पौष पूर्णिमा 2026: इस दिन करें श्रीसूक्त का पाठ और पाएं मां लक्ष्मी का आशीर्वाद

पौष पूर्णिमा 2026: इस दिन करें श्रीसूक्त का पाठ और पाएं मां लक्ष्मी का आशीर्वाद

पौष पूर्णिमा 2026 पर करें श्रीसूक्त का पाठ और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना। जानें इस दिन के महत्व, शुभ समय और लक्ष्मी मंत्रों के लाभ।

पौष पूर्णिमा हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखती है। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व होता है। श्रीसूक्त का पाठ करने से साधक को शांति और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

पौष पूर्णिमा 2026 कब है?

इस वर्ष पौष माह की पूर्णिमा शनिवार, 3 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी। इस दिन चंद्रोदय का समय शाम 5:28 बजे तक रहेगा।

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पौष पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी के मंत्र और पाठ

श्री सूक्त पाठ

ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं, सुवर्णरजतस्त्रजाम् ।

चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं, जातवेदो म आ वह ।।

तां म आ वह जातवेदो, लक्ष्मीमनपगामिनीम् ।

यस्यां हिरण्यं विन्देयं, गामश्वं पुरूषानहम् ।

अश्वपूर्वां रथमध्यां, हस्तिनादप्रमोदिनीम् ।

श्रियं देवीमुप ह्वये, श्रीर्मा देवी जुषताम् ।।

कां सोस्मितां हिरण्यप्राकारामार्द्रां ज्वलन्तीं तृप्तां तर्पयन्तीम् ।

पद्मेस्थितां पद्मवर्णां तामिहोप ह्वये श्रियम् ।।

चन्द्रां प्रभासां यशसा ज्वलन्तीं श्रियं लोके देवजुष्टामुदाराम् ।

तां पद्मिनीमीं शरणं प्र पद्ये अलक्ष्मीर्मे नश्यतां त्वां वृणे ।।

आदित्यवर्णे तपसोऽधि जातो वनस्पतिस्तव वृक्षोऽक्ष बिल्वः ।

तस्य फलानि तपसा नुदन्तु या अन्तरा याश्च बाह्या अलक्ष्मीः ।।

उपैतु मां दैवसखः, कीर्तिश्च मणिना सह ।

प्रादुर्भूतोऽस्मि राष्ट्रेऽस्मिन्, कीर्तिमृद्धिं ददातु मे ।।

क्षुत्पिपासामलां ज्येष्ठामलक्ष्मीं नाशयाम्यहम् ।

अभूतिमसमृद्धिं च, सर्वां निर्णुद मे गृहात् ।।

गन्धद्वारां दुराधर्षां, नित्यपुष्टां करीषिणीम् ।

ईश्वरीं सर्वभूतानां, तामिहोप ह्वये श्रियम् ।।

मनसः काममाकूतिं, वाचः सत्यमशीमहि ।

पशूनां रूपमन्नस्य, मयि श्रीः श्रयतां यशः ।।

कर्दमेन प्रजा भूता मयि सम्भव कर्दम ।

श्रियं वासय मे कुले मातरं पद्ममालिनीम् ।।

आपः सृजन्तु स्निग्धानि चिक्लीत वस मे गृहे ।

नि च देवीं मातरं श्रियं वासय मे कुले ।।

आर्द्रां पुष्करिणीं पुष्टिं पिंगलां पद्ममालिनीम् ।

चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं, जातवेदो म आ वह ।।

आर्द्रां य करिणीं यष्टिं सुवर्णां हेममालिनीम् ।

सूर्यां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आ वह ।।

तां म आ वह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम् ।

यस्यां हिरण्यं प्रभूतं गावो दास्योऽश्वान् विन्देयं पुरुषानहम् ।।

य: शुचि: प्रयतो भूत्वा जुहुयादाज्यमन्वहम् ।

सूक्तं पंचदशर्चं च श्रीकाम: सततं जपेत् ।।

।। इति समाप्ति ।।

मां लक्ष्मी मंत्र

इस दिन पर श्रीसूक्त और लक्ष्मी मंत्रों का जप करने से विशेष लाभ मिलता है। कुछ प्रमुख मंत्र इस प्रकार हैं:

1. श्री लक्ष्मी बीज मंत्र: ॐ श्री ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः।।

2. श्री लक्ष्मी महामंत्र: ॐ श्रीं ल्कीं महालक्ष्मी महालक्ष्मी एह्येहि सर्व सौभाग्यं देहि मे स्वाहा।।

3. लक्ष्मी प्रार्थना मंत्र:

नमस्ते सर्वगेवानां वरदासि हरे: प्रिया।
या गतिस्त्वत्प्रपन्नानां या सा मे भूयात्वदर्चनात्।।

4. श्री लक्ष्मी गायत्री मंत्र: ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥

पौष पूर्णिमा का महत्व

  • इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने से धन-संपत्ति में वृद्धि होती है।

  • श्रीसूक्त का पाठ करने से सुख, समृद्धि और शांति की प्राप्ति होती है।

  • यह दिन विशेष रूप से घर और व्यवसाय में सौभाग्य और ऐश्वर्य लाने के लिए शुभ माना जाता है।

पौष पूर्णिमा पर नियमित पूजा और मंत्र जाप से न केवल आध्यात्मिक लाभ मिलता है, बल्कि घर में सकारात्मक ऊर्जा और खुशहाली बनी रहती है।

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