Table of Contents
वासुदेव विनायक चतुर्थी 2026: जानें चैत्र वासुदेव विनायक चतुर्थी का तिथि, पूजा मुहूर्त, व्रत विधि और महत्व। छात्रों व्यापारियों और नए कार्य शुरू करने वालों के लिए विशेष फलदायी व्रत।
वासुदेव विनायक चतुर्थी 2026 इस साल 22 मार्च को मनाई जाएगी। यह व्रत छात्रों, व्यापारियों और नए कार्य शुरू करने वालों के लिए विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों जैसे निर्णयसिन्धु और व्रतराज में इसे सर्वार्थ सिद्धि देने वाला व्रत बताया गया है। कुछ क्षेत्रों में इसे वरद विनायक व्रत के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन विशेष गणेश यंत्र की स्थापना कर पूजा की जाती है।
व्रत का मुहूर्त
-
चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 21 मार्च 2026, रात 11:56
-
चतुर्थी तिथि समाप्त: 22 मार्च 2026, रात 9:16
-
मध्याह्न पूजा मुहूर्त: सुबह 11:15 से दोपहर 01:41
-
वर्जित चंद्र दर्शन समय: सुबह 08:15 से रात 10:15
also read: चैत्र नवरात्रि 2026: चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू,…
व्रत का महत्व
मुद्गलपुराण के अनुसार, जो व्यक्ति चतुर्थी के दिन विधिपूर्वक व्रत करता है, वह सभी कामनाओं की प्राप्ति करता है और जीवन में विघ्नों से मुक्त रहता है।
मुख्य लाभ:
-
जीवन में बाधाएं और विघ्न दूर होते हैं
-
परिवार में सुख-शांति और संतान सुख प्राप्त होता है
-
भगवान गणेश और भगवान विष्णु की कृपा मिलती है
-
कठिन परिस्थितियों से निपटने की शक्ति मिलती है
-
परिवार की सुरक्षा और समृद्धि आती है
व्रत विधि
-
प्रातःकाल स्नान कर शुद्ध वस्त्र पहनें और संकल्प लें
-
पूजा स्थल पर लाल वस्त्र बिछाकर भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित करें
-
दूर्वा, लड्डू, मोदक, सिन्दूर, शमीपत्र और सुपारी अर्पित करें
-
षोडशोपचार पूजन करें और गणपति अथर्वशीर्ष, ऋणहर्ता गणेश स्तोत्र, संकटनाशन गणेश स्तोत्र का पाठ करें
-
व्रत कथा का श्रवण या पाठ करें
-
व्रत का पारण पञ्चमी तिथि को ब्राह्मण के सामने विधिवत् करें
वासुदेव विनायक चतुर्थी 2026 में पूजा और व्रत का सही पालन करने से व्यक्ति के जीवन में सफलता, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा आती है।