US Treasury की 10 साल की बॉन्ड यील्ड बढ़कर 4.84 फीसदी पर पहुंच गई। 6 अरब डॉलर के Bond Buyback के बावजूद यील्ड में तेजी से निवेशकों की चिंता बढ़ी है।
बुधवार को अमेरिकी बॉन्ड बाजार में एक बार फिर भारी वृद्धि हुई। US Treasury Yield लगभग तीन साल की सबसे ऊंची दर पर पहुंच गई। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने सरकारी बॉन्ड की 6 अरब डॉलर तक की पुनर्खरीद की घोषणा की, लेकिन निवेशकों की चिंता कम नहीं हुई। बाजार में निरंतर बढ़ते बॉन्ड यील्ड ने अमेरिकी सरकारों, कंपनियों और आम उपभोक्ताओं पर कर्ज बढ़ाने का दबाव डाला है।
10 साल की यूएस बैंक की ब्याज दर 4.84% पर पहुंची
बुधवार को अमेरिका की 10 साल की Treasury Yield बढ़कर 4.84% हो गई। अक्टूबर 2023 के बाद यह सर्वोच्च क्लोजिंग स्तर है। ट्रेजरी विभाग ने 6 अरब डॉलर के बॉन्ड बायबैक की सूचना दी, जिसके बाद यील्ड में और तेजी आई। निवेशकों ने सरकार की इस कार्रवाई से पूरी तरह असंतोष व्यक्त किया है।
बॉन्ड की यील्ड और कीमत का संबंध एक-दूसरे से अलग है। निवेशक बॉन्ड बेचते समय उनकी यील्ड बढ़ती है और उनकी कीमत घटती है। अमेरिकी सरकारी बॉन्ड में इस साल हुई बिकवाली ने कीमतों पर दबाव डाला है, जिसका असर यील्ड में तेजी से दिखाई दे रहा है।
6 अरब डॉलर का बोंड बायबैक क्या है?
19 अगस्त को अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने कहा कि सितंबर से नवंबर के बीच बॉन्ड बायबैक का आकार कम से कम दोगुना होगा। बुधवार को विभाग ने पहले बायबैक ऑपरेशन के लिए 6 अरब डॉलर की अधिकतम सीमा निर्धारित की। यह आम तौर पर 2 अरब डॉलर की एक परियोजना से तीन गुना अधिक है।
सरकार का लक्ष्य बॉन्ड बाजार में तरलता को बढ़ावा देना और उसके सुचारु संचालन में मदद करना है। लंबे समय वाले सरकारी बॉन्ड की पुनर्खरीद से बाजार में उपलब्ध बॉन्ड की संख्या कम हो सकती है। इससे बॉन्ड की कीमतें बढ़ सकती हैं और क्षेत्र में कुछ नरमी आ सकती है।
Buyback से निवेशकों को राहत क्यों नहीं मिली?
बाजार की प्रतिक्रिया से पता चलता है कि कई निवेशक 6 अरब डॉलर से अधिक का बायबैक चाहते थे। ट्रेजरी विभाग की घोषणा के बाद भी 10 वर्ष की यील्ड में तेजी बनी रही। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि केवल बॉन्ड बायबैक से खेल में लंबे समय से चल रही तेजी की दिशा को बदलना मुश्किल होगा।
ING के ग्लोबल रेट्स और डेट स्ट्रैटेजी प्रमुख पद्रीक गार्जी ने कहा कि बाजार का संकेत है कि ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेस्टन को लंबी अवधि की ब्याज दरों पर प्रभावी नियंत्रण हासिल करना मुश्किल होगा। यानी सरकार की कार्रवाई कुछ समय के लिए राहत दे सकती है, लेकिन बाजार की मुख्य चिंताएं अभी भी रहती हैं।
बढ़ते उत्पादन से महंगा हो रहा कर्ज
US Treasury Yield में बढ़ोतरी केवल बॉन्ड निवेशकों पर ही असर नहीं करती। अमेरिकी सरकारी बॉन्ड विश्व वित्तीय बाजार में एक महत्वपूर्ण मानक है। व्यवसायों और ग्राहकों को कर्ज देने की लागत बढ़ सकती है जब उनकी संपत्ति बढ़ती है।
सरकार भी ऊंची यील्ड से अधिक ब्याज खर्च करती है। अमेरिका का राजकोषीय घाटा और सरकारी कर्ज पहले से ही चर्चा में हैं, इसलिए बढ़ती यील्ड वित्तीय दबाव को और बढ़ा सकती है।
AI कंपनियों के लिए भी अधिक कर्ज की आवश्यकता
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी के कई कारण हैं। इनमें बढ़ती ऊर्जा कीमतें, सरकारों के बढ़ते घाटे, केंद्रीय बैंकों की संभावित ब्याज दर बढ़ोतरी और राजकोषीय स्थिति की चिंता शामिल हैं।
इसके अलावा, AI इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार करने के लिए कंपनियों से बड़ा कर्ज मिल रहा है। बॉन्ड बाजार पर दबाव डाल सकती है बढ़ती कॉरपोरेट बॉन्ड आपूर्ति। वर्तमान परिस्थितियों में, निवेशक अधिक रिटर्न की मांग कर रहे हैं, जिससे क्षेत्र ऊपर बनी हुई है।
10 साल की बॉन्ड नीलामी में बढ़ती मांग
यह दिलचस्प है कि बुधवार को अमेरिका में 10 वर्ष के सरकारी बॉन्ड की नीलामी भी हुई, जिसमें निवेशकों की मांग मजबूत हुई। ऊंची यील्ड के बावजूद, निवेशक अमेरिकी सरकारी बॉन्ड बाजार से दूर नहीं हो गए हैं।
Wells Fargo Investment Institute के रणनीतिकार Luis Alvarado का कहना है कि नीलामी में यील्ड 2007 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर रही है। इसका अर्थ है कि निवेशक अमेरिकी सरकारी कर्ज को अपने पास रखने के लिए अधिक मुआवजे की मांग कर रहे हैं और साथ ही बाजार में खरीदारी कर रहे हैं।
क्या भुगतान अस्थायी राहत देगा?
गुरुवार को ट्रेजरी विभाग की 6 अरब डॉलर की पहली बॉन्ड पुनर्खरीद होगी। आने वाले हफ्तों में चार अरब डॉलर से अधिक का निर्धारित बायबैक भी हो सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि ये उपाय अल्पावधि में बॉन्ड बाजार को सहारा दे सकते हैं, लेकिन यील्ड की मूल वजहों को नहीं समाप्त करते।
बाजार अभी भी बढ़ा सरकारी कर्ज, महंगी ऊर्जा, कॉरपोरेट बॉन्ड की आपूर्ति और संभावित ब्याज दर बढ़ोतरी से चिंतित है। नतीजतन, निवेशकों का ध्यान आने वाले दिनों में यूएस टैक्स रिटर्न पर रहेगा। वैश्विक शेयर बाजारों, करेंसी बाजारों और भारत जैसे उभरते बाजारों पर भी ऊंची यील्ड का असर पड़ सकता है।