अमेरिकी जुलाई जॉब्स डेटा पर टिकी बाजार की नजर, Fed के ब्याज दर फैसले से पहले एशियाई शेयर बाजारों में बढ़ी बेचैनी

अमेरिकी जुलाई जॉब्स डेटा पर टिकी बाजार की नजर, Fed के ब्याज दर फैसले से पहले एशियाई शेयर बाजारों में बढ़ी बेचैनी

 

अमेरिकी जुलाई जॉब्स डेटा से पहले एशियाई शेयर बाजारों में सतर्कता बढ़ गई है। निवेशकों की नजर Fed के अगले ब्याज दर फैसले, रोजगार आंकड़ों और बढ़ती तेल कीमतों पर है।

अमेरिकी रोजगार के आंकड़ों का इंतजार शुक्रवार को एशियाई शेयर बाजारों पर साफ दिखाई दिया। निवेशकों की नजर अमेरिका के जुलाई के नॉन-फार्म पेरोल यानी NFP आंकड़ों पर टिकी है, क्योंकि यह रिपोर्ट अगले महीने अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति को प्रभावित करने में अहम भूमिका निभा सकती है। इसी बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने मध्य पूर्व में जारी तनाव को लेकर बाजार की चिंताओं को फिर बढ़ा दिया है। एशियाई बाजारों में शुक्रवार को मिला-जुला रुख देखने को मिला, जबकि निवेशक महंगाई, ब्याज दरों और अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती के संकेतों का आकलन कर रहे हैं।

एशियाई बाजारों में मिला-जुला कारोबार

MSCI के जापान को छोड़कर एशिया-प्रशांत क्षेत्र के शेयरों का व्यापक सूचकांक शुक्रवार को लगभग स्थिर रहा। हालांकि, सप्ताह के आधार पर इसमें करीब 0.4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। जापान का निक्केई इंडेक्स 0.9 फीसदी नीचे रहा, लेकिन पूरे सप्ताह के दौरान इसमें लगभग 1.2 फीसदी की बढ़त रहने की उम्मीद थी।

दक्षिण कोरिया के KOSPI में शुक्रवार को करीब 0.5 फीसदी की गिरावट देखी गई। इसके साथ ही इंडेक्स लगातार सातवें सप्ताह गिरावट की ओर बढ़ता नजर आया और इस सप्ताह इसमें लगभग 5 फीसदी की कमजोरी रही। इसके विपरीत चीन के CSI 300 इंडेक्स में करीब 0.2 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई।

AI शेयरों की तेजी के बाद बाजार में सतर्कता

इस साल की पहली छमाही में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से जुड़े चिप शेयरों की जोरदार मांग ने खासतौर पर एशियाई बाजारों को मजबूत सहारा दिया था। दक्षिण कोरिया का KOSPI भी इसी तेजी का प्रमुख लाभार्थी रहा और साल की पहली छमाही में इसका स्तर लगभग दोगुना हो गया था।

हालांकि, AI से जुड़ी तेजी कितनी टिकाऊ है, इसे लेकर हाल के दिनों में निवेशकों के बीच चिंता बढ़ी है। इस वजह से बाजार में कई बार तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला। अब निवेशकों का ध्यान अमेरिकी रोजगार आंकड़ों पर केंद्रित हो गया है, क्योंकि इन आंकड़ों से अमेरिकी अर्थव्यवस्था की वास्तविक स्थिति और फेड की अगली रणनीति के संकेत मिल सकते हैं।

जुलाई के रोजगार आंकड़ों पर सबकी नजर

अमेरिका में जुलाई के रोजगार आंकड़े शुक्रवार को जारी होने हैं। बाजार में मौजूद अनुमान के मुताबिक जुलाई में करीब 80,000 नई नौकरियां जुड़ सकती हैं। जून में अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 57,000 नौकरियों की बढ़ोतरी हुई थी। वहीं, बेरोजगारी दर के 4.2 फीसदी पर स्थिर रहने का अनुमान लगाया जा रहा है।

अगर रोजगार आंकड़े उम्मीद से काफी मजबूत आते हैं तो इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मजबूती का संकेत मिल सकता है। हालांकि, निवेशकों के लिए मजबूत रोजगार आंकड़े इस समय सकारात्मक खबर नहीं भी साबित हो सकते हैं, क्योंकि इससे फेडरल रिजर्व पर ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रखने का दबाव बढ़ सकता है।

फेड के अगले फैसले को लेकर असमंजस

बाजार में इस समय सबसे बड़ा सवाल यही है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व अगले महीने ब्याज दरों को लेकर क्या फैसला करेगा। निवेशक इस बात को लेकर स्पष्ट नहीं हैं कि मौद्रिक नीति का अगला कदम किस दिशा में जाएगा। बाजार में ब्याज दरों में बदलाव को लेकर संभावनाएं लगभग बराबरी पर दिखाई दे रही हैं।

जॉब रिपोर्ट इस तस्वीर को बदल सकती है। अगर रोजगार बाजार मजबूत दिखाई देता है तो फेड के लिए महंगाई पर नियंत्रण को प्राथमिकता देते हुए अपेक्षाकृत सख्त रुख बनाए रखना आसान हो सकता है। दूसरी ओर, अगर रोजगार आंकड़े कमजोर रहते हैं तो ब्याज दरों में नरमी की उम्मीद मजबूत हो सकती है।

‘गुड न्यूज इज बैड न्यूज’ का फॉर्मूला

JPMorgan के मुख्य अमेरिकी अर्थशास्त्री माइकल फेरोली के अनुसार, मौजूदा परिस्थितियों में अमेरिकी जॉब रिपोर्ट बाजार के लिए ‘गुड न्यूज इज बैड न्यूज’ वाली स्थिति पैदा कर सकती है। इसका मतलब है कि अगर रोजगार के आंकड़े उम्मीद से बेहतर आते हैं तो यह अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर होगी, लेकिन शेयर बाजार इसे नकारात्मक तरीके से ले सकता है।

मजबूत रोजगार आंकड़ों से ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे बने रहने की संभावना बढ़ सकती है। इससे अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ऊपर जा सकती है और शेयर बाजार पर दबाव पड़ सकता है। इसके विपरीत कमजोर रोजगार आंकड़ों से यील्ड में गिरावट और ब्याज दरों में नरमी की उम्मीद बढ़ सकती है, जिसका फायदा शेयर बाजारों को मिल सकता है।

तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता

एशियाई बाजारों के लिए अमेरिकी रोजगार आंकड़ों के अलावा कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी चिंता का विषय बनी हुई है। मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण ऊर्जा बाजार पर दबाव बना हुआ है। अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रहती हैं तो इसका असर वैश्विक महंगाई पर पड़ सकता है।

महंगे तेल से आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं की लागत बढ़ती है और इससे केंद्रीय बैंकों के लिए ब्याज दरों में तेजी से कटौती करना मुश्किल हो सकता है। इसलिए निवेशक मध्य पूर्व की स्थिति और तेल बाजार की गतिविधियों पर भी नजर बनाए हुए हैं।

अमेरिकी और यूरोपीय बाजारों पर भी असर

अमेरिकी शेयर बाजार के वायदा कारोबार में भी शुक्रवार को ज्यादा उत्साह नजर नहीं आया। Nasdaq के वायदा भाव लगभग स्थिर रहे, जबकि S&P 500 के वायदा में करीब 0.1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। यूरोपीय शेयर बाजारों में भी कमजोर शुरुआत के संकेत मिले और पूरे क्षेत्र के शेयर वायदा लगभग 0.2 फीसदी नीचे रहे।

अब बाजार की दिशा काफी हद तक अमेरिकी रोजगार आंकड़ों पर निर्भर करेगी। मजबूत आंकड़े ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख की आशंका बढ़ा सकते हैं, जबकि कमजोर आंकड़े निवेशकों को राहत दे सकते हैं। ऐसे में शुक्रवार की अमेरिकी जॉब रिपोर्ट न केवल वॉल स्ट्रीट बल्कि एशिया और यूरोप के शेयर बाजारों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण साबित होने वाली है।

 

 

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