अल्ट्रासोनिक थेरेपी क्या है और किन बीमारियों में होती है इस्तेमाल?

अल्ट्रासोनिक थेरेपी क्या है और किन बीमारियों में होती है इस्तेमाल?

अल्ट्रासोनिक थेरेपी क्या है? जानें इससे मांसपेशियों के दर्द, जोड़ों की सूजन, आर्थराइटिस और पुरानी चोटों का इलाज कैसे होता है। फायदे, इस्तेमाल और साइड इफेक्ट्स की पूरी जानकारी पढ़ें।

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अगर आप मांसपेशियों के दर्द, जोड़ों की सूजन या पुरानी चोट से परेशान हैं और दवाइयों से आराम नहीं मिल रहा, तो अल्ट्रासोनिक थेरेपी आपके लिए एक प्रभावी विकल्प हो सकती है। यह नॉन-इनवेसिव फिजियोथेरेपी तकनीक हाई-फ्रीक्वेंसी साउंड वेव्स का उपयोग कर शरीर के ऊतकों को जल्दी ठीक करने में मदद करती है।

अल्ट्रासोनिक थेरेपी कैसे काम करती है?

इस थेरेपी में 0.8 MHz से 3 MHz की अल्ट्रासोनिक तरंगें प्रभावित क्षेत्र में भेजी जाती हैं, जो ब्लड फ्लो बढ़ाकर सूजन और दर्द को कम करती हैं। इसके लिए एक विशेष डिवाइस में ट्रांसड्यूसर हेड त्वचा पर जेल के साथ चलाया जाता है, जिससे तरंगें शरीर की गहराई तक पहुंचकर माइक्रो-मालिश का प्रभाव देती हैं और हीलिंग प्रक्रिया तेज होती है।

कब कराई जाती है अल्ट्रासोनिक थेरेपी?

डॉ. सुधीर यादव, फिजियोथेरेपी विशेषज्ञ के अनुसार, यह थेरेपी तब दी जाती है जब मांसपेशियों में खिंचाव, जोड़ों की सूजन या चोट लंबे समय तक बनी रहती है और दवाओं से राहत नहीं मिलती। यह फिजियोथेरेपी के दौरान दर्द और सूजन कम करने के लिए इस्तेमाल की जाती है।

अल्ट्रासोनिक थेरेपी किन बीमारियों में उपयोगी है?

  1. मांसपेशियों में चोट और खिंचाव

  2. आर्थराइटिस (गठिया) से जोड़ों में दर्द और सूजन

  3. बर्साइटिस और टेंडोनाइटिस जैसी सूजन की स्थिति

  4. स्पाइनल डिस्क की समस्याएं और मांसपेशियों की जकड़न

  5. कार्पल टनल सिंड्रोम में नसों के दबाव और दर्द में राहत

  6. डायबिटिक अल्सर और धीमे भरने वाले घावों का उपचार

क्या हैं अल्ट्रासोनिक थेरेपी के साइड इफेक्ट्स?

अधिक समय या गलत तकनीक से इस्तेमाल पर त्वचा में जलन या ऊतकों को नुकसान हो सकता है। गर्भवती महिलाएं, ट्यूमर वाले मरीज और हार्ट रोगी डॉक्टर की सलाह के बिना इसका उपयोग न करें।

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