PM किसान सम्मान निधि: किसानों के सम्मान और कल्याण के समर्पित 12 वर्ष: ‘अन्नदाता’ के जीवन में आया अभूतपूर्व बदलाव

PM किसान सम्मान निधि: किसानों के सम्मान और कल्याण के समर्पित 12 वर्ष: 'अन्नदाता' के जीवन में आया अभूतपूर्व बदलाव

 

मोदी सरकार के 12 वर्षों में किसानों के लिए PM किसान सम्मान निधि, MSP, और फसल बीमा जैसी योजनाओं से कैसे आया बड़ा बदलाव? जानें कृषि क्षेत्र की प्रमुख उपलब्धियां।

केंद्र सरकार के 12 वर्षों के कार्यकाल को ‘किसान कल्याण और समृद्धि’ का स्वर्णिम युग माना जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीते 12 वर्षों में भारतीय कृषि क्षेत्र में न केवल तकनीक का समावेश हुआ है, बल्कि ‘बीज से बाजार तक’ किसान को केंद्र में रखकर बनाई गई नीतियों ने करोड़ों अन्नदाताओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाया है।

किसान सशक्तिकरण के 4 मुख्य स्तंभ

पिछले 12 वर्षों में सरकार ने कृषि और किसानों के उत्थान के लिए कई दूरदर्शी कदम उठाए हैं, जिन्होंने खेती को लाभकारी और सुरक्षित बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है:

पीएम-किसान सम्मान निधि (PM-Kisan Samman Nidhi): यह योजना किसानों की छोटी-मोटी जरूरतों को पूरा करने के लिए एक बड़ा आर्थिक सहारा बनी है। इस योजना के तहत 9.5 करोड़ से अधिक किसान परिवारों के खातों में 4.3 लाख करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि सीधे डीबीटी (DBT) के माध्यम से हस्तांतरित की गई है।

  • न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में ऐतिहासिक वृद्धि: किसानों को उनकी उपज का सही दाम दिलाने के लिए सरकार ने MSP को लागत का 1.5 गुना सुनिश्चित किया है। बीते 12 वर्षों में फसलों की खरीद पर 26 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है, जिससे किसानों को बाजार के उतार-चढ़ाव से सुरक्षा मिली है।
  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना: प्राकृतिक आपदाओं के कारण फसल को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए यह योजना एक ढाल बनकर उभरी है। अब तक करोड़ों किसानों को 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक का बीमा क्लेम मिल चुका है।
  • किसान क्रेडिट कार्ड (KCC): खेती के लिए सस्ती दरों पर ऋण उपलब्ध कराने में KCC ने क्रांतिकारी बदलाव किया है। आज 8 करोड़ से अधिक किसान इस सुविधा से जुड़े हैं, जिससे वे साहूकारों के चंगुल से मुक्त होकर सम्मानजनक खेती कर पा रहे हैं।

कृषि में तकनीक और आत्मनिर्भरता का नया अध्याय

पिछले 12 वर्षों में कृषि क्षेत्र ने न केवल आत्मनिर्भरता हासिल की है, बल्कि उत्पादन के नए कीर्तिमान भी स्थापित किए हैं। खाद्यान्न उत्पादन 265 मिलियन टन (2013-14) से बढ़कर 358 मिलियन टन (2024-25) तक पहुँच गया है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड (Soil Health Cards) जैसी पहल ने मिट्टी की उर्वरता को समझने में मदद की है, तो वहीं ई-नाम (e-NAM) जैसे डिजिटल प्लेटफार्मों ने किसानों को बिचौलियों से मुक्त कर सीधे राष्ट्रीय बाजार से जोड़ा है।

‘किसान समृद्धि से राष्ट्र समृद्धि’ का संकल्प लेकर चल रही सरकार ने न केवल सिंचाई के लिए ‘प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना’ शुरू की, बल्कि बागवानी, जैविक खेती और मोटे अनाज (श्री अन्न) को बढ़ावा देकर भारतीय कृषि को वैश्विक पहचान दिलाई है। आज का अन्नदाता केवल उत्पादक ही नहीं, बल्कि देश की आर्थिक प्रगति का मुख्य सारथी बन चुका है।

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