जोस्टर इन्फेक्शन क्या है? जानें इसके कारण, लक्षण और बचाव

जोस्टर इन्फेक्शन क्या है? जानें इसके कारण, लक्षण और बचाव

जोस्टर इन्फेक्शन (Shingles) क्या है, इसके कारण, शुरुआती लक्षण और इलाज के तरीके जानें। समय पर पहचान और वैक्सीनेशन से बचाव संभव है।

जोस्टर इन्फेक्शन, जिसे आम भाषा में दाद या शिंगल्स (Herpes Zoster) भी कहा जाता है, एक वायरल संक्रमण है। बदलती लाइफस्टाइल, तनाव और कमजोर इम्यूनिटी के कारण यह संक्रमण तेजी से देखा जा रहा है। बहुत से लोग इसका नाम जानते हैं, लेकिन इसके कारण, लक्षण और इलाज के बारे में पूरी जानकारी नहीं रखते।

जोस्टर इन्फेक्शन के कारण

जोस्टर वेरिसेला-जोस्टर वायरस (Varicella Zoster Virus – VZV) के कारण होता है, वही वायरस जो चिकन पॉक्स (चेचक) का कारण बनता है। जब किसी व्यक्ति को चिकन पॉक्स होता है, तो वायरस पूरी तरह खत्म नहीं होता और नसों में निष्क्रिय अवस्था में रह जाता है। उम्र बढ़ने, तनाव या कमजोर इम्यूनिटी के कारण यह वायरस पुनः सक्रिय होकर जोस्टर का रूप ले लेता है।

जोस्टर इन्फेक्शन के जोखिम कारक

  • कमजोर इम्यून सिस्टम

  • उम्र 50 साल से ऊपर

  • पहले चिकन पॉक्स का होना

  • अधिक तनाव या मानसिक दबाव

  • गंभीर बीमारियां जैसे कैंसर या HIV

  • लंबे समय तक स्टेरॉयड या इम्यूनिटी कम करने वाली दवाएं लेना

  • प्रेगनेंसी

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जोस्टर के शुरुआती लक्षण

जोस्टर के लक्षण धीरे-धीरे दिखाई देते हैं। शुरुआत में व्यक्ति को त्वचा पर जलन, चुभन, तेज दर्द, खुजली, हल्की लालिमा, थकान, बुखार या सिरदर्द जैसे संकेत मिल सकते हैं।
इसके बाद फफोले बनते हैं, जो आमतौर पर कमर, पीठ, छाती, पेट, गर्दन और चेहरे पर एक तरफ दिखाई देते हैं। फफोलों में खुजली और दर्द होता है। 3-4 दिन में फफोले बढ़ते हैं और 7-10 दिन में सूखकर पपड़ी बन जाते हैं।

क्या जोस्टर संक्रामक है?

जोस्टर सीधे व्यक्ति से व्यक्ति में नहीं फैलता, लेकिन इसके फफोलों के तरल से संपर्क होने पर चिकन पॉक्स फैल सकता है, खासकर उन लोगों में जिनको पहले कभी चिकन पॉक्स नहीं हुआ। इसलिए फफोलों को ढककर रखें और बच्चों, प्रेग्नेंट महिलाओं या कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों से दूरी बनाएं।

जोस्टर का इलाज और बचाव

जोस्टर का कभी पूर्ण इलाज संभव नहीं, लेकिन समय पर दवाओं से बीमारी की गंभीरता और अवधि कम की जा सकती है।

  • एंटीवायरल दवाएं

  • दर्द निवारक दवाएं

  • स्किन पर लगाने वाली क्रीम

  • गंभीर मामलों में विशेष दवाएं

बचाव: वैक्सीनेशन सबसे प्रभावी तरीका है। जिनको पहले चिकन पॉक्स हुआ है, वे शिंग्रिक्स वैक्सीन लगवा सकते हैं। 50 साल से ऊपर के लोगों के लिए यह विशेष रूप से फायदेमंद है।

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