दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने आपके नेताओं से पूछा कि क्या अरविंद केजरीवाल ने अधिकारियों को सुनीता केजरीवाल को “मैडम CM” कहने का आदेश दिया था?
दिल्ली की राजनीति में एक बार फिर राजनीतिक गतिविधियां चरम पर हैं। बीजेपी और आम आदमी पार्टी (AAP) के बीच इस बार तीखी बहस बढ़ी है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी और सौरभ भारद्वाज के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त की है। वीरेंद्र सचदेवा ने आतिशी और सौरभ के खिलाफ कई प्रश्न उठाए हैं। उनके प्रश्नों ने दिल्ली की राजनीति को और भी गर्म कर दिया है।
दरअसल, आतिशी ने हाल ही में सोशल मीडिया पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और उनके पति पर एक टिप्पणी की, जिसे BJP ने “ओछा तंज” बताया। दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष ने पलटवार करते हुए कुछ कठोर प्रश्न पूछे, जिनमें अरविंद केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल और एक व्यक्ति भूपेंद्र चौबे का उल्लेख था। सचदेवा का कहना है कि आतिशी इन प्रश्नों का उत्तर नहीं दे पाईं और “विदेश” चली गईं।
अब आप नेता सौरभ भारद्वाज ने इस मामले में कूदते हुए बीजेपी पर निशाना साधा, जिससे वीरेंद्र सचदेवा भी नाराज़ हो गए। वीरेंद्र सचदेवा ने कहा, “आतिशी ने जो ओछे सवाल उठाए थे, वही सवाल लेकर सौरभ भारद्वाज सामने आए गए।” दोनों में पार्टी को नियंत्रित करने का संघर्ष चल रहा है।”
BJP ने आपसे दो प्रश्न पूछे हैं।
दिल्ली बीजेपी नेता वीरेंद्र सचदेवा ने सौरभ भारद्वाज से दो प्रश्न पूछे हैं। इनमें से पहले सुनीता केजरीवाल को “मैडम CM” कहा गया क्यों? सचदेवा ने पूछा कि क्या केजरीवाल सरकार के अधिकारियों को सुनीता केजरीवाल को “मैडम CM” कहने का आदेश दिया गया था? अगर यह गलत था, तो केजरीवाल ने ऐसे अधिकारियों को कभी नहीं गिरफ्तार किया?
वीरेंद्र सचदेवा का दूसरा सवाल है कि भूपेंद्र चौबे CM दफ्तर में क्या कर रहे हैं? सचदेवा ने सवाल उठाया कि आतिशी के मुख्यमंत्री कार्यकाल में भूपेंद्र चौबे नाम का व्यक्ति CM दफ्तर या घर में बार-बार क्यों दिखाई देता था? आतिशी के रिश्तेदार हैं क्या? अगर यह सच है, तो वे पूरी तरह से वहाँ क्या कर रहे थे?
रेखा गुप्ता ने वीरेंद्र सचदेवा का दिल जीता
वीरेंद्र सचदेवा ने मौजूदा मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने दिल्लीवासियों का दिल अपनी मेहनत और सेवा से जीता है। रेखा ने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ से तीन बार पीतमपुरा, निगम पार्षद और अब CM तक का सफर तय किया है। उनका कहना था कि जनप्रतिनिधियों के परिवार वालों का अधिकारियों से मिलना आम है और इसमें कोई गलत बात नहीं है।
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