ट्विंकल खन्ना ने अक्षय कुमार के “मत कर” वाले मंत्र को बताया अपने लेखन करियर का बड़ा हिस्सा; साझा की पसंदीदा किताबों की लिस्ट

ट्विंकल खन्ना ने अक्षय कुमार के "मत कर" वाले मंत्र को बताया अपने लेखन करियर का बड़ा हिस्सा; साझा की पसंदीदा किताबों की लिस्ट

विश्व पुस्तक दिवस पर ट्विंकल खन्ना ने अपने लेखन, अक्षय कुमार की सलाह और पिता राजेश खन्ना से मिली भाषा की सीख के बारे में बात की। पढ़ें उनकी पसंदीदा किताबों की सूची।

विश्व पुस्तक दिवस (World Book Day) के अवसर पर अभिनेत्री से लेखिका बनीं ट्विंकल खन्ना ने अपनी लेखन प्रक्रिया, पढ़ने की आदतों और अपने निजी जीवन के दिलचस्प पहलुओं पर खुलकर बात की। उन्होंने साझा किया कि कैसे उनके विचार आकार लेते हैं और उनके व्यक्तिगत अनुभव उनके लेखन को प्रभावित करते हैं।

लेखन और अक्षय कुमार का “योगदान”

बातचीत के दौरान ट्विंकल ने एक मजाकिया किस्सा साझा किया कि उनके पति और सुपरस्टार अक्षय कुमार उनके काम पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं। उन्होंने बताया:

“आज सुबह ही मैं अपने अगले कॉलम के विषयों पर चर्चा कर रही थी, तो उन्होंने मुझसे कहा, ‘मत करना… इस मुद्दे में मत पड़ना’। असल में, ‘मत कर’ ही मेरे लेखन करियर में उनका एकमात्र और सबसे बड़ा योगदान है।”

ट्विंकल ने आगे कहा कि उनका उद्देश्य किसी को उकसाना नहीं, बल्कि विचारों की गहराई में उतरना है। उन्होंने कहा कि कभी-कभी उनका लेखन लोगों को असहज कर सकता है, लेकिन वह केवल समाज और खुद के आसपास की ‘कंडीशनिंग’ (Conditioning) की परतों को उघाड़ने की कोशिश करती हैं।

भाषा और साहित्य से गहरा नाता

साहित्य के प्रति अपनी रुचि के बारे में बताते हुए ट्विंकल ने अपने पिता, दिवंगत दिग्गज अभिनेता राजेश खन्ना को याद किया। उन्होंने बचपन की एक याद साझा करते हुए कहा:

“जब मैं बहुत छोटी थी, मैंने अपने पिता से पूछा, ‘क्या आप मुझे स्कूल से पिक-अप करेंगे (Will you pick me up)?’ उन्होंने जवाब दिया, ‘क्या तुम कोई सामान हो (Are you a pickup)? मैं तुम्हें स्कूल से लेकर आऊंगा (I will fetch you)।’ उस पल ने मेरे लिए भाषा की शक्ति और सटीकता के मापदंड तय कर दिए।”

उन्होंने बताया कि वह पाठकों के परिवार में पली-बढ़ी हैं और उनकी बहन रिंकी खन्ना उनसे भी ज्यादा पढ़ती हैं।

पसंदीदा किताबें और लेखकों की सिफारिश

जब ट्विंकल से किताबों की सिफारिश करने के लिए कहा गया, तो उन्होंने लेखकों और शीर्षकों की एक लंबी सूची साझा की:

  • फ्रेड्रिक बैकमैन: ‘ए मैन कॉल्ड ओव’ (A Man Called Ove)
  • अरुंधति रॉय: ‘द गॉड ऑफ स्मॉल थिंग्स’ (The God of Small Things) – जिसे वह कई बार पढ़ चुकी हैं।
  • किरण देसाई और झुंपा लाहिड़ी: लघु कथाएं और अन्य रचनाएं।
  • हारुकी मुराकामी: ‘मेन विदाउट वुमन’ (Men Without Women)
  • अन्य लेखक: ऑक्टेविया ई. बटलर (फेमिनिस्ट साइंस फिक्शन), उर्सुला ले गुइन, एफ. स्कॉट फिट्ज़गेराल्ड और पीजी वोडहाउस।

 52 की उम्र और अधूरा सपना

52 वर्षीय ट्विंकल ने अपनी युवावस्था को याद करते हुए मजाक में कहा कि उन्होंने 18 साल की उम्र में जो किताब शुरू की थी, वह आज तक खत्म नहीं हो पाई है। उन्होंने सिनेमा से लेखन की ओर अपने बदलाव को स्वाभाविक बताया, क्योंकि किताबें हमेशा से उनके जीवन का एक अभिन्न हिस्सा रही हैं।

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