शेयर बाजार में आज भारी गिरावट: सेंसेक्स 800 अंक टूटा, निफ्टी में 200 अंकों की गिरावट; जानें बाजार गिरने के 5 मुख्य कारण

शेयर बाजार में आज भारी गिरावट: सेंसेक्स 800 अंक टूटा, निफ्टी में 200 अंकों की गिरावट; जानें बाजार गिरने के 5 मुख्य कारण

बुधवार 22 अप्रैल को शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 800 अंक और निफ्टी 200 अंक लुढ़का। जानें मुनाफावसूली, आईटी नतीजों और अमेरिका-ईरान तनाव का बाजार पर असर।

भारतीय शेयर बाजार में पिछले तीन दिनों से जारी तेजी पर बुधवार, 22 अप्रैल 2026 को ब्रेक लग गया। आज के कारोबारी सत्र में बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) और निफ्टी 50 (Nifty 50) में भारी बिकवाली देखी गई। सेंसेक्स करीब 800 अंक यानी 1% से अधिक टूटकर 78,442 के निचले स्तर पर आ गया, वहीं निफ्टी 200 अंक फिसलकर 24,353 के आसपास कारोबार करता नजर आया। हालांकि, मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में हल्की बढ़त के साथ लचीलापन दिखा।

बाजार में आई इस गिरावट के पीछे विशेषज्ञों ने निम्नलिखित 5 प्रमुख कारणों को जिम्मेदार ठहराया है:

1. बैंकिंग और आईटी शेयरों में मुनाफावसूली (Profit Booking)

बाजार की गिरावट का मुख्य नेतृत्व बैंकिंग और आईटी सेक्टर के दिग्गजों ने किया। पिछले तीन सत्रों में 2.3% की बढ़त के बाद आज Nifty Bank में 0.5% से ज्यादा की गिरावट आई। वहीं, Nifty IT करीब 4% तक लुढ़क गया। आईटी शेयरों में गिरावट की बड़ी वजह चौथी तिमाही (Q4) के कमजोर नतीजे और कंपनियों के प्रबंधन द्वारा भविष्य के लिए दी गई सतर्क टिप्पणी रही।

2. अमेरिका-ईरान तनाव और अनिश्चितता

पश्चिम एशिया में जारी अमेरिका-ईरान संघर्ष ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने बातचीत के लिए युद्धविराम (Ceasefire) को आगे बढ़ाया है, लेकिन शांति वार्ता के परिणाम को लेकर अब भी अस्पष्टता बनी हुई है। रिपोर्टों के अनुसार, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का निर्धारित चर्चाओं के लिए न जाना बाजार की अनिश्चितता को और बढ़ा रहा है।

3. कमजोर वैश्विक संकेत (Global Cues)

अमेरिकी बाजार (Wall Street) में कल रात की गिरावट का असर आज एशियाई बाजारों पर भी दिखा। ईरान द्वारा ताजा बातचीत के प्रस्ताव को ठुकराए जाने से वैश्विक भावनाएं प्रभावित हुई हैं। इसके अलावा, मजबूत अमेरिकी डॉलर और बढ़ती बॉन्ड यील्ड भी भारत जैसे उभरते बाजारों पर दबाव बना रही है।

4. कच्चे तेल की ऊंची कीमतें (Crude Oil Prices)

ब्रेंट क्रूड की कीमतें थोड़ी नरम जरूर हुई हैं, लेकिन यह अब भी $95 प्रति बैरल के स्तर से ऊपर बनी हुई हैं। तेल की इन ऊंची कीमतों से मुद्रास्फीति (Inflation) और कंपनियों के मार्जिन पर असर पड़ने का डर है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के विनोद नायर के अनुसार, यदि कच्चे तेल की कीमतें इसी स्तर पर बनी रहीं, तो कंपनियों की कमाई में 2-4% की कटौती हो सकती है।

5. तकनीकी कारक (Technical Factors)

पिछले तीन दिनों में सेंसेक्स करीब 1,285 अंक और निफ्टी 380 अंक चढ़ चुके थे, जिसके कारण बाजार में सुधार की संभावना बनी हुई थी। कोटक सिक्योरिटीज के श्रीकांत चौहान के मुताबिक, निफ्टी के लिए 24,500 एक प्रमुख सपोर्ट लेवल था, जिसके टूटने के बाद बाजार 24,350–24,300 की ओर फिसल गया।

कुल मिलाकर, हालांकि लंबी अवधि का रुझान सकारात्मक बना हुआ है, लेकिन वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिका-ईरान स्थिति के चलते निकट भविष्य में बाजार में उतार-चढ़ाव (Volatility) जारी रहने की संभावना है।

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