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शाहिद कपूर और कृति सनोन की फिल्म ‘कॉकटेल 2’ का गाना ‘माशूका’ विवादों में। नेटिजन्स ने 1993 के इटालियन गाने से कॉपी करने का लगाया आरोप।
कॉकटेल 2′ और ‘माशूका’: बॉलीवुड में कॉपी-पेस्ट विवाद और संगीत की दुनिया
फिल्मों में संगीत का जादू दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में सबसे बड़ी भूमिका निभाता है। साल 2026 की बहुप्रतीक्षित फिल्मों में से एक ‘कॉकटेल 2’ इन दिनों अपने गानों को लेकर चर्चा में है। होमी अदजानिया द्वारा निर्देशित इस फिल्म में शाहिद कपूर, रश्मिका मंदाना और कृति सनोन की फ्रेश तिकड़ी नजर आने वाली है। फिल्म का बहुप्रतीक्षित गाना ‘माशूका’ हाल ही में रिलीज हुआ है, जिसमें शाहिद और कृति की सिजलिंग केमिस्ट्री ने प्रशंसकों का दिल जीत लिया है। लेकिन, रिलीज के कुछ ही समय बाद यह गाना विवादों के घेरे में आ गया है। सोशल मीडिया और विशेष रूप से रेडिट पर इस गाने की धुन को लेकर ‘कॉपी’ (नकल) होने के आरोप लग रहे हैं।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस: ‘माशूका’ बनाम 1993 का इटालियन गाना
विवाद की शुरुआत तब हुई जब एक रेडिट उपयोगकर्ता ने ‘माशूका’ के कुछ अंशों को 1993 के एक पुराने इटालियन गाने ‘से सो अरुबते ए नोना’ (Se So Arrubate A Nonna) के साथ साझा किया। इस तुलनात्मक वीडियो ने इंटरनेट पर आग की तरह फैलकर एक नई बहस को जन्म दे दिया। उपयोगकर्ताओं ने दोनों गानों की धुनों में चौंकाने वाली समानताएं होने का दावा किया। यह मुद्दा इतना गरमा गया कि लोग संगीतकार प्रीतम के काम पर सवाल उठाने लगे।
टिप्पणी अनुभाग में उपयोगकर्ताओं की मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। जहां कुछ ने इसे “बॉलीवुड की पुरानी आदत” करार दिया, वहीं कुछ ने व्यंग्यात्मक लहजे में अपनी बात रखी। एक यूजर ने तंज कसते हुए लिखा, “चोरी करके भी डल गाना बनाया प्रीतम ने।” वहीं एक अन्य यूजर ने इसे एक अजीब तरीके से सामान्य बताते हुए कहा, “प्रीतम का धुनें उठाना… मुझे यह सुकून देने वाला लगता है कि दुनिया कितनी तेजी से बदल रही है।” इन टिप्पणियों ने यह साफ कर दिया कि आज का जागरूक दर्शक न केवल संगीत का आनंद लेता है, बल्कि उसकी जड़ों और मौलिकता पर भी कड़ी नजर रखता है।
बॉलीवुड और ‘कॉपी’ का पुराना रिश्ता
यह कोई पहला मौका नहीं है जब बॉलीवुड के किसी गाने पर विदेशी धुन की नकल करने का आरोप लगा हो। दशकों से, भारतीय फिल्म उद्योग पर विश्व संगीत से ‘प्रेरणा’ लेने के आरोप लगते रहे हैं। संगीतकारों का तर्क अक्सर यह होता है कि वे किसी धुन को नया आयाम दे रहे हैं, लेकिन श्रोताओं के लिए यह ‘कॉपी’ और ‘क्रिएटिविटी’ के बीच की एक धुंधली रेखा है। डिजिटल युग में, जहाँ यूट्यूब और ग्लोबल म्यूजिक प्लेटफॉर्म्स ने दुनिया को एक कर दिया है, किसी भी पुरानी धुन को ढूंढ निकालना अब बहुत आसान हो गया है। इसीलिए, अब नकल करना पहले के मुकाबले बहुत मुश्किल हो गया है।
संगीतकार बनाम श्रोता: मौलिकता की तलाश
फिल्म ‘कॉकटेल 2’ के साथ उम्मीदें बहुत अधिक हैं। ‘कॉकटेल’ (2012) का संगीत आज भी लोगों की प्लेलिस्ट का हिस्सा है, इसलिए सीक्वल से उसी स्तर के संगीत की अपेक्षा करना स्वाभाविक है। जब एक प्रशंसक ‘कॉकटेल’ जैसे प्रतिष्ठित ब्रांड से जुड़ा होता है, तो वह मौलिक संगीत की उम्मीद करता है। विवादों के बावजूद, फिल्म के निर्माताओं या संगीतकार की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
आज का दौर सोशल मीडिया का है, जहां ‘कॉकटेल 2’ जैसी फिल्मों के प्रमोशन के लिए इंटरनेट ही सबसे बड़ा मंच है। लेकिन यही मंच फिल्म की छोटी-छोटी खामियों को उजागर करने में भी देरी नहीं करता। जहाँ शाहिद और कृति की केमिस्ट्री गाने को ‘विजुअल ट्रीट’ बना रही है, वहीं संगीत पर लगे ये आरोप फिल्म के माहौल पर असर डाल सकते हैं। क्या प्रीतम का यह संगीत वाकई नकल है या महज एक इत्तेफाक? यह सवाल आज संगीत प्रेमियों के बीच बहस का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
आगे का रास्ता
अंत में, यह विवाद इस बात की याद दिलाता है कि दर्शक अब कितने सतर्क हैं। फिल्म जगत को यह समझने की जरूरत है कि ‘प्रेरणा’ और ‘नकल’ के बीच एक बारीक फर्क होता है। हालांकि बॉलीवुड में धुनों का आदान-प्रदान कोई नई बात नहीं है, लेकिन प्रशंसकों का भरोसा बनाए रखने के लिए मौलिकता ही एकमात्र रास्ता है। ‘कॉकटेल 2’ एक बड़े बजट की फिल्म है और इसकी सफलता में संगीत का बड़ा हाथ होगा। उम्मीद है कि फिल्म के बाकी गाने और फिल्म का संपूर्ण संगीत दर्शकों को निराश नहीं करेगा। यह पूरा एपिसोड हमें यह सिखाता है कि इंटरनेट के युग में सच छिपता नहीं है, और एक कलाकार के रूप में जिम्मेदारी और रचनात्मकता का संतुलन बनाए रखना ही दीर्घकालिक सफलता की कुंजी है।