चौधरी ने विधानसभा में कहा कि नारी शक्ति वंदन विधेयक भारत की मातृशक्ति को नेतृत्व प्रदान करने की प्रतिबद्धता का संदेश है।
हरियाणा विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री श्रीमती श्रुति चौधरी ने नारी शक्ति वंदन विधेयक को लेकर एक महत्वपूर्ण और प्रेरक वक्तव्य दिया। उन्होंने इस विधेयक को महज एक राजनीतिक मुद्दा मानने के बजाय इसे देश और दुनिया के लिए भारत की ‘मातृशक्ति’ के प्रति प्रतिबद्धता का एक सशक्त संदेश बताया। मंत्री ने जोर देकर कहा कि यह विधेयक भारत के विधायी इतिहास में महिलाओं की भूमिका को पुनर्परिभाषित करने वाला एक ऐतिहासिक अवसर था।
राजनीति से परे, समाज को दिशा देने वाला निर्णय
श्रुति चौधरी ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि नारी शक्ति वंदन विधेयक केवल सीटों के आवंटन तक सीमित नहीं था, बल्कि यह इस बात का प्रमाण था कि भारत अपनी महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया और नेतृत्व की मुख्यधारा में लाने के लिए कृतसंकल्प है। उन्होंने कहा:
“नारी शक्ति वंदन विधेयक एक राजनीतिक मुद्दा नहीं था, बल्कि यह दुनिया को एक मजबूत संदेश देने का अवसर था कि भारत अपनी मातृ शक्ति को नेतृत्व में आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।”
33 प्रतिशत आरक्षण: समाज में व्यापक परिवर्तन का सूत्रधार
सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री ने विधेयक के दूरगामी प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिलना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उनके अनुसार, यदि यह विधेयक पूरी तरह क्रियान्वित होता, तो यह हमारे समय के सबसे महत्वपूर्ण विधायी निर्णयों में से एक साबित होता।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से न केवल शासन की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि समाज के हर वर्ग में एक व्यापक और सकारात्मक परिवर्तन आएगा। उन्होंने मातृशक्ति को सशक्त बनाने के इस विजन को विकसित भारत की नींव बताया।