किसानों को धान की बीमारियों की रोकथाम के उपाय बताए
किसानों को धान की बीमारियों की रोकथाम के उपाय बताए
–किसानों को टिकाऊ खेती के लिए किया प्रेरित, एफएओ के सहयोग से प्रशिक्षण शिविर आयोजित
पटियाला, 1 जुलाई:
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन के सहयोग से जीईएफ-7 परियोजना के अंतर्गत पटियाला के ब्लॉक सनौर स्थित गांव भानरी में धान की सीधी बिजाई को बढ़ावा देने और सतत कृषि तकनीकों पर एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को धान की उत्पादकता बढ़ाने और मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने हेतु वैज्ञानिक और टिकाऊ खेती के तरीकों से अवगत कराना था।
डॉ. हरदीप सिंह सबीखी, डिप्टी डायरेक्टर (प्रशिक्षण), ने धान की फसल में कीटों और बीमारियों की समय पर पहचान एवं रोकथाम के वैज्ञानिक उपाय साझा किए। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे कृषि विशेषज्ञों से संपर्क में रहें और कृषि साहित्य का अध्ययन करके जानकारी को बढ़ाएं।
डॉ. गुरप्रीत सिंह, सहायक प्रोफेसर (फसल विज्ञान), ने मिट्टी और पानी की जांच के महत्व पर जोर देते हुए उर्वरक और सिंचाई के संतुलित उपयोग के लिए किसानों को प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि खरपतवार नियंत्रण के लिए खरपतवारनाशकों का समय पर, उचित मात्रा और सही विधि से प्रयोग करना आवश्यक है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के बाद प्रतिभागियों को सीधी बिजाई के तहत विकसित प्रदर्शन प्लॉटों का भी दौरा करवाया गया, जहां उन्हें व्यावहारिक जानकारी प्रदान की गई।
इस मौके पर क्षेत्र के प्रगतिशील किसानों – गुरिंदर सिंह, हरविंदर सिंह, नरिंदरपाल सिंह, बलजिंदर सिंह, रमनदीप सिंह और प्रदीप सिंह ने कृषि वैज्ञानिकों की टीम का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रम किसानों को उन्नत खेती की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
-किसानों को टिकाऊ खेती के लिए किया प्रेरित, एफएओ के सहयोग से प्रशिक्षण शिविर आयोजित
पटियाला, 1 जुलाई:
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन के सहयोग से जीईएफ-7 परियोजना के अंतर्गत पटियाला के ब्लॉक सनौर स्थित गांव भानरी में धान की सीधी बिजाई को बढ़ावा देने और सतत कृषि तकनीकों पर एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को धान की उत्पादकता बढ़ाने और मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने हेतु वैज्ञानिक और टिकाऊ खेती के तरीकों से अवगत कराना था।
डॉ. हरदीप सिंह सबीखी, डिप्टी डायरेक्टर (प्रशिक्षण), ने धान की फसल में कीटों और बीमारियों की समय पर पहचान एवं रोकथाम के वैज्ञानिक उपाय साझा किए। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे कृषि विशेषज्ञों से संपर्क में रहें और कृषि साहित्य का अध्ययन करके जानकारी को बढ़ाएं।
डॉ. गुरप्रीत सिंह, सहायक प्रोफेसर (फसल विज्ञान), ने मिट्टी और पानी की जांच के महत्व पर जोर देते हुए उर्वरक और सिंचाई के संतुलित उपयोग के लिए किसानों को प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि खरपतवार नियंत्रण के लिए खरपतवारनाशकों का समय पर, उचित मात्रा और सही विधि से प्रयोग करना आवश्यक है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के बाद प्रतिभागियों को सीधी बिजाई के तहत विकसित प्रदर्शन प्लॉटों का भी दौरा करवाया गया, जहां उन्हें व्यावहारिक जानकारी प्रदान की गई।
इस मौके पर क्षेत्र के प्रगतिशील किसानों – गुरिंदर सिंह, हरविंदर सिंह, नरिंदरपाल सिंह, बलजिंदर सिंह, रमनदीप सिंह और प्रदीप सिंह ने कृषि वैज्ञानिकों की टीम का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रम किसानों को उन्नत खेती की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।