Vimal Elaichi के विज्ञापन को लेकर महाराष्ट्र FDA ने सवाल उठाए हैं। Shah Rukh Khan, Ajay Devgn और Tiger Shroff वाले ऐड की जांच में surrogate advertising के पहलू पर नजर है।
टेलीविजन से लेकर YouTube और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर आपने Vimal Elaichi का विज्ञापन जरूर देखा होगा। विज्ञापन में बॉलीवुड के बड़े सितारे शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ नजर आते हैं और अंत में ‘Bolo Jubaan Kesari’ टैगलाइन सुनाई देती है। हालांकि, इस विज्ञापन को सीधे तौर पर इलायची उत्पाद के प्रचार के रूप में पेश किया जाता है, लेकिन अब महाराष्ट्र के Food and Drug Administration (FDA) ने इस विज्ञापन को लेकर सवाल उठाए हैं। विभाग यह जांचना चाहता है कि कहीं इलायची के नाम पर दिखाया जाने वाला यह विज्ञापन अप्रत्यक्ष रूप से उसी ब्रांड के पान मसाला उत्पाद का प्रचार तो नहीं कर रहा।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि तंबाकू और पान मसाला उत्पादों के विज्ञापन को लेकर भारत में लंबे समय से सख्त नियम लागू हैं। ऐसे में किसी दूसरे उत्पाद के जरिए प्रतिबंधित या नियंत्रित उत्पाद की ब्रांड पहचान को बढ़ावा देने की संभावना होने पर नियामक एजेंसियां उस विज्ञापन की जांच कर सकती हैं।
विज्ञापन में नजर आते हैं तीन बड़े बॉलीवुड सितारे
Vimal Elaichi के विज्ञापन की सबसे बड़ी खासियत इसमें नजर आने वाले बॉलीवुड के लोकप्रिय चेहरे हैं। विज्ञापन में शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ एक साथ दिखाई देते हैं। विज्ञापन की प्रस्तुति काफी रंगीन और मनोरंजक अंदाज में की गई है। इसमें कलाकार एक-दूसरे पर केसरिया रंग उड़ाते हुए नजर आते हैं और विज्ञापन के अंत में ब्रांड की पहचान के साथ ‘Bolo Jubaan Kesari’ लाइन आती है।
बॉलीवुड सितारों की लोकप्रियता के कारण इस तरह के विज्ञापन बड़ी संख्या में दर्शकों तक पहुंचते हैं। यही वजह है कि किसी भी ऐसे विज्ञापन को लेकर नियामक स्तर पर सवाल उठने पर उसका प्रभाव काफी व्यापक हो सकता है।
FDA को किस बात पर है आपत्ति?
महाराष्ट्र FDA की चिंता कथित तौर पर इस बात को लेकर है कि विज्ञापन भले ही Vimal Elaichi को प्रमोट करने का दावा करता हो, लेकिन दर्शकों के लिए यह उसी ब्रांड नाम और विजुअल पहचान से जुड़ सकता है जिसका इस्तेमाल पान मसाला उत्पाद के लिए भी किया जाता है। इसे विज्ञापन की भाषा में surrogate advertising यानी अप्रत्यक्ष विज्ञापन के संदर्भ में देखा जा सकता है।
सरल शब्दों में कहें तो यदि किसी ऐसे उत्पाद का सीधे विज्ञापन करना प्रतिबंधित या सीमित है, तो उसी ब्रांड नाम के तहत किसी दूसरे उत्पाद को प्रचारित करके उपभोक्ताओं के बीच मूल उत्पाद की पहचान को मजबूत करना नियामकीय सवाल खड़े कर सकता है। हालांकि, किसी विज्ञापन को वास्तव में नियमों का उल्लंघन माना जाएगा या नहीं, यह संबंधित कानून, विज्ञापन की सामग्री और जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगा।
‘Bolo Jubaan Kesari’ टैगलाइन भी चर्चा में
इस विज्ञापन में इस्तेमाल होने वाली ‘Bolo Jubaan Kesari’ लाइन भी लंबे समय से ब्रांड की पहचान का हिस्सा रही है। इसी वजह से नियामक के लिए यह देखना महत्वपूर्ण हो सकता है कि विज्ञापन दर्शकों को वास्तव में किस उत्पाद या ब्रांड की ओर संकेत करता है।
विज्ञापन में दिखाई देने वाले कलाकारों, रंगों, टैगलाइन और ब्रांड प्रस्तुति का सामूहिक प्रभाव किसी उत्पाद की पहचान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए केवल यह तथ्य कि विज्ञापन में इलायची उत्पाद दिखाया जा रहा है, अपने आप में यह तय नहीं करता कि उसके जरिए किसी दूसरे उत्पाद का अप्रत्यक्ष प्रचार नहीं हो रहा। इसका फैसला विस्तृत जांच के बाद ही किया जा सकता है।
भारत में surrogate advertising पर क्यों होती है नजर?
भारत में तंबाकू और अन्य स्वास्थ्य के लिए हानिकारक उत्पादों के प्रचार को लेकर कई तरह के कानूनी और नियामकीय प्रतिबंध हैं। कंपनियों को ऐसे उत्पादों का विज्ञापन करने की अनुमति नहीं होती जिनका प्रचार कानून के तहत प्रतिबंधित है। इसी वजह से कई बार ऐसे विज्ञापन नियामकों की जांच के दायरे में आ जाते हैं जिनमें ब्रांड का नाम तो दिखाई देता है, लेकिन उत्पाद के रूप में कोई दूसरा सामान दिखाया जाता है।
सरोगेट विज्ञापन का मुद्दा केवल पान मसाला तक सीमित नहीं है। शराब और अन्य प्रतिबंधित या नियंत्रित श्रेणियों के उत्पादों को लेकर भी अतीत में ऐसे विज्ञापनों पर बहस होती रही है। नियामक यह देखते हैं कि विज्ञापन वास्तव में किस उत्पाद को उपभोक्ताओं के सामने स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।
बड़े सितारों की भूमिका पर भी सवाल
इस तरह के विज्ञापनों में बड़े फिल्मी सितारों की मौजूदगी भी चर्चा का विषय बनती है। शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ जैसे लोकप्रिय कलाकारों की बड़ी फैन फॉलोइंग है। जब कोई ब्रांड इन सितारों के साथ विज्ञापन करता है, तो उसकी पहुंच काफी बढ़ जाती है।
हालांकि, किसी विज्ञापन में अभिनेता की मौजूदगी का मतलब यह नहीं है कि संबंधित कलाकार ने किसी नियम का उल्लंघन किया है। यदि नियामक स्तर पर कोई जांच होती है, तो उसमें विज्ञापनदाता, उत्पाद, विज्ञापन की प्रकृति और संबंधित कानूनी प्रावधानों को अलग-अलग देखा जाएगा।
आगे क्या हो सकता है?
महाराष्ट्र FDA की ओर से उठाए गए सवालों के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित विज्ञापन और ब्रांडिंग की जांच किस निष्कर्ष तक पहुंचती है। यदि जांच में यह पाया जाता है कि विज्ञापन किसी प्रतिबंधित उत्पाद को अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा देता है और लागू नियमों का उल्लंघन करता है, तो संबंधित पक्षों के खिलाफ कानूनी या नियामकीय कार्रवाई की संभावना हो सकती है।
फिलहाल, Vimal Elaichi विज्ञापन को लेकर विवाद का केंद्र यही सवाल है कि क्या यह वास्तव में सिर्फ इलायची का विज्ञापन है या इसके जरिए Vimal के पान मसाला ब्रांड की अप्रत्यक्ष ब्रांडिंग की जा रही है? इसका अंतिम जवाब नियामकीय जांच और संबंधित अधिकारियों के निष्कर्षों से ही स्पष्ट होगा। तब तक इस मामले को उठे सवाल और जांच के संदर्भ में देखना उचित होगा।