15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी ने लिस्ट ए क्रिकेट में सबसे तेज अर्धशतक जड़कर इतिहास रच दिया। जानें कैसे कोच हृषिकेश कानिटकर की सलाह ने उन्हें बनाया मैच विनर।
भारतीय क्रिकेट में वैभव सूर्यवंशी का उदय हुआ है। इस युवा बल्लेबाज ने महज 15 साल की उम्र में विश्व भर में अपनी प्रतिभा का कायल कर दिया है। श्रीलंका में ट्राई-नेशनल ‘ए’ सीरीज के फाइनल में वैभव ने लिस्ट ए क्रिकेट इतिहास का सबसे तेज अर्धशतक जड़कर भारत को जीत भी दिलाई। उनकी 29 गेंदों में 94 रनों की तूफानी पारी ने भारतीय क्रिकेट का भविष्य सुनिश्चित कर दिया।
2026 में अंतर्राष्ट्रीय आईपीएल
जब वैभव सूर्यवंशी ने आईपीएल 2026 के प्लेऑफ में अपनी बल्लेबाजी का लोहा मनवाया, तो उनका नाम चर्चा में आया। उन्होंने क्वालीफायर-2 में 96 रनों और एलिमिनेटर मैच में 97 रनों की पारियां खेलकर आईपीएल इतिहास में सबसे युवा ऑरेंज कैप विजेता बनने का गौरव हासिल किया। उसकी विध्वंसक बल्लेबाजी ने चयनकर्ताओं को इतना प्रभावित किया कि उन्हें आयरलैंड और इंग्लैंड के आगामी टी20 सीरीज के लिए ऐतिहासिक बुलावा मिला। किसी सपने को सच करने की तरह 15 साल की उम्र में यह उपलब्धि हासिल करना है।
दबाव से उत्कृष्ट वापसी: दम्बुला फाइनल
श्रीलंका में खेली गई इस ट्राई-नेशन सीरीज की शुरुआत कुछ कठिन रही। उन्होंने शुरूआती चार पारियों में 117 रन बनाए, लेकिन उन्होंने अपनी अच्छी शुरुआत को बड़ी पारियों में बदलने में नाकाम रहे। उन्होंने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया जब टीम की जरूरत थी, जैसे फाइनल मुकाबले में।
श्रीलंका ‘ए’ के खिलाफ इस फाइनल में वैभव ने 11 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया। यह लिस्ट ए क्रिकेट में सर्वाधिक तेज अर्धशतक है। भारत ए की टीम ने अपनी उत्कृष्ट शुरुआत की बदौलत श्रीलंका ए के खिलाफ 377/9 का अविश्वसनीय स्कोर बनाया, जो अंततः जीत का कारण बना।
कोच हृषिकेश कानिटकर से सलाह
इतनी छोटी उम्र में बड़ी अपेक्षाओं का बोझ सहना भी कठिन होता है। वैभव ने इस उत्कृष्ट वापसी का पूरा श्रेय भारत ‘ए’ के कोच हृषिकेश कानिटकर को दिया। ‘स्पोर्टस्टार’ को दिए साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि वे शुरू में अपनी लय खो रहे थे क्योंकि वे अच्छा प्रदर्शन करने के लिए ‘बहुत अधिक कोशिश’ कर रहे थे।
“ये स्थितियां थोड़ी अलग थीं, जिसने शुरुआत में कुछ चुनौतियां पेश कीं,” वैभव ने कहा। मैं अपनी योजनाओं को सही से लागू नहीं कर पा रहा था क्योंकि मैं बहुत दबाव में था। तब हृषिकेश सर ने कहा, “तू अपना प्राकृतिक खेल खेल, बहुत सोच मत।”कानिटकर की इस छोटी सी सलाह ने वैभव की सोच बदल दी। उन्होंने अपना प्राकृतिक खेल दिखाया और परिणाम सबके सामने है। उन्हें कोच के इस मार्गदर्शन ने आत्मविश्वास बढ़ाया और खुद पर विश्वास करने की ताकत दी।
इतिहास रचने की शुरुआत
अब वैभव सूर्यवंशी के पास सबसे कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने वाला भारतीय क्रिकेटर बनने का अवसर है। उनके खेल में वर्षों के अनुभव से प्राप्त निडरता और परिपक्वता दिखाई देती है। उनकी बल्लेबाजी में विशिष्ट ऊर्जा है—वे गेंद को मारने में विश्वास करते हैं, न कि पिच पर जमने की कोशिश करते हैं।
श्रीलंका में हासिल की गई यह सफलता सिर्फ एक पारी नहीं है; यह एक बहुत बड़े करियर की शुरुआत है। अब क्रिकेट में उनकी तुलना दिग्गज खिलाड़ियों से होने लगी है। जिस तरह से वे अपने प्राकृतिक खेल पर टिके हुए हैं, यह स्पष्ट है कि वैभव सूर्यवंशी आने वाले समय में न केवल भारत के लिए बल्कि विश्व क्रिकेट में भी बड़े मैच जीतने वाले होंगे।
यह सिर्फ शुरुआत है, लेकिन 15 साल की उम्र में आत्मविश्वास ने दिखाया कि आने वाले दशक में भारतीय क्रिकेट में उनकी गूंज सुनाई देगी। अब प्रशंसकों को उन्हें विश्व कप में देखने का बेसब्री से इंतजार है।