जिले में पराली जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए ग्राम स्तरीय टास्क फोर्स गठित की जाएगी: डिप्टी कमिश्नर

जिले में पराली जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए ग्राम स्तरीय टास्क फोर्स गठित की जाएगी: डिप्टी कमिश्नर

डिप्टी कमिश्नर और पुलिस कमिश्नर ने जालंधर में पराली जलाने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने के लिए उठाए गए कदमों की समीक्षा की

कहा, किसान फसल अवशेष प्रबंधन के लिए आई-खेत ऐप पर मशीनरी की उपलब्धता कर सकते है चेक

खेतों में आग लगने की घटनाओं पर कड़ी नज़र रखने के लिए क्लस्टर अधिकारी भी किए नियुक्त

जालंधर, 21 जुलाई: डिप्टी कमिश्नर डा. हिमांशु अग्रवाल ने सोमवार को जिले में पराली जलाने की प्रवृत्ति पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए ग्राम स्तरीय टास्क फोर्स के गठन के आदेश दिए। उन्होंने कहा कि यह टास्क फोर्स जमीनी स्तर पर सभी आवश्यक कदम उठाएगी।

डिप्टी कमिश्नर ने पुलिस कमिश्नर धनप्रीत कौर के साथ आगामी धान के मौसम में जिले में पराली जलाने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने के लिए उठाए जा रहे कदमों की समीक्षा की। उन्होंने किसानों से पराली न जलाने की अपील की क्योंकि आग से निकलने वाला धुआँ लोगों की परेशानी बढ़ा सकता है।

यहां जिला प्रशासकीय परिसर में संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक की अध्यक्षता करते हुए डिप्टी कमिश्नर ने कहा कि जिला प्रशासन इस समस्या से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए बहुआयामी रणनीति अपनाएगा ताकि खेतों में आग लगने की घटनाओं को रोका जा सके।

डा.अग्रवाल ने आई-खेत मोबाइल ऐप को एक क्रांतिकारी कदम बताते हुए कहा कि किसान इसके माध्यम से ब्लॉक स्तर पर मशीनरी की उपलब्धता की जांच कर सकते है। उन्होंने कहा कि जिले में सुपर सीडर, मल्चर, आर.एम.बी. प्लो, हैप्पी सीडर, सुपर एस.एम.एस सहित बड़ी संख्या में मशीनें उपलब्ध हैं, जिन्हें आई-खेत ऐप के माध्यम से देखा जा सकता है।

पराली जलाने के लिहाज से संवेदनशील स्थानों (हॉट स्पॉट) की समय पर पहचान की आवश्यकता पर बल देते हुए, डिप्टी कमिश्नर ने ऐसी घटनाओं पर तुरंत कार्रवाई करने के लिए विभिन्न क्लस्टरअधिकारियों को नियुक्त किया। उन्होंने हॉट स्पॉट वाले गांवों में किसानों की निगरानी और जागरूकता के उपायों पर भी चर्चा की। डिप्टी कमिश्नर ने कहा कि जिले में पराली जलाने की प्रवृत्ति को रोकने के लिए जागरूकता अभियान से लेकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई तक बहुआयामी रणनीति अपनाई जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को खेतों में आग लगने की घटनाओं पर कड़ी नज़र रखने और प्रत्येक घटना की मौके पर जाँच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

डा.अग्रवाल ने एस.डी.एम को निर्देश दिए कि वे सभी कंबाइनों में सुपर एस.एम.एस. तकनीक सुनिश्चित करें और इन निर्देशों का पालन न करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। उन्होंने पर्यावरण क्षतिपूर्ति के लंबित मामलों की वसूली की भी समीक्षा की और अधिकारियों को डिफॉल्टरो से रिकवरी में तेजी लाने के साथ-साथ राजस्व रिकॉर्ड में लाल एंट्री करने के निर्देश दिए।

डिप्टी कमिश्नर ने सभी हितधारकों से ऐसे मामलों पर अंकुश लगाने के लिए समन्वित तरीके से निवारक उपायों को लागू करने की अपील की। उन्होंने कृषि विभाग को पिछले वर्ष शुरू की गई पर्यावरण संरक्षण योजना को आगे बढ़ाने के लिए कहा। इस योजना के तहत, पराली जलाने की प्रवृत्ति छोड़ने वाले प्रगतिशील किसानों को प्रशासन द्वारा सम्मानित किया जाता है। इन प्रगतिशील किसानों को सरकारी दफ्तरों में उनके काम के लिए प्राथमिकता भी मिलती है और प्रगतिशील पंचायतों को विकास कार्यों के लिए ग्रांट भी मिलती है।

बैठक को संबोधित करते हुए पुलिस कमिश्नर धनप्रीत कौर ने कहा कि पराली जलाने की घटना की सूचना मिलने पर संबंधित क्लस्टर अधिकारियों द्वारा एफ.आई.आर. दर्ज की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि कानूनी कार्रवाई का उद्देश्य इस प्रवृत्ति को रोकने के लिए निवारक उपाय करना है।

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