नदीय मत्स्य संसाधनों के संरक्षण को बढ़ावा मंडी जिला की नदियों में 1.33 लाख मत्स्य अंगुलिकाओं का संचयन

नदीय मत्स्य संसाधनों के संरक्षण को बढ़ावा
मंडी जिला की नदियों में 1.33 लाख मत्स्य अंगुलिकाओं का संचयन

मंडी, 15 अक्तूबर। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत आज मत्स्य पालन विभाग हिमाचल प्रदेश द्वारा मंडी जिले में नदीय मत्स्य पालन कार्यक्रम  आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में 80 से 100 मिलीमीटर लंबाई वाली लगभग 1.33 लाख मत्स्य अंगुलिकाओं का संचयन किया गया। संचयन का कार्य मंडी की विभिन्न जलधाराओं में स्वदेशी प्रजातियों जैसे रोहू, मृगल  के संरक्षण व उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया।

सहायक निदेशक मत्स्य मंडल मंडी  नीतू सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि इस कार्यक्रम के तहत जडोल क्षेत्र की अलसेड़ खड्ड में 16,000, चक्कर ब्रिज के नीचे सुकेती खड्ड में 29,000 और व्यास नदी  मंडी में 88,000 अंगुलिकायं छोड़ी गईं। यह संचयन कार्य मत्स्य मंडल मंडी द्वारा गुरुवार को किया गया। इस अवसर पर ग्राम पंचायत जडोल की प्रधान  अमरावती, वार्ड सदस्य रवि कुमार, कॉर्प फार्म अल्सू के मत्स्य अधिकारी राकेश कुमार, विभागीय कर्मचारी तथा स्थानीय लोग उपस्थित रहे। उन्होंने बताया कि इन अंगुलिकाओं का उत्पादन सरकारी कॉर्प बीज फार्म अल्सू में किया गया था।

श्रीमती नीतू सिंह ने कहा कि मत्स्य अंगुलिकाओं के संचयन का मुख्य उद्देश्य नदीय मत्स्य उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ाना है ताकि मत्स्य व्यवसाय से जुड़े मछुआरों की आय में वृद्धि हो सके। इस कार्यक्रम से स्थानीय जल स्रोतों में स्वदेशी प्रजातियों की पुनःस्थापना होगी, जिससे पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने और जैव विविधता के संरक्षण में सहायता मिलेगी।

उन्होंने कहा कि मत्स्य विभाग का प्रयास है कि मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ मत्स्य पालक वर्ग की आजीविका और सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार लाया जा सके। नदीय मत्स्य संसाधनों के संरक्षण की दिशा में यह कार्यक्रम एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होगा।

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