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भजनपुरा आग में स्थानीय लोगों और पड़ोसियों की बहादुरी से 20-25 लोगों की जान बची। सौरभ भारद्वाज ने बताया कि हिंदू ब्राह्मण और मुस्लिम परिवारों की आपसी मदद ने संकट टाला।
भजनपुरा के एक आवासीय मकान में लगी आग के दौरान स्थानीय लोगों और पड़ोसियों की तत्परता और बहादुरी ने कम से कम 20-25 लोगों की जान बचाई। पत्रकार सौरभ भारद्वाज के अनुसार, यह हादसा पालम अग्निकांड की सीख का परिणाम है, जिसमें दमकल विभाग को गद्दे बिछाने की अनुमति न मिलने से लोगों को बचाने में मुश्किलें आई थीं।
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पड़ोसियों की बहादुरी और त्वरित प्रतिक्रिया
सौरभ भारद्वाज ने बताया कि इस आग में सबसे पहले एक हिंदू ब्राह्मण परिवार आगे आया और एक मुस्लिम परिवार को रात 2 बजे सुरक्षित बाहर निकाला। आग की चपेट में आए पांच लोग ऊपर से कूदने के लिए मजबूर हुए, लेकिन नीचे खड़े स्थानीय लोगों ने सूझबूझ और सतर्कता से उन्हें पकड़कर सुरक्षित बचाया।
पालम अग्निकांड में सभी लोगों को बचाया जा सकता था, अगर दमकल विभाग वहाँ लोगों को गद्दे बिछाने देता। इस हादसे के बाद लोगों ने सीख ली और परसों भजनपुरा के एक मकान में लगी आग से लोगों को बचाया जा सका।
इस बिल्डिंग में मुस्लिम परिवार रहता था और उन्हें रात 2 बजे बचाने के लिए एक हिंदू… pic.twitter.com/HDwGLDpvuc
— Aam Aadmi Party Delhi (@AAPDelhi) March 30, 2026
स्थानीय लोगों का सक्रिय योगदान
स्थानीय लोगों ने खुद ही सीढ़ी का इंतज़ाम किया और पूरी सावधानी से लोगों को आग में जलने से बचाया। इस घटना ने दिखाया कि सामूहिक प्रयास और तत्परता किसी भी आपात स्थिति में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
सबक और भविष्य की तैयारी
सौरभ भारद्वाज के अनुसार, यह घटना स्पष्ट करती है कि समुदाय की सक्रिय भागीदारी और आपसी सहयोग संकट की घड़ी में जीवन बचाने में निर्णायक साबित हो सकता है। इस हादसे में स्थानीय लोगों की बहादुरी ने कई जानें बचाकर समाज के लिए मिसाल कायम की।