15 साल की उम्र में भारतीय टीम में दस्तक: वैभव सूर्यवंशी और सचिन तेंदुलकर की तुलना पर कृष्णमाचारी श्रीकांत की दो टूक

15 साल की उम्र में भारतीय टीम में दस्तक: वैभव सूर्यवंशी और सचिन तेंदुलकर की तुलना पर कृष्णमाचारी श्रीकांत की दो टूक

 

15 साल के वैभव सूर्यवंशी का भारतीय टी20 टीम में चयन। कृष्णमाचारी श्रीकांत ने सचिन तेंदुलकर से तुलना को गलत बताया और युवा खिलाड़ी को धैर्य के साथ तैयार करने की सलाह दी।

भारतीय क्रिकेट में अक्सर प्रतिभाओं का आना लगा रहता है, लेकिन वैभव सूर्यवंशी का मामला कुछ अलग है। केवल 15 साल की आयु में भारतीय टीम के लिए बुलावा पाना किसी भी खिलाड़ी के लिए एक सपना सच होने जैसा है। वैभव न केवल अपनी बल्लेबाजी शैली के लिए बल्कि सचिन तेंदुलकर के सबसे कम उम्र में टीम इंडिया में कॉल-अप पाने के रिकॉर्ड को तोड़ने के कारण सुर्खियों में हैं। यदि वे आगामी आयरलैंड और इंग्लैंड टी20 सीरीज में डेब्यू करते हैं, तो वे भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम का प्रतिनिधित्व करने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बन जाएंगे। हालांकि, इस भारी-भरकम उम्मीदों के बोझ के बीच, पूर्व विश्व कप विजेता कृष्णमाचारी श्रीकांत ने इस युवा खिलाड़ी को ‘सचिन से तुलना’ के जाल से बाहर रखने की सलाह दी है।

“सचिन से तुलना न करें”: श्रीकांत का स्पष्ट रुख

वैभव सूर्यवंशी को लेकर क्रिकेट जगत में ‘अगले सचिन तेंदुलकर’ होने की चर्चा तेज है, लेकिन पूर्व भारतीय कप्तान कृष्णमाचारी श्रीकांत ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है। समाचार एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए श्रीकांत ने कहा, “आइए सचिन और सूर्यवंशी की तुलना न करें। सचिन क्रिकेट के भगवान हैं और वैभव सूर्यवंशी, मुझे लगता है कि ईश्वर के पुत्र हैं। इसे इस तरह से देखें। सचिन को अकेला छोड़ दें, उनके पास कोई नहीं आ सकता।”

श्रीकांत का यह बयान उस परिपक्वता को दर्शाता है जो एक युवा खिलाड़ी को अत्यधिक दबाव से बचाने के लिए जरूरी है। उनका मानना है कि किसी भी नए खिलाड़ी पर महानता का यह बोझ डालना उसकी स्वाभाविक प्रगति में बाधा बन सकता है।

वैभव को मिले ‘लम्बी रस्सी’ (Long Rope)

वैभव की क्षमता पर अटूट विश्वास जताते हुए श्रीकांत ने भारतीय टीम प्रबंधन को धैर्य रखने की सलाह दी है। उन्होंने कहा, “इस लड़के को समय की जरूरत है। उसे बहुत प्रोत्साहन दें। वह ऐसा खिलाड़ी है जो अकेले दम पर मैच जिता सकता है। इसलिए, मुझे विश्वास है कि उसे बहुत, बहुत लम्बी रस्सी (अवसर) दी जानी चाहिए।”

श्रीकांत का मानना है कि वैभव को अभी तैयार (mould) करने की प्रक्रिया में है। यदि उन्हें पर्याप्त मौके दिए जाएं और सही मार्गदर्शन मिले, तो वह भारतीय क्रिकेट के लिए एक अद्भुत खिलाड़ी साबित हो सकते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि जल्दबाजी में इस प्रतिभा को खराब नहीं करना चाहिए।

“टीम के साथ रहें, लेकिन जल्दबाजी न करें”

वैभव के टी20 सेटअप में शामिल होने के फैसले का समर्थन करते हुए भी श्रीकांत ने एक संतुलित राय दी है। उनका कहना है कि शुरुआत में उन्हें प्लेइंग इलेवन में शामिल करने की जल्दबाजी करने के बजाय, उन्हें अंतरराष्ट्रीय माहौल का आदी बनाना चाहिए। उन्होंने कहा, “इंग्लैंड सीरीज के लिए, उन्हें रिजर्व में रहने दें। उन्हें समझने दें कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट क्या होता है। मुझे लगता है कि उन्हें टीम के साथ रहना चाहिए, भले ही उन्हें अंतिम 11 में जगह न मिले क्योंकि संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा जैसे खिलाड़ी फिलहाल पक्के तौर पर खेल रहे हैं।”

श्रीकांत के अनुसार, टीम का संयोजन ऐसा होना चाहिए कि वैभव को अंतरराष्ट्रीय दबाव का अनुभव भी हो जाए और उन पर बेवजह प्रदर्शन का भारी दबाव भी न पड़े।

क्या है वैभव का भविष्य?

15 साल की उम्र में वैभव के लिए यह ‘अग्निपरीक्षा’ है। श्रीकांत ने जोर देकर कहा कि टीम चाहे छोटी हो या बड़ी, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट एक चुनौती है। उनका तर्क है कि यदि उसे इंग्लैंड या आयरलैंड जैसी टीमों के खिलाफ खेलना है, तो उसे खेलने दें, लेकिन उसे इस तरह से पुश न करें कि वह अपना प्राकृतिक खेल (natural game) खो दे।

वैभव सूर्यवंशी के सामने अब चुनौती सिर्फ रन बनाने की नहीं, बल्कि उस उम्मीदों के पहाड़ को संभालने की है, जो पूरे देश ने उन पर लगा दी है। यदि बीसीसीआई और टीम प्रबंधन श्रीकांत की सलाह मानते हुए उन्हें धीरे-धीरे और व्यवस्थित तरीके से तैयार करता है, तो वैभव सूर्यवंशी आने वाले समय में भारतीय क्रिकेट के सबसे बड़े सितारे बन सकते हैं। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें इस 15 साल के ‘बैटिंग प्रॉडिजी’ पर हैं कि जब उसे मौका मिलेगा, तो वह अपनी पहली छाप कैसे छोड़ता है।

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