Wipro Share: इन तीन कारणों से शेयर का मूल्य 6% गिर गया, जो निवेशकों को रास नहीं आया

Wipro Share: इन तीन कारणों से शेयर का मूल्य 6% गिर गया, जो निवेशकों को रास नहीं आया

Wipro Share: जनवरी-मार्च तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 26% बढ़ा है। उस समय, कंपनी ने 3570 करोड़ रुपये का मुनाफा किया था। यह आंकड़ा पिछले साल की समान तिमाही में 2834.6 करोड़ रुपये था। लेकिन आज इसके शेयरों में गिरावट आई है।

Wipro Share: विप्रो, आईटी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी, के शेयरों में आज 17 अप्रैल को बिकवाली होगी। कंपनी के शेयर आज इंट्राडे में करीब 6% गिरकर 232.20 रुपये पर आ गए। FY25 की मार्च तिमाही के नतीजों के बाद निवेशकों का शेयर पर भरोसा घट गया है। कम्पनी का मार्केट कैप आज गिरकर 2.44 लाख करोड़ रुपये पर आ गया है। यहां गिरावट की तीन वजहें बताई गई हैं।

1. Wipro के रेवेन्यू पर दबाव

वास्तव में, एक्सपर्ट्स का मानना है कि Wipro की मांग में कमी के कारण ग्रोथ की संभावनाएं अनिश्चित लगीं। मार्च तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू 1% से अधिक बढ़कर 22504.2 करोड़ रुपये हो गया। यह आंकड़ा पिछले साल की समान तिमाही में 22,208.30 करोड़ रुपये था।

कंपनी का बड़ा हिस्सा, आईटी सर्विस सेगमेंट, गिर गया। तिमाही दर 1.2% और सालाना दर 2.3% से इस सेगमेंट का रेवेन्यू $2596.5 मिलियन रहा। रेवेन्यू में तिमाही आधार पर 0.8% और सालाना आधार पर 1.2% की गिरावट आई। विप्रो का ऑपरेटिंग मार्जिन आईटी सर्विस सेगमेंट में क्रमिक आधार पर 1.1 प्रतिशत अंक बढ़कर 17.5 प्रतिशत हो गया।

किंतु जनवरी-मार्च तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 26% बढ़ा है। उस समय, कंपनी ने 3570 करोड़ रुपये का मुनाफा किया था। यह आंकड़ा पिछले साल की समान तिमाही में 2834.6 करोड़ रुपये था।

2. Q1FY26 में आय घट सकती है

Wipro का आईटी सर्विस कारोबार चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 250.5 करोड़ डॉलर से 255.7 करोड़ डॉलर रहने का अनुमान है। यह पिछली तिमाही से 3.5 प्रतिशत से 1.5 प्रतिशत की गिरावट है।

3. टैरिफ हाइक का Wipro पर भी प्रभाव

विप्रो ने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग और कंज्यूमर क्षेत्रों में मांग टैरिफ से प्रभावित हुई है। इससे कुछ महत्वपूर्ण बदलावों वाले परियोजनाएं रुक गई हैं और ग्राहकों की डिस्क्रीशनरी मांग से कम खर्च हुआ है।

मैनेजमेंट ने, हालांकि, कमजोर निर्देशन का कारण बताया कि ग्राहक खर्च टाल रहे हैं क्योंकि आर्थिक स्थिति में अनिश्चितता है। कंपनी को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2025–26 की दूसरी छमाही (H2FY26) में कुछ बड़े सौदे आगे बढ़ेंगे, इसलिए विकास की रफ्तार पकड़ में आ जाएगी।

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