क्या है सुपर अल नीनो? जानें इसके कारण और भारत के मानसून व गर्मी पर पड़ने वाला प्रभाव।

क्या है सुपर अल नीनो? जानें इसके कारण और भारत के मानसून व गर्मी पर पड़ने वाला प्रभाव।

सुपर अल नीनो (Super El Niño) जलवायु की एक ऐसी स्थिति है जो दुनिया भर में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी और सूखा लाती है। जानें यह भारत के मानसून को कैसे प्रभावित करता है।

जलवायु परिवर्तन और बढ़ते वैश्विक तापमान के बीच ‘अल नीनो’ शब्द हम अक्सर सुनते हैं, लेकिन जब इसके साथ ‘सुपर’ जुड़ जाता है, तो यह पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों और आम जनता के लिए चिंता का विषय बन जाता है। 2024 से 2026 के बीच दुनिया भर में बढ़ती गर्मी के पीछे इसी ‘सुपर अल नीनो’ का बड़ा हाथ माना जा रहा है।

आइए जानते हैं कि आखिर सुपर अल नीनो क्या है और यह हमारे जीवन को कैसे प्रभावित करता है।

क्या है अल नीनो और यह ‘सुपर’ कैसे बनता है?

अल नीनो (El Niño) एक जलवायु पैटर्न है, जिसकी शुरुआत प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) में होती है। सामान्य परिस्थितियों में, प्रशांत महासागर की सतह का पानी ठंडा होता है, लेकिन अल नीनो के दौरान समुद्र की सतह का तापमान असामान्य रूप से बढ़ जाता है।

  • अल नीनो: जब समुद्र की सतह का तापमान औसत से 0.5°C अधिक बढ़ जाए।
  • सुपर अल नीनो: जब यह तापमान बढ़कर 2.0°C या उससे अधिक हो जाता है, तो इसे ‘सुपर अल नीनो’ की श्रेणी में रखा जाता है। यह स्थिति बहुत दुर्लभ होती है लेकिन इसके परिणाम विनाशकारी हो सकते हैं।

सुपर अल नीनो का दुनिया और भारत पर प्रभाव

जब प्रशांत महासागर इतना गर्म हो जाता है, तो यह वैश्विक वायुमंडल के चक्र को बदल देता है। इसके प्रभाव कुछ इस प्रकार होते हैं:

  • भीषण गर्मी और लू (Heatwaves): सुपर अल नीनो के कारण वैश्विक तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच जाता है। भारत जैसे देशों में मार्च-अप्रैल से ही भीषण गर्मी और ‘लू’ (Heatwaves) का प्रकोप बढ़ जाता है।
  • कमजोर मानसून और सूखा: भारत के लिए यह सबसे चिंताजनक है। अल नीनो अक्सर भारतीय मानसून को कमजोर कर देता है, जिससे बारिश कम होती है और सूखे जैसी स्थिति पैदा हो जाती है। इसका सीधा असर खेती और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
  • समुद्री जीवन को खतरा: समुद्र का तापमान बढ़ने से कोरल रीफ (मूंगा चट्टानें) मरने लगती हैं और मछलियों की संख्या में भारी कमी आती है।
  • दुनिया के अन्य हिस्सों में बाढ़: जहाँ भारत में सूखा पड़ता है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका और पेरू जैसे देशों में अत्यधिक बारिश और बाढ़ आने की संभावना बढ़ जाती है।

क्या सुपर अल नीनो का संबंध ग्लोबल वार्मिंग से है?

वैज्ञानिकों का मानना है कि ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) के कारण अल नीनो की घटनाएं अब अधिक तीव्र और बार-बार हो रही हैं। बढ़ता हुआ कार्बन उत्सर्जन समुद्र को गर्म कर रहा है, जिससे सामान्य अल नीनो अब ‘सुपर अल नीनो’ में तब्दील हो रहा है।

सुपर अल नीनो केवल एक मौसम संबंधी घटना नहीं है, बल्कि यह एक चेतावनी है। यह हमें बताता है कि प्रकृति का संतुलन बिगड़ रहा है। खेती, जल प्रबंधन और आपदा प्रबंधन के लिए इस स्थिति को समझना और पहले से तैयारी करना बेहद जरूरी है।

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