पंजाब में ‘युद्ध नशों के विरुद्ध’ अभियान के तहत 1,400 प्रिंसिपल-हेडमास्टरों को प्रशिक्षण दिया गया है। 20 हजार शिक्षक और पुलिस अधिकारी भी प्रशिक्षित हो रहे हैं।
पंजाब सरकार की ओर से नशे के खिलाफ चलाए जा रहे ‘युद्ध नशों के विरुद्ध’ अभियान को लेकर स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह ने कहा कि सरकार नशे की समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य पंजाब के हर घर तक नशे के खिलाफ जागरूकता और कार्रवाई का संदेश पहुंचाना है।
नशे के खिलाफ हर घर तक पहुंचेगी मुहिम
स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह के अनुसार, पंजाब सरकार नशे के खिलाफ लड़ाई को केवल कार्रवाई तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इसे जनभागीदारी से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ‘युद्ध नशों के विरुद्ध’ अभियान के जरिए समाज के अलग-अलग वर्गों को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया जा रहा है।
सरकार का फोकस नशे की रोकथाम के साथ-साथ प्रभावित लोगों को उपचार और पुनर्वास की सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग और अन्य संबंधित विभागों के स्तर पर विभिन्न कदम उठाए जा रहे हैं।
सीमावर्ती क्षेत्रों के 1,400 प्रिंसिपल और हेडमास्टर प्रशिक्षित
बलबीर सिंह ने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्रों के 1,400 प्रिंसिपल और हेडमास्टरों को प्रशिक्षण दिया गया है। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य स्कूल स्तर पर नशे की रोकथाम और विद्यार्थियों में जागरूकता बढ़ाने के लिए शिक्षकों की भूमिका को मजबूत करना है।
स्कूलों को नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान का महत्वपूर्ण केंद्र माना जा रहा है। शिक्षकों के जरिए विद्यार्थियों और उनके परिवारों तक नशे से होने वाले नुकसान और इससे बचाव का संदेश पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।
20 हजार शिक्षक और पुलिस अधिकारियों की ट्रेनिंग
स्वास्थ्य मंत्री के मुताबिक, पंजाब में करीब 20,000 शिक्षकों और पुलिस अधिकारियों की ट्रेनिंग भी जारी है। इस प्रशिक्षण के जरिए नशे की समस्या से जुड़े विभिन्न पहलुओं को समझने और इससे निपटने के लिए संबंधित कर्मियों की क्षमता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
शिक्षकों की भूमिका नशे की शुरुआती पहचान और युवाओं में जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण हो सकती है, जबकि पुलिस की भूमिका नशे की तस्करी और आपूर्ति से जुड़े मामलों में कार्रवाई करने की है। सरकार इन दोनों स्तरों पर क्षमता निर्माण को अभियान का हिस्सा बना रही है।
जेलों में OOAT और नशा मुक्ति केंद्र
ਮਾਨ ਸਰਕਾਰ ਵੱਲੋਂ ਸਖ਼ਤ ਮਿਹਨਤ ਸਦਕਾ ਜਾਰੀ ਹੈ – ‘ਯੁੱਧ ਨਸ਼ਿਆਂ ਵਿਰੁੱਧ’
🔸 ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਹਰ ਘਰ ਤੱਕ ਪਹੁੰਚਾਈ ਜਾਵੇਗੀ ਨਸ਼ਿਆਂ ਦੇ ਜੜ੍ਹੋਂ ਖ਼ਾਤਮੇ ਲਈ ਜੰਗ
🔸 ਸਰਹੱਦੀ ਖੇਤਰਾਂ ਦੇ 1,400 ਪ੍ਰਿੰਸੀਪਲ ਤੇ ਹੈੱਡ ਮਾਸਟਰਾਂ ਨੂੰ ਦਿੱਤੀ ਸਿਖਲਾਈ
🔸 20,000 ਅਧਿਆਪਕਾਂ ਅਤੇ ਪੁਲਿਸ ਅਧਿਕਾਰੀਆਂ ਦੀ ਸਿਖਲਾਈ ਜਾਰੀ
🔸 ਜੇਲ੍ਹਾਂ ਵਿੱਚ ਕੀਤੀ… pic.twitter.com/mm7ekHEg82— AAP Punjab (@AAPPunjab) September 17, 2026
पंजाब सरकार ने जेलों में भी उपचार से जुड़ी सुविधाओं को बढ़ाने पर जोर दिया है। बलबीर सिंह ने बताया कि जेलों में OOAT सेंटर और नशा मुक्ति केंद्र स्थापित किए गए हैं।
OOAT यानी Opioid Substitution Therapy का इस्तेमाल ओपिओइड निर्भरता से जूझ रहे लोगों के उपचार में किया जाता है। जेलों में ऐसी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का उद्देश्य जरूरतमंद कैदियों को उपचार की सुविधा देना और उनके पुनर्वास की प्रक्रिया को मजबूत करना है।
रोकथाम के साथ उपचार और पुनर्वास पर जोर
नशे के खिलाफ किसी भी व्यापक अभियान में केवल नशीले पदार्थों की आपूर्ति पर कार्रवाई ही नहीं, बल्कि उपचार, जागरूकता और पुनर्वास भी महत्वपूर्ण पहलू हैं। पंजाब सरकार की ओर से चलाए जा रहे अभियान में इन सभी पहलुओं को शामिल करने की बात कही गई है।
स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह ने कहा कि ‘युद्ध नशों के विरुद्ध’ अभियान के तहत सरकार की कोशिश है कि नशे की समस्या से प्रभावित लोगों को उपचार मिले और युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए जागरूकता बढ़ाई जाए।
जनभागीदारी से मजबूत होगी नशे के खिलाफ लड़ाई
सरकार के अनुसार, नशे के खिलाफ अभियान को सफल बनाने के लिए स्कूलों, परिवारों, स्वास्थ्य संस्थानों, पुलिस और स्थानीय समुदायों की भूमिका अहम है। इसी उद्देश्य से अलग-अलग स्तरों पर प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
बलबीर सिंह के बयान के मुताबिक, पंजाब सरकार नशे के खिलाफ अभियान को लगातार आगे बढ़ा रही है और इसका दायरा राज्य के अलग-अलग हिस्सों तक बढ़ाया जा रहा है। अभियान में रोकथाम, प्रशिक्षण, उपचार और पुनर्वास को साथ लेकर चलने पर जोर दिया जा रहा है।