साल 2026 में वरुथिनी एकादशी कब है? जानें वरुथिनी एकादशी की सही तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और व्रत पारण का समय। भगवान विष्णु के वराह अवतार की कृपा पाने के लिए कैसे करें पूजा?
वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को वरुथिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। हिंदू धर्म में इस एकादशी का विशेष महत्व है क्योंकि यह न केवल पापों का नाश करती है, बल्कि व्यक्ति को सौभाग्य और मोक्ष की ओर भी ले जाती है।
यहाँ वरुथिनी एकादशी 2026 की तिथि, शुभ मुहूर्त और इसके महत्व पर विस्तृत लेख दिया गया है:
हिंदू पंचांग के अनुसार, साल भर में आने वाली 24 एकादशियों में वरुथिनी एकादशी को अत्यंत कल्याणकारी माना गया है। ‘वरुथिनी’ शब्द का अर्थ है ‘रक्षा करने वाली’। मान्यता है कि जो व्यक्ति इस दिन पूरी श्रद्धा से भगवान विष्णु के वराह अवतार की पूजा करता है, उसे सभी प्रकार के दुखों और कष्टों से मुक्ति मिलती है और वह विष्णु लोक को प्राप्त करता है।
वरुथिनी एकादशी 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त
साल 2026 में वरुथिनी एकादशी की तिथि को लेकर पंचांग के अनुसार विवरण निम्नलिखित है:
- वरुथिनी एकादशी तिथि: 12 अप्रैल 2026, रविवार।
- एकादशी तिथि प्रारंभ: 12 अप्रैल 2026 को सुबह 03:45 बजे से।
- एकादशी तिथि समाप्त: 13 अप्रैल 2026 को सुबह 05:10 बजे तक।
- व्रत पारण का समय: 13 अप्रैल को दोपहर 01:40 से शाम 04:15 के बीच (पारण हमेशा द्वादशी तिथि में ही किया जाना चाहिए)।
वरुथिनी एकादशी का धार्मिक महत्व
शास्त्रों के अनुसार, वरुथिनी एकादशी का फल कन्यादान के फल के समान माना गया है। पौराणिक कथाओं में वर्णन मिलता है कि भगवान कृष्ण ने स्वयं युधिष्ठिर को इस व्रत की महिमा बताई थी। इस व्रत को करने से व्यक्ति के जन्म-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं और उसे मान-सम्मान व सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। विशेष रूप से, जो लोग वैवाहिक जीवन में सुख चाहते हैं या जिन्हें संतान संबंधी बाधाएं आ रही हैं, उनके लिए यह व्रत रामबाण माना जाता है।
पूजा विधि (Step-by-Step)
- संकल्प: दशमी तिथि की रात्रि से ही सात्विक भोजन करें। एकादशी की सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।
- मूर्ति स्थापना: घर के मंदिर में भगवान विष्णु या उनके वराह अवतार की प्रतिमा स्थापित करें।
- पूजन सामग्री: भगवान को पीले फूल, पीले वस्त्र, अक्षत, धूप और दीप अर्पित करें।
- तुलसी अर्पण: भगवान विष्णु की पूजा बिना तुलसी के अधूरी मानी जाती है। इसलिए उन्हें तुलसी दल जरूर अर्पित करें।
- मंत्र जाप: ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का निरंतर जाप करें।
- वरुथिनी एकादशी कथा: पूजा के बाद इस व्रत की कथा का पाठ करें या श्रवण करें।
- दान: इस दिन अन्न, जल और खड़ाऊ (जूते-चप्पल) का दान करना बहुत शुभ माना जाता है।
वरुथिनी एकादशी पर ध्यान रखने योग्य बातें
एकादशी व्रत के नियम अन्य व्रतों से कड़े होते हैं। इस दिन चावल का सेवन वर्जित है। साथ ही मसूर की दाल, चना, कोदो और शहद का प्रयोग भी नहीं करना चाहिए। इस दिन जुआ खेलना, परनिंदा करना (दूसरों की बुराई) और क्रोध करना पुण्य को नष्ट कर देता है।