मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल पर राजस्थान में टीबी मुक्त अभियान तेजी से प्रगति पर, 74 लाख से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग पूरी

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल पर राजस्थान में टीबी मुक्त अभियान तेजी से प्रगति पर, 74 लाख से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग पूरी

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान में टीबी मुक्त भारत अभियान तेजी से आगे बढ़ रहा है। 74 लाख से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग के साथ छिपे टीबी मामलों की पहचान कर मुफ्त उपचार दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में चिकित्सा विभाग टीबी मुक्त भारत मिशन के तहत राजस्थान को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में तीव्र कदम उठा रहा है। 25 जून 2025 से शुरू हुए सक्रिय क्षय रोग खोज अभियान के अंतर्गत अब तक प्रदेश में 74 लाख से अधिक अति संवेदनशील जनसंख्या की घर-घर जाकर स्क्रीनिंग की जा चुकी है। अभियान का लक्ष्य 1.67 करोड़ संवेदनशील व्यक्तियों तक पहुंचना है।

स्क्रीनिंग के दौरान 2,35,054 लोगों में टीबी के लक्षण पाए गए, जिन्हें जांच और पुष्टि के लिए स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर किया गया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के टीबी मुक्त भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए प्रभावी रणनीति बनाकर अभियान को सफलता की ओर अग्रसर किया है।

यह अभियान 21 जुलाई 2025 तक जारी रहेगा, जिसका मुख्य उद्देश्य छुपे हुए टीबी के मामलों की जल्द पहचान कर निःशुल्क उपचार प्रदान करना है। विशेष रूप से पीएलएचआईवी, डायबिटीज रोगी, 60 वर्ष से ऊपर के लोग, कुपोषित व्यक्ति, धूम्रपान व मद्यपान करने वाले, प्रवासी मजदूर, आदिवासी समुदाय, पूर्व टीबी रोगी, और जेल एवं झुग्गी बस्तियों में रहने वालों की स्क्रीनिंग की जा रही है।

घर-घर जाकर टीबी जांच, संक्रमण रोकने में मददगार

टीबी की पहचान और नियंत्रण के लिए राज्य व जिला स्तर पर अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है। इस अभियान की दैनिक समीक्षा की जा रही है जिससे अधिक से अधिक मरीजों की पहचान हो और संक्रमण की श्रृंखला टूट सके। राजस्थान में टीबी मुक्त ग्राम पंचायत अभियान भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। 2024 में 3,350 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया गया, जिससे जागरूकता और समुदाय की भागीदारी में वृद्धि हुई है।

तकनीकी नवाचारों से टीबी उन्मूलन में तेजी

राज्य में टीबी मरीजों की पहचान, उपचार और निगरानी के लिए निक्षय पोर्टल, आशा डिजिटल हेल्थ ऐप और रियल टाइम डैशबोर्ड जैसी तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। नाट आधारित परीक्षण को प्राथमिकता देते हुए सटीक और शीघ्र निदान को सुनिश्चित किया जा रहा है। एनजीओ, निजी चिकित्सकों और CSR भागीदारों के सहयोग से टीबी नियंत्रण प्रयासों को मजबूती मिली है।

संसाधन बढ़ाकर क्षमता में वृद्धि

चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर के निर्देश पर नाट मशीनें, माइक्रोस्कोपी, एक्स-रे मशीन और लैब तकनीशियनों की संख्या बढ़ाई गई है। वर्ष 2024 में राज्य में 1,71,415 टीबी रोगियों का सफलतापूर्वक नोटिफिकेशन किया गया, जो लक्ष्य का 101 प्रतिशत है। वहीं, जून 2025 तक 89,132 रोगियों का नोटिफिकेशन हो चुका है, जो लक्ष्य से अधिक है। नाट तकनीक की मदद से टीबी का तेज और सटीक पता लगाकर रोगियों को समय पर उपचार मुहैया कराया जा रहा है, जिससे संक्रमण फैलने से रोका जा सकता है।

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